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हिमस्खलन में दबे पर्वतारोहियों की तलाश जारी : पांच और शव बरामद, 22 अभी भी लापता

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अब तक 9 लोगों के मरने की पुष्टि
प्रशासन के रवैया से परिजनों में आक्रोश

उत्तरकाशी। द्रोपदी के डांडा 02 आरोहण अभियान के दौरान हिमस्खलन की चपेट में आए नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के लापता 27 पर्वतारोहियों में से 5 लोगों के शव तलाश लिए गए हैं जबकि चार के शव कल बरामद किए जा चुके थे। इस हादसे में अब तक मृतकों की संख्या 9 हो चुकी है जबकि अभी 20 से 22 लोग लापता हैं। जिनकी तलाश में निम व गुलबर्ग (कश्मीर) से आई टीम तथा एनडीआरएफ व एयर फोर्स के जवान लगे हुए हैं।
मंगलवार सुबह हुए इस हादसे को अब 3 दिन का समय बीत चुका है। निम द्वारा इस अभियान पर गए ट्रैकर्स की लापता सूची जारी कर दी गई है। जिनकी संख्या 27 बताई गई है जिसमें से 9 के शव बरामद कर लिए गए हैं तथा 22 लोगों का अभी भी कोई पता नहीं चल सका है। हादसे की सूचना पर हादसे के शिकार हुए ट्रैकर्स के परिजन भी उत्तरकाशी पहुंच गए हैं और उनमें सही जानकारी न दिए जाने को लेकर भारी आक्रोश है। जैसे जैसे समय बीत रहा है उनकी चिंताएं भी बढ़ती जा रही है अपनों को खोने का गम तो है ही साथ ही उनका कहना है कि उनके बच्चे कहां हैं किस हाल में है इसकी जानकारी न तो निम द्वारा दी जा रही है और न ही जिलाधिकारी द्वारा कुछ बताया जा रहा है। जबकि जिलाधिकारी अभिषेक रोहिला का कहना है कि उन्हें निम के द्वारा जो जानकारी दी जा रही है उसी आधार पर वह जानकारियां दे रहे हैं। खास बात यह है कि बीते कल जो 4 शव मिले थे उन्हें तो कल लाया ही नहीं जा सका और जो पांच शव मिले हैं उन्हें भी दोपहर 3 बजे तक बेस कैंप तक नहीं लाया जा सकाहै बीते कल 14 उन लोगों को रेस्क्यू कर लाया गया था जो जीवित अवस्था में मिले थे।
इस बड़े हादसे के बाद जहां स्थानीय प्रशासन के बीच तालमेल की कमी देखी गई है वहीं अब यह सवाल भी उठ रहे हैं कि जब खराब मौसम के बारे में पहले से ही अलर्ट जारी था तो ऐसी स्थिति में इस परीक्षण कार्यक्रम को रोका क्यों नहीं गया। सवाल यह भी है कि हिमस्खलन जैसी गतिविधियां भले ही एक प्राकृतिक क्रिया सही लेकिन इतनी बड़ी संख्या में हुई इन मौतों के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है?

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