May 28, 2026देहरादून। पुलिस ने चोरी के सामान के साथ महिला को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसको न्यायालय में पेश किया जहां से उसको न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।मिली जानकारी के अनुसार सुनीता शर्मा, वरिष्ठ शाखा प्रबंधक, बैंक ऑफ इंडिया, शाखा एस्ले हॉल देहरादून के द्वारा कोतवाली नगर पर आकर तहरीर दी कि चोर द्वारा बैंक के बाहर एटीएम में लगे एयर कंडीशनर आउटडोर तथा यूनिट कॉपर वायर चोरी कर लिए गए हैं। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी। वर्तमान में प्रचलित आपरेशन प्रहार के अन्तर्गत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा सभी अधीनस्थों को आपराधिक गतिविधियों में लिप्त लोगोेंं को चिन्हित करते हुए उनके विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही किये जाने हेतु निर्देशित किया गया है। घटना के खुलासे तथा गिरफ्तारी हेतु वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा पुलिस टीम को आवश्यक निर्देश दिये गये। निर्देशों के अनुपालन में पुलिस टीम द्वारा घटना स्थल का निरीक्षण कर आसपास तथा आने जाने वाले रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेजों का बारीकी से अवलोकन करते हुए संदिग्धों के सम्बन्ध में जानकारियां एकत्रित की गयी। प्राप्त जानकारी के आधार पर पुलिस टीम द्वारा सुरागरसी/पतारसी करते हुए स्थानीय तंत्र को भी सक्रिय किया गया। साथ ही पूर्व में इस प्रकार की घटनाओं में प्रकाश में आये अभियुक्तों की वर्तमान स्थिती की जानकारी कर उनका भौतिक सत्यापन किया गया। पुलिस टीम द्वारा किये जा रहे लगातार प्रयासों के परिणाम स्वरूप चेकिंग के दौरान मिली सूचना पर घटना को अंजाम देने वाली एक महिला को कोतवाली नगर क्षेत्र से चोरी किये गये सामान के साथ गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान उसका पूर्व में भी चोरी के अन्य मुकदमों में जेल जाना प्रकाश में आया है। पूछताछ में उसने अपना नाम ललिता देवी पत्नी लुटकुन साहनी निवासी आजाद कॉलोनी गोविंदगढ़ थाना केंट बताया। पुलिस ने उसको न्यायालय में पेश किया जहां से उसको न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
May 28, 2026`न खाऊंगा न खाने दूंगा, ‘न सोऊंगा न सोने दूंगा, अगर किसी देश का प्रधानमंत्री पद संभालते ही देश की जनता को ऐसे शब्दों से संबोधित करें तो जनता का उस पर गर्व करना और इस बात को लेकर आस्वस्त होना स्वाभाविक है जनता यही सोचेगी कि वाकई अब उसके अच्छे दिन आने ही वाले हैं। लेकिन 12 साल बाद अगर देश की कोई अदालत सरकार की लूट और अवैध वसूली के मामले में यह कहकर निर्देशित करें कि इन आरोपों से लगता तो यही है कि इस गंभीर मामले की जांच होनी ही चाहिए और बेंगलुरु के विकासनगर थाने में देश की वित्त मंत्री सीतारमण, तत्कालीन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, वर्तमान व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भाजपा कर्नाटक एवं ईडी के अधिकारियों के खिलाफ संगठित आर्थिक अपराध की गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया जाए। इस मामले की लड़ाई लड़ रही आदर्श जन संघर्ष परिषद ने कॉर्पाेरेट घरानों से 8000 करोड़ की अवैध वसूली के लिए वित्त मंत्री द्वारा ईडी को छापेमारी, गिरफ्तारी और डराने धमकाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जो इलेक्टोरल बांड के माध्यम से जाने—माने बिल्डर ग्रुप एसएमई वेदांता और एक अन्य कंपनी से की गई। खास बात यह है कि परिषद द्वारा इसके तमाम साक्ष्यों के साथ इस मामले को अदालत तक ले जाया गया है। इन आरोपों के साबित होने का मतलब होता है कि इस राजनीतिक वसूली में पूरी सरकार को जेल हो सकती है। यह मामला सीधे तौर पर उस इलेक्टोरल बांड से जुड़ा है जिसे देश की सुप्रीम कोर्ट द्वारा असंवैधानिक बता कर रद्द कर दिया गया है। इस एफआईआर के होने पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन का कहना है कि हम तो बहुत पहले से संसद में इसे उठाते रहे हैं कि ईडी का इस्तेमाल