पहलगाम में 26 निर्दाेष सैलानियों की हत्या का बदला लेने के लिए सरकार द्वारा 15 दिन के चिंतन—मंथन और तमाम तरह की तैयारियों के बाद जब ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया गया था तब पीएम मोदी से लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तक तमाम नेताओं ने बहुत सारे ऐसे दावे किए थे जो देश की आक्रोशित जनता के जख्मों पर मरहम लगाते दिख रहे थे। जब भारतीय सेनाओं ने अपने पहले ही अटैक में पाकिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्रों में नौ स्थानों पर मिसाइल हमले किए गए तो आतंकियों को भारी जान—माल का नुकसान हुआ और पाकिस्तान की सरकार भी सन्न रह गई क्योंकि उसे इतने बड़े प्रहार की उम्मीद शायद नहीं थी। पाकिस्तान को इस पर पलटवार करना ही था लेकिन भारत की वायु रक्षा प्रणाली एस 400 ने उसके सभी हमले नाकाम कर दिए जिसके जवाब में एक बार फिर भारत ने पाक सैन्य ठिकानों और एयरवेज पर धावा बोलकर पाक के हौसलों को करारी शिकस्त दी गई। लेकिन अचानक हुए सीज फायर की घोषणा से सारी स्थितियां कुछ ही पल में पलट गई। जिस अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप की मध्यस्तता के कारण यह सब हुआ उन्होंने दो परमाणु शक्तियों के बीच टकराव को टालने की बात कहकर यह समझाने की कोशिशें की गई कि इससे बहुत सारी जिन्दगियंा जाने का खतरा था। निश्चित ही युद्ध के विनाश से कोई इनकार नहीं कर सकता है लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सीज फायर पर सहमति किसी संभावी विनाश का डर दिखाकर की गई? युद्ध रुक गया है और अब शांति है लेकिन पाकिस्तान हुक्मरान और मीडिया द्वारा जिस तरह से इसे अपनी जीत बताया जा रहा है और पाक में जश्न मनाया जा रहा है तथा यह कहा जा रहा है कि भविष्य में अगर भारत ऐसी कोई हिमाकत करता है तो उसे ऐसा ही करारा जवाब दिया जाएगा। कम से कम भारत के लोगों को तो हैरान करने वाला है ही। खास बात यह है कि इधर भारत के द्वारा इस सीज फायर के बाद भाजपा सरकार जश्न की तैयारियों में जुटी है तथा सेना के इस पराक्रम को सरकार अपनी कामयाबी के तौर पर प्रचारित करने व मीडिया का एक हिस्सा भाजपा के प्रवक्ता के तौर पर जुट गए हैं। इस हालात पर किसी को राज कपूर और सायरा बानो की फिल्म दीवाना का वह गीत याद आ सकता है। ‘तुम्हारी भी जय जय हमारी भी जय—जय न तुम हारे न हम हारे। सवाल यह है कि क्या इस युद्ध में किसी की हार नहीं हुई? या यूं कहिए कि किसी की भी जीत नहीं हुई है तो यह जीत का जश्न इधर भी और उधर भी मनाया जा रहा है यह क्या है? महज आवाम को भ्रमित करने के लिए किए जाने वाला एक ढकोसला है। बहस इस बात पर हो रही है कि पहले सीज फायर की गुहार किसने लगाई? इससे भी आगे चलिए तो देखेंगे पहले किसने क्या कहा और क्यों कहा होश गुम करने वाली इस बहस में अपना सर चकरघन्नी हो जाएगा। बिना शर्त और बिना लिखित पढ़त के ही सीज फायर हो गया इसका सभी को शुक्र मनाना चाहिए यह क्या कम है अगर शर्तें होती और लिखित पढ़त होती तो यह सीज फायर हो ही नहीं पसता और अगर हो भी जाता तो फिर कब यह सीज फायर खत्म हो जाता इसका भी क्या भरोसा किया जा सकता था। अच्छा है कि अब यहां भी शांति है और वहां भी शांति है एक ऐसी शांति जिसका कोई मोल नहीं होता।




