प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रभक्ति की दुहाई देकर मिडिल क्लास से त्याग और बलिदान की अपील कर रहे हैं अगर उन्हें देश के मिडिल क्लास कहे जाने वाले लोगों को असल आर्थिक स्थिति का ज्ञान होता तो कदाचित वह उनसे ऐसी अपील करते ही नहीं। उन्हें इस बात का पता ही नहीं है कि वह जिस मिडिल क्लास से सोना न खरीदने की बात कर रहे है, वह तो बीते 10 सालों में अपने घर में रखे सोने—चांदी को भी बेच चुके हैं और अब उनकी यह कुव्वत नहीं है की डेढ़ लाख रुपए तोले का सोना खरीद सके। महंगाई और बेरोजगारी ने उनकी जमा पूंजी और जेवर सब चट कर लिया है। न जाने वह कौन लोग हैं जो प्रधानमंत्री को यह बताते हैं कि मिडिल क्लास के लोग होली में विदेश घूमने जाते हैं और विदेशों में वेंडिंग भी अरेंज की जा रही है अगर आपकी जानकारी में ऐसा कोई मिडिल क्लास हो जो अपने बच्चों की शादियां विदेश जाकर कर रहा हो कृपया हमें भी बताइए। हां मोदी जी की एक अपील पर वह जरूर काम कर सकते हैं कि वह अपनी कार जो तेल पीकर चलती है और रसोई जहां दाल भात में जो तेल का छौंका लगता है उसमें कटौती कर सकते हैं भले ही काम पर पहुंचने में थोड़ा समय लगेगा या फिर शरीर को पोषक तत्व कम मिले। मोदी को चाहिए था कि वह अपील की बजाय सरकारी कर्मचारियों और स्कूलों को एक सरकारी आदेश जारी कर देते कि वह दफ्तर न जाए व घर बैठकर ही काम करें स्कूलों में ताले डाल दिए जाएं और बच्चों को भी ऑनलाइन पढ़ाई कराई जाए। सच यह है कि देश के मिडिल क्लास का तेल सरकार बहुत पहले ही निकाल चुकी है कोरोना और नोटबंदी में जो कुछ इस मिडिल क्लास के साथ हुआ वह पूरे देश के लोग जानते हैं। सही—सही कसर को जीएसटी ने पूरा कर दिया है। आम आदमी जिसकी बचत खत्म हो चुकी है और आमदनी व वर्तमान के खर्चों को भी पर्याप्त नहीं है उस देश के मिडिल क्लास के लिए पीएम मोदी के उपदेश किसी भूखे व्यक्ति को उपवास के फायदे बताने जैसा ही है। लेकिन मोदी को यह बात भला कौन समझा सकता है क्योंकि वह देश के एकमात्र ऐसे ज्ञानी प्रधानमंत्री हैं कि जो नाले की गैस से चाय बनाने का हुनर भी जानते हैं तथा बादलों की आड़ में फाइटर प्लेन के रडार की पकड़ में न आने के अद्भुत रहस्य भी जानते हैं। पीएम की इस अपील का जिसमें उन्होंने तमाम सारी अपेक्षाएं देश के लोगों से संकट निवारण के लिए की हैं उसके पीछे सबसे अहम कारण यह है कि देश की अर्थव्यवस्था का कचूमर निकल चुका है और यह सब सरकार की गलत नीतियों के कारण हुआ है। विदेश से सोना लाने की छूट किसकी सरकार द्वारा दी गई जिस पर सरकार लोगों से टैक्स वसूली को अपना बड़ा फायदा मान बैठी थी? इस सवाल का जवाब कोई पीएम मोदी से पूछ कर देखें इसमें कोई संदेह नहीं है कि देश के सामने गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट खड़ा हुआ है जिसका अब सरकार के पास कोई समाधान का रास्ता नहीं है महंगाई का ऐसा बम फूटने वाला है जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते। पेट्रोल डीजल के दामों में कभी भी बड़ी बढ़ोतरी की जा सकती है। गैस के दाम भी आसमान छुएंगे। सब कुछ महंगा होने वाला है। आयात की हैसियत तक नहीं रही है क्योंकि डॉलर नहीं है और डॉलर रुपए को निगल चुका है। इसलिए अब सरकार के पास जनता से अपील के अलावा बचा ही कुछ नहीं है। मगर भूखी नंगी जनता सरकार की क्या मदद करेगी? इस पर विचार किया जाना जरूरी है। इसलिए अब सब कुछ रामभरोंसे है। देखिए आगे—आगे होता है क्या?