सरकार द्वारा कॉरपोरेटरों को डरा—धमका कर राजनीतिक वसूली के लिए किया जा रहा है अब एफआईआर हो गई तो देखे क्या होता है? सत्ता और संवैधानिक प्रतिष्ठानों की मिली भगत से होने वाली इस वसूली से देश में क्या—क्या बदला है? जिस चुनाव में 2014 से पहले 10 15 हजार कुल खर्च होता था वह अब एक लाख करोड़ से ऊपर जा चुका है। चुनाव के लिए पैसा तो चाहिए? यह कहां से आता है और कैसे आता है यह भी सभी जानते हैं। लेकिन इसमें सत्ता की जिस भागीदारी का मामला सामने आया है वह अत्यंत ही गंभीर है। एफआईआर कराने वाली परिषद ने अपने आरोप पत्र में इसका ब्यौरावार खुलासा किया गया है कहां से कब—कब कितनी वसूली की गई और किसने इन बांड को भुनाया। कोरोना काल में पीएमओ के पते पर बनाए गए केयर फंड की कहानी भी हर देश के नागरिक के सामने है। जिसके सदस्यों में गृहमंत्री से लेकर रक्षा मंत्री तक के नाम शामिल थे। उस समय इस केयर फंड में 12 से 14000 करोड़ तक पैसा आने की बात कही जाती है 3000 करोड़ अभी भी इसमें पड़े हैं यह पैसा कहां से आया और कहां खर्च किया गया इसका कोई हिसाब देने से सरकार ने साफ इनकार कर दिया गया सरकार का कहना है कि इससे उसका कोई लेना—देना नहीं है। इससे बड़ा कमाल और क्या हो सकता है। इसे लेकर लोग भाजपा नेताओं पर यह कहकर आरोप लगाते रहे हैं कि आपदा में अवसर तलाश में का काम सिर्फ भाजपा ही कर सकती है। बीते एक दशक में किसने क्या लूटा और कैसे—कैसे लूटा और लूटने वालों को क्या कोई सजा हुई? यह सवाल सिर्फ सवाल ही बना हुआ है। हां पर यह जरूर है कि यह लूट का स्तर इतना व्यापक रहा है कि आम आदमी को 2 जून की रोटी भी अब मुश्किल हो चुकी है आर्थिक मंदी के तूफान के भंवर में पूरा देश फंसा हुआ है। बाहर आने का कोई रास्ता भी किसी को नहीं सूझ रहा है। न्याय के लिए भी अब आम आदमी कहां जाए? बात भ्रष्टाचार की हो या बेरोजगारी या आर्थिक संकट की। ऐसे लोग अब कॉकरोच जनता पार्टी की ओर ही देख रहे हैं। शायद कॉकरोच ही इस संकट से जनता को बचाएं?
May 28, 2026शौर्य की धरती ‘गढ़वाल’ में आज भी है सेना में जाने की परंपरा देश की सीमाओं से गांव तक गूंजता है गढ़वाल का सैनिक गौरव देवभूमि की गौरवशाली परंपरा ने देश को दिए हजारों वीर जवान देहरादून। हिमालय की गोद में बसा गढ़वाल केवल प्राकृतिक सुंदरता और देवस्थलों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अदम्य वीरता और सैनिक परंपरा के लिए भी पूरी दुनिया में जाना जाता है। यहां की मिट्टी में साहस, अनुशासन और देशभक्ति रची-बसी है। गढ़वाल के गांवों में आज भी सेना को केवल नौकरी नहीं, बल्कि सम्मान, गौरव और राष्ट्रसेवा का सबसे बड़ा माध्यम माना जाता है।पीढ़ियों से यहां के युवाओं ने भारतीय सेना में भर्ती होकर सीमाओं की रक्षा की है। यही कारण है कि गढ़वाल को वीरों की भूमि कहा जाता है। यहां का लगभग हर गांव किसी न किसी सैनिक, शहीद या पूर्व सैनिक की कहानी अपने भीतर समेटे हुए है।गढ़वाल की सैनिक परंपरा का इतिहास सदियों पुराना है। प्राचीन काल में गढ़वाल के राजाओं की सेनाएं अपने साहस और यु( कौशल के लिए प्रसि( थीं। कठिन पहाड़ी परिस्थितियों में लड़ने की क्षमता ने यहां के यो(ाओं को विशेष पहचान दी।ब्रिटिश शासनकाल में जब अंग्रेजों ने गढ़वाल के युवाओं की बहादुरी देखी तब उन्होंने गढ़वाल राइफल्स की स्थापना की। वर्ष 1887 में स्थापित हुई। आज भारतीय सेना की सबसे सम्मानित रेजीमेंटों में गिनी जाती है। गढ़वाल राइफल्स ने देश के लगभग हर बड़े यु( में अपनी वीरता का परिचय दिया है। प्रथम विश्व यु( से लेकर कारगिल यु( तक इस रेजीमेंट के जवानों ने असाधारण साहस दिखाया। 1962 के भारत-चीन यु( 1965 और 1971 के भारत-पाक यु(ों में गढ़वाल राइफल्स के सैनिकों ने दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए। कारगिल यु( में भी गढ़वाल के वीर जवानों ने दुर्गम चोटियों पर लड़ते हुए देश की रक्षा की।