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सरकार ही करा रही है जमीनों की लूटः आर्य

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  • सदन में नेता विपक्ष ने उठाया मसूरी में पर्यटन विभाग की 762 बीघा जमीन का मामला

देहरादून। उत्तराखंड सरकार के बजट सत्र का आज पांचवा दिन है बीते कल सत्ता पक्ष द्वारा 10 विधेयकों को पारित करा लिया गया था आज उसे बजट को पारित कराने सहित कुछ अन्य काम भी निपटाने हैं जिसमें थोड़ा अधिक भी समय लग सकता है। लेकिन आज बजट सत्र के समापन की संभावना है। बीते कल जिस नये भू कानून को पारित कराया गया है उस पर सदन में कितनी चर्चा हुई और बजट पर कितनी चर्चा होगी यह अलग बात है लेकिन विधाई काम को पूरा करने की इन औपचारिकताओं के बीच सदन की कार्यवाही जारी है।
आज सदन में प्रश्नकाल भी हुआ और शुन्य काल भी हुआ। इस दौरान भू कानून का मुद्दा चर्चा में रहा जिस पर बोलते हुए विपक्ष के विधायकों ने सरकार द्वारा लाये गये भू कानून पर कई सवाल उठाए। नेता विपक्ष यशपाल आर्य ने सरकार के समक्ष जमीनों की लूट पाट का एक उदाहरण पेश करते हुए कहा कि राज्य के मसूरी जैसे हिल स्टेशन पर उत्तराखंड पर्यटन विभाग की जमीन को कैसे ठिकाने लगाया गया इसे पेश कर रहा हूं। उन्होंने कहा कि पर्यटन विभाग की यहां 172 एकड़ जमीन थी जिसमें से 142 एकड़ भूमि पर्यटन विकास परिषद के एक अधिकारी द्वारा एक करोड रुपए साल के किराए पर दे दी गई। उन्होंने बताया कि 15 साल के लिए जो 62 बीघा जमीन एक करोड रुपए सालाना किराए पर दी गई इस जमीन को विकसित करने पर सरकार ने एशियाई विकास बैंक से 23 करोड़ का कर्ज लिया गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार को 15 साल में इसका किराया मिलेगा 15 करोड़ लेकिन सरकार ने खर्च किया 23 करोड़ ऐसे में इस सौदे का क्या फायदा सरकार को हुआ समझ से परे है। उन्होंने कहा कि एक करोड रुपए साल के किराए में राजपुर रोड पर भी एक दुकान नहीं मिलती है।
उन्होंने कहा कि इस जमीन का अगर सर्किल रेट के हिसाब से भी कीमत लगायी जाए तो वह 2757 करोड रुपए होता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जिन तीन कंपनियां को टेंडर के आधार पर यह जमीन दी गई उसमें टेंडर डालने वाली दो अन्य कंपनियाें के बुक ऑफ अकाउंट के पता भी एक ही हैं जिसका सीधा मतलब है कि यह सभी अलग—अलग नहीं एक ही कंपनी है। उन्होंने कहा कि इस कंपनी द्वारा 2 साल पुराने रास्तों को बंद कर दिया गया और आने—जाने वालों से 200 रूपये व पार्किंग के 400 रूपये वसूले जा रहे हैं। ऐसे में समझा जा सकता है कि भू कानून बनाने वाले ही जब जमीनों की लूट कर रहे हैं या करा रहे हैं तो जमीने कहां और कैसे बचेगी?

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