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गुरुकुल विवि में रजिस्ट्रार संग मारपीट

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  • शिक्षा के मंदिर में हिंसा दुर्भाग्यपूर्णः बालियान

हरिद्वार। गुरूकुल कांगडी विश्वविघालय में राजिस्ट्रार के साथ मारपीट के मामले में छात्र प्रतिनिधि सोकेन्द्र बालियान ने गहरी चिन्ता व्यक्त की और इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
मिली जानकारी के अनुसार गुरुकुल कांगड़ी विश्वविघालय में कर्मचारियों द्वारा रजिस्ट्रार के साथ कथित मारपीट की घटना पर सामाजिक कार्यकर्ता एवं विश्वविघालय के दर्शनशास्त्र के विघार्थी व छात्र प्रतिनिधि सोकेन्द्र बालियान ने गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के मंदिर में हिंसा की घटना अत्यंत दुखद और चिंताजनक है। विश्वविघालय में लगातार सामने आ रहे विवाद, अशांति और अव्यवस्था के मामले संस्थान की श्ौक्षणिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। सोकेन्द्र बालियान ने कहा कि शिक्षा के केंद्र में संवाद, अनुशासन, सहिष्णुता और वैचारिक असहमति का सम्मान होना चाहिए। किसी भी विवाद का समाधान मारपीट से नहीं, बल्कि संवैधानिक, लोकतांत्रिक और संस्थागत प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गुरुकुल कांगड़ी विश्वविघालय केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि देश की गौरवशाली श्ौक्षणिक एवं सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। इसकी प्रतिष्ठा और गरिमा बनाए रखना प्रशासन, कर्मचारियों, शिक्षकों और विघार्थियों सहित पूरे गुरुकुल परिवार की सामूहिक जिम्मेदारी है। बालियान ने विश्वविघालय की मौजूदा परिस्थितियों पर चिंता जताते हुए कहा कि विघार्थी, स्थायी एवं अस्थायी कर्मचारी और शिक्षक विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे हैं। कर्मचारियों की लंबित मांगें, शिक्षकों एवं फैकल्टी का विश्वविघालय छोड़ना, निलंबन की घटनाएं और लगातार बढ़ते विवाद चिंता का विषय हैं। इन परिस्थितियों का असर विघार्थियों के भविष्य और श्ौक्षणिक माहौल पर पड़ सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी परिस्थितियां क्यों बन रही हैं कि विवाद संवाद और समाधान के बजाय मारपीट तक पहुंच रहे हैं? पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष समीक्षा कर कारणों का पता लगाने और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की जरूरत है। सोकेन्द्र बालियान ने रजिस्ट्रार के साथ हुई कथित मारपीट की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराने, घायल व्यक्ति को उचित चिकित्सा सुविधा और सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा प्रशासन एवं कर्मचारी संगठनों के बीच तत्काल सकारात्मक संवाद शुरू करने की मांग की। साथ ही स्थायी एवं अस्थायी कर्मचारियों की लंबित समस्याओं का न्यायसंगत समाधान करने और शिक्षकों, फैकल्टी के विश्वविघालय छोड़ने, निलंबन तथा अन्य विवादों की पारदर्शी समीक्षा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविघालय में श्ौक्षणिक वातावरण, अनुशासन और सामान्य व्यवस्था बहाल करने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाई जानी चाहिए। उद्देश्य किसी व्यक्ति, संगठन या प्रशासन का विरोध करना नहीं, बल्कि गुरुकुल की गरिमा, शिक्षा की गुणवत्ता, कर्मचारियों के सम्मान और विघार्थियों के भविष्य को सुरक्षित करना है। बालियान ने कहा कि आज की घटना पर शब्द भी मानो निःशब्द हैं। आखिर कब सुधरेंगे गुरुकुल के हालात, कब थमेगा अव्यवस्था और विवादों का दौर और कब लौटेगा गुरुकुल का खोया हुआ गौरव? गुरुकुल बचेगा, तभी उसका गौरवशाली इतिहास बचेगा।

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