गढ़वाल के सैनिकों की सबसे बड़ी विशेषता यह मानी जाती है कि वह कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और साहस नहीं खोते। ऊंचे पहाड़ों और कठिन जीवन ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाया है। गढ़वाल के कई गांव ऐसे हैं जहां लगभग हर घर से कोई न कोई सेना में रहा है। यहां बच्चों का बचपन से ही सपना होता है फौजी बनना। गांवों में सेना से लौटे पूर्व सैनिक युवाओं के प्रेरणास्रोत होते हैं। आज भी जब कोई जवान छुट्टी में गांव लौटता है तो उसका सम्मान किसी नायक की तरह किया जाता है। सेना की वर्दी यहां सिर्फ कपड़ा नहीं, बल्कि गर्व और सम्मान का प्रतीक मानी जाती है।गढ़वाल के पर्वतीय क्षेत्रों में सीमित रोजगार के बीच सेना लंबे समय तक युवाओं के लिए सबसे सम्मानजनक और स्थिर विकल्प रही है। लेकिन इससे भी बड़ी बात यह है कि यहां सेना में जाना राष्ट्रभक्ति और परंपरा से जुड़ा भावनात्मक विषय है। गढ़वाल ने देश को कई वीर सैनिक और शहीद दिए हैं। कई वीरों ने अपने बलिदान से भारतीय सैन्य इतिहास में अमिट छाप छोड़ी। कारगिल यु( में भी गढ़वाल के कई जवानों ने सर्वाेच्च बलिदान दिया। उनके नाम गांवों के स्मारकों और लोगों के दिलों में आज भी जीवित हैं।गढ़वाल की सैनिक परंपरा केवल पुरुषों तक सीमित नहीं रही। यहां की महिलाओं ने भी त्याग और साहस की मिसाल पेश की है। सैनिकों की पत्नियां और माताएं कठिन परिस्थितियों में परिवार संभालते हुए अपने बेटों और पतियों को देशसेवा के लिए प्रेरित करती रही हैं। कई बार महीनों तक दुर्गम गांवों में अकेले रहकर उन्होंने परिवार और खेती दोनों की जिम्मेदारी निभाई। गढ़वाल की सैनिक परंपरा के पीछे महिलाओं का यह मौन त्याग भी उतना ही महत्वपूर्ण है।समय के साथ परिस्थितियां बदली हैं। अब युवाओं के सामने रोजगार के कई नए विकल्प हैं। सेना भर्ती प्रक्रिया में बदलाव और अग्निवीर योजना जैसे विषयों पर पहाड़ में चर्चा और चिंता भी देखने को मिलती है। इसके बावजूद गढ़वाल में सेना के प्रति सम्मान और आकर्षण आज भी बना हुआ है। यहां के युवाओं में देशसेवा की भावना अब भी उतनी ही मजबूत दिखाई देती है।गढ़वाल की वीर सैनिक परंपरा केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि आज भी जीवित संस्कृति है। यहां की लोकगाथाओं, गीतों और कहानियों में सैनिकों का गौरव गूंजता है। जब देश की सीमाओं पर कोई गढ़वाली जवान खड़ा होता है, तब उसके साथ केवल एक सैनिक नहीं, बल्कि पूरे पहाड़ का साहस खड़ा होता है। यही कारण है कि गढ़वाल की धरती को वीरता, बलिदान और राष्ट्रभक्ति की अमर भूमि कहा जाता है।
May 28, 2026भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे से पहले भाजपा नेताओं की जुगलबंदी दिखी मुख्यमंत्री आवास से निकली तस्वीरों ने बदल गई है उत्तराखंड में सियासी हवा लंबे समय बाद त्रिवेंद्र रावत पहुंचे सीएम हाउस, अनिल बलूनी संग बनी रणनीति उत्तराखंड भाजपा ने विधानसभा चुनाव से पहले चली एकजुटता की बड़ी चाल देहरादून। सियासत में तस्वीरें सिर्फ यादों के लिए नहीं, बल्कि बड़े संदेशों के लिए खींची जाती हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के तीन दिवसीय उत्तराखंड प्रवास से ठीक पहले मुख्यमंत्री आवास से निकली तस्वीरों ने उत्तराखंड की राजनीति में एक नई इबारत लिख दी है। लंबे समय से सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बनी दूरियों पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक डिनर डिप्लोमेसी के जरिए पूर्णविराम लगा दिया है। सूत्र बताते हैं कि सीएम आवास का माहौल सामान्य से अलग था। काफी लंबे अर्से बाद पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत मुख्यमंत्री आवास पहुंचे जहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद गर्मजोशी से उनकी अगवानी की। इसके साथ ही गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने भी सीएम से वार्ता कर कई विषयों पर चर्चा की।