- वोट के अधिकार का हनन संभव
- हाई कोर्ट से चुनाव टालने की अपील
- पी.आई.एल. पर सुनवाई मंगलवार को
देहरादून/नैनीताल। राज्य में 24 व 28 जुलाई को होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों पर मानसूनी आपदा का ग्रहण लग सकता है। हाईकोर्ट में दायर की गई एक जनहित याचिका में जुलाई माह में कराये जा रहे इन चुनावाें में मानसूनी आपदा के कारण मतदाताओं के वोट के संवैधानिक अधिकार से वंचित हो जाने की संभावना के मद्देनजर चुनावों पर रोक लगाने की मांग की गई है। जिसे सुनवाई के लिए स्वीकृत करते हुए आगामी मंगलवार 8 जुलाई की तारीख तय की गई है।
याचिकाकर्ता देहरादून निवासी डा. बैजनाथ ने अपनी याचिका में कहा है कि मानसून काल में जहां एक तरफ राज्य के सभी उन 12 जिलों में यातायात बाधित होने के कारण एक स्थान से दूसरे स्थान तक आवागमन सुचारू व संभव नहीं रहता है जिसके कारण मतदाताओं को अपने वोट के संवैधानिक अधिकार से वंचित होना पड़ सकता है वहीं राज्य में 11 जुलाई से शुरू होने वाली कावड़ यात्रा के कारण पूरे प्रदेश में यातायात रूट को डाइवर्ट कर दिया गया है और आम आदमी के लिए कुछ मार्गों को पूरी तरह बंद कर दिया जाता है ऐसे में लोगों के सामने मतदान में दिक्कतें आ सकती है और वह वोट डालने से वंचित हो सकते हैं। उनका कहना है कि मतदान की तारीख के दिन राज्य के कुछ हिस्सों में इतनी अधिक बारिश भी हो सकती है कि मतदाता घरों से निकल भी न पाए।
उन्होंने साफ किया है कि कावड़ यात्रा सिर्फ हरिद्वार जिले तक सीमित नहीं होती है जहां पंचायत चुनाव नहीं हो रहे हैं। गंगोत्री तक देश व प्रदेश के कांवड़ियों का आवागमन रहता है। उनका कहना है कि पुलिस प्रशासन इस यात्रा के दौरान व्यवस्थाओं में व्यस्त रहता है जिसके कारण भी पंचायत चुनावों की व्यवस्थाएं प्रभावित हो सकती है।
हाईकोर्ट द्वारा एक बार चुनाव पर रोक लगाने और फिर रोक हटाये जाने चुनाव अधिसूचना रद्द होने और दोबारा अधिसूचना जारी होने के बाद राज्य में होने वाले पंचायत चुनावों की इस कवायद के बीच भले ही नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी हो लेकिन मतदाता अगर अपने वोट के अधिकार का प्रयोग किसी भी कारण से करने में वंचित होते हैं तो ऐसे चुनाव का कोई औचित्य नहीं रह जाता। डा. बैजनाथ की अपील पर कोर्ट द्वारा 8 जुलाई को सुनवाई की जाएगी। कोर्ट इस पर क्या फैसला लेता है अब इस पर ही निर्भर होगा कि चुनाव तय कार्यक्रम के अनुसार होंगे या नहीं।




