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सवालः कैसे पटरी पर आएगी चार धाम व्यवस्था?

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  • तमाम नियम कानून के बाद भी नतीजा ढाक के तीन पात
  • धामों में अभी भी पहुंच रही है भारी भीड़
  • कब तक रहेंगे रजिस्ट्रेशन बंद, यात्री बेहाल

देहरादून। चार धाम की व्यवस्थाओं को कैसे दुरुस्त किया जाए यह सवाल शासन—प्रशासन के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। यात्रा में उमड़ने वाली भीड़ को संभाल पाना असंभव होता जा रहा है। सरकार नई एसओपी के साथ व्यवस्था सुधारने में जुटी जरूर है लेकिन न यात्रियों की संख्या में कमी आ रही है न उनकी परेशानियां कम होती दिख रही हैं।
ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन बंद किये जा चुके हैं तथा किसी भी यात्री को बिना रजिस्ट्रेशन व हेल्थ चेककप के यात्रा पर नहीं जाने दिया जा रहा है। करीब 8 बजे के बाद गंगोत्री व यमुनोत्री जाने तथा 11 बजे के बाद सभी धामों की यात्रा पर रोक व रील बनाने पर पाबंदी तथा मोबाइल पर रोक के साथ वीआईपी दर्शनों पर रोक के बाद भी हालत जस के तस बने हुए हैं। न तो यात्रा मार्ग पर जाम से मुक्ति मिल पा रही है न यात्रा मार्गों पर फैली गंदगी को साफ किया जा पा रहा है। अभी हालात इस कदर खराब है कि कल 30 हजार श्रद्धालुओं के केदारनाथ व 28 हजार के बद्रीनाथ एवं गंगोत्री यमुनोत्री धामों में 10 व 12 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने की बात कही जा रही है।
सीएम धामी का कहना है कि ऑफलाइन रजिस्टे्रशन पर अभी 31 मई तक रोक लगाई गई है लेकिन हालात नहीं सुधरते हैं तो यह रोक जारी रहेगी। क्योंकि धामों में वहन क्षमता से अधिक यात्री पहुंचने के कारण ही व्यवस्थाएं बिगड़ी है। वही रजिस्ट्रेशन पर रोक की सही समय पर जानकारी न दिये जाने से हरिद्वार ऋषिकेश में यात्रियों का पहुंचना जारी है, कोई चार दिन से तो कोई आठ दिन से यहां रुका हुआ है फिर भी रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका है। कल एक टूर ऑपरेटर ने जो 50 यात्रियों के साथ 10 दिन पहले यहां आया था लेकिन रजिस्ट्रेशन नहीं होने के कारण आगे नहीं जा पा रहा है, आत्मदाह का प्रयास किया गया। जिस पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है, मगर उसका कहना है कि वह 50 लोगों के रहने खाने की व्यवस्था कब तक कर सकता है अन्य तमाम राज्यों से आए यात्रियों का भी यही कहना है कि वह यात्रा करने आए थे यहां डेरा डालने नहीं आये थे कि खाए और सोते रहे?
मुख्यमंत्री धामी का कहना है कि हर साल 10—10 लाख यात्री संख्या बढ़ रही है तथा चार धाम यात्रा हमारे पहाड़ की लाइफ लाइन है इसके लिए एक नई अथॉरिटी बनाई जाएगी लेकिन यह सब जब होगा तब होगा फिलहाल की समस्या का क्या समाधान है सवाल यह है। यात्रा मार्गों पर कूड़े कचरे के ढेर लगा चुके हैं। पेयजल और शौचालय की व्यवस्थाएं डांवा—डोल हो चुकी है। यात्री अव्यवस्थाओं से परेशान है। इन अव्यवस्थाओं के लिए वह शासन प्रशासन को कोस रहे हैं। राज्य की छवि धूमिल हो रही है लेकिन बदहाल व्यवस्थाओं को दुरस्त करना संभव नहीं दिख रहा है। ऐसे में आगे यात्रा कैसे सुचारू चलेगी समझ से परे हो गया है।

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