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परंपरा और शिष्टाचार का निर्वहन करते हुए पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत का शाल ओढ़ाकर गर्मजोशी से स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने उन्हें पौधा भी भेंट किया जो संगठन के भीतर नई ऊर्जा और विकास के अंकुर फूटने का प्रतीक माना जा रहा है। इस दौरान दोनों नेताओं के चेहरे की मुस्कान ने विपक्षी खेमे में चल रही अंदरूनी कलह की चर्चाओं पर विराम लगाने का काम किया है। डिनर के साथ ही मुख्यमंत्री आवास पर एक उच्च स्तरीय संगठनात्मक बैठक भी हुई। इस बैठक की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री के अलावा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और प्रदेश संगठन महामंत्री अजेय कुमार भी मौजूद रहे।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि त्रिवेंद्र सिंह रावत का सीएम आवास पर इस तरह सक्रिय दिखना भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह अपने हर बड़े चेहरे को एक साथ मंच पर लाना चाहती है। जब पार्टी के दो दिग्गज और निर्णायक चेहरे वर्तमान और पूर्व सीएम एक साथ डिनर टेबल पर बैठकर राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे की रणनीति तैयार कर रहे हों तो यह सीधे तौर पर कार्यकर्ताओं के लिए अनुशासन और एकजुटता की लक्ष्मण रेखा है।सूत्रों के अनुसार डिनर के साथ चली लंबी गुफ्तगू में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के आगामी तीन दिवसीय दौरे के एक-एक बिंदु पर बारीकी से चर्चा की गई। संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल कैसे रहे, इस पर वरिष्ठ नेताओं ने अपने अनुभव साझा किए। पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत और धामी की साथ-साथ डिनर करती तस्वीर ने विपक्ष के उन दावों को हवा में उड़ा दिया है, जिनमें भाजपा के भीतर गुटबाजी की बात कही जा रही थी। आज से शुरू हो रहे राष्ट्रीय अध्यक्ष के प्रवास के दौरान होने वाली अहम बैठकों का एजेंडा भी इस डिनर टेबल पर फाइनल किया गया। इसके साथ ही गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने कुछ दिन पूर्व भाजपा से नाराज चल रहे अरविंद पांडे के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की और उसके बाद देहरादून में सीएम धामी से मुलाकात कर कई विषयों पर चर्चा की।राजनीतिक पंडितों का मानना है कि नितिन नबीन के दौरे से ठीक पहले भाजपा ने अपने अंतर्विरोधों पर मरहम लगा लिया है। त्रिवेंद्र सिंह रावत जैसे दिग्गज नेता का सीएम आवास पहुंचना और मुख्यमंत्री का उन्हें ससम्मान शाल ओढ़ाकर स्वागत करना यह दर्शाता है कि पार्टी के भीतर अब सब कुछ दुरुस्त है। नितिन नबीन के दौरे से पहले भाजपा ने अपने आंतरिक मोर्चों को पूरी तरह सुरक्षित कर लिया है। मुख्यमंत्री धामी की डिनर डिप्लोमेसी ने न केवल वरिष्ठों का सम्मान सुनिश्चित किया है, बल्कि संगठन के उन कील-कांटों को भी निकाल फेंका है जो भविष्य की राह में बाधा बन सकते थे। अब भाजपा पूरी ताकत और एकजुटता के साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्वागत करने और 2027 की बिसात बिछाने के लिए तैयार खड़ी है।
May 28, 2026देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में काउंसिल ऑन एनर्जी, इन्वायरमेन्ट एण्ड वॉटर द्वारा तैयार की गई ‘सौर जागरूकता स्मारिका पुस्तिका’ का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल केवल एक स्मारिका पुस्तिका का विमोचन नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड के उज्ज्वल, आत्मनिर्भर एवं हरित भविष्य के निर्माण की दिशा में सामूहिक संकल्प का प्रतीक है।मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा संकट एवं पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में सौर ऊर्जा केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में संचालित पीएम सूर्य घर योजना के अंतर्गत उत्तराखण्ड ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं, जो देश के लिए प्रेरणास्रोत बन रही हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने 40 हजार रूफटॉप सोलर संयंत्रों का अपना प्रारंभिक लक्ष्य निर्धारित समय से पूर्व प्राप्त कर लिया है तथा निर्धारित संयंत्रों के लक्ष्य का लगभग 95 प्रतिशत कार्य पूर्ण किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि पीएम सूर्य घर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्तराखण्ड आज देश में शीर्ष राज्यों की श्रेणी में पहुँच चुका है।मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2024 से अब तक मात्र दो वर्षों में राज्य ने सौर ऊर्जा क्षमता में लगभग 10 गुना वृद्धि दर्ज की है। उत्तराखण्ड लगभग 290 मेगावाट क्षमता के रेजिडेंशियल रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित करने में सफल हुआ है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड के निर्माण की दिशा में यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।मुख्यमंत्री ने यूपीसीएल, ऊरेडा, क्षेत्रीय अधिकारियों तथा इस अभियान से जुड़े सभी विभागों एवं संस्थाओं के समन्वित प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह सफलता टीम उत्तराखण्ड की सामूहिक प्रतिबद्धता और समर्पण का परिणाम है।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा आयोजित सौर कौथिग व्यापक जन-जागरूकता अभियान, नुक्कड़ नाटक एवं अधिकारियों के विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों ने प्रदेश में सौर ऊर्जा के प्रति जागरूकता का वातावरण तैयार किया है। उन्होंने CEEW की टीम के सहयोग एवं उल्लेखनीय योगदान की भी सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल सोलर संयंत्र स्थापित करना नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक को स्वच्छ ऊर्जा क्रांति का सक्रिय भागीदार बनाना है। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा के व्यापक उपयोग से आम नागरिकों के विद्युत व्यय में कमी आएगी, पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी तथा आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, सुरक्षित एवं हरित भविष्य प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में उत्तराखण्ड नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में देश के समक्ष एक प्रेरणादायक एवं आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित होगा।इस अवसर पर विधायक सुरेश गड़िया, प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव विनय शंकर पांडेय, CEEW के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. अरुणाभ घोष, पिटकुल के प्रबंध निदेशक डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट, यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक जी. एस बुदियाल एवं संबंधित विभागीय अधिकारी मौजूद थे।
May 28, 2026टिहरी। महादेव चटृी जनपद टिहरी गढ़वाल क्षेत्र में देर रात्रि एक ट्रक के गहरी खाई में गिरने की सूचना पर एसडीआरएफ ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घायल चालक का सफल रेस्क्यू किया है।जानकारी के अनुसार एसडीआरएफ पोस्ट ब्यासी को पुलिस चौकी बचेलीखाल, थाना देवप्रयाग जनपद टिहरी गढ़वाल से बीती रात सूचना मिली कि महादेव चटृी से आगे डंपिंग जोन के पास एक ट्रक दुर्घटनाग्रस्त होकर गहरी खाई में गिर गया है। सूचना मिलते ही उप निरीक्षक सावर सिंह नेगी के नेतृत्व में एसडीआरएफ टीम तत्काल आवश्यक रेस्क्यू उपकरणों के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हुई। मौके पर पहुंचने पर टीम ने पाया कि ट्रक राष्ट्रीय राजमार्ग से लगभग 120 से 125 मीटर नीचे गहरी खाई में गिरा हुआ था। दुर्घटना के समय वाहन में केवल चालक सवार था, जो गंभीर रूप से घायल अवस्था में खाई में फंसा हुआ था।रात्रि के अंधेरे एवं दुर्गम परिस्थितियों के बावजूद एसडीआरएफ टीम ने रोप रेस्क्यू तकनीक का उपयोग करते हुए घायल तक पहुंच बनाई। टीम द्वारा घायल को प्राथमिक उपचार देने के बाद स्ट्रेचर एवं रोप की सहायता से सुरक्षित मुख्य मार्ग तक पहुंचाया गया। इसके उपरांत घायल को जिला पुलिस के सुपुर्द कर एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल भिजवाया गया। घायल की पहचान अजय क्षेत्री पुत्र राम सिंह, निवासी छिद्दरवाला, देहरादून के रूप में हुई है।