राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का कथन था कि नशा आदमी के बुद्धि और विवेक को खा जाता है और एक विवेकहीन व्यक्ति समाज के लिए कितना बड़ा अभिशाप हो सकता है इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। वर्तमान समय में देश के युवा जितनी तेजी से नशे की गिरफ्त में फंसते जा रहे है और बढ़ती नशा वृत्ति के कारण देश के समाज में कितनी मनोविकृति तथा अपराध बढ़ रहे हैं वह न सिर्फ चिंतनीय है अपितु हैरान करने वाले हैं। उत्तराखंड की पुलिस द्वारा अब तक चोरी, लूट और चेन स्नेचिंग जैसे आपराधिक मामलों में अनेक युवाओं जिनमें छात्र भी शामिल रहे हैं गिरफ्तार किया जाता रहा है। अभी बीते दिनों रूद्रपुर स्टेशन के पास नैनी दून जनशताब्दी ट्रेन को पलटाने की साजिश का मामला सामने आया था पुलिस ने इसका अनावरण करते हुए जो चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं वह अत्यंत ही गंभीर हैं। जिन दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है उनका कबूल नामा है कि वह अपनी नशे की लत को पूरा करने के लिए चोरी करते थे। टेलीकॉम का जो पोल रेल की पटरी पर मिला है वह उसे चोरी करके ले जा रहे थे कि सामने ट्रेन आती देख उसे पटरी पर छोड़कर भाग गए। नशा बुद्धि का किस तरह से नाश कर देता है यह इसकी मिसाल है। अगर उनके इस विवेकहीन कृत्य से रेल दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है तो कितना जान माल का नुकसान हुआ होता, सोच पाना भी संभव नहीं है। नशे के कारण जो मानसिक विकृतियां युवाओं के अंदर पनप रही है उन्हें नकारा नहीं जा सकता है। बीते कुछ साल पहले ऋषिकेश में एक विधवा महिला ने अपने बेटे को मौत के घाट इसलिए उतार दिया था कि वह नशेड़ी बेटा अपनी मां के साथ ही बलात्कार जैसी निंदनीय घटना को अंजाम दे रहा था। नशे में अपनी बेटियों के साथ छेड़छाड़ और दुष्कर्म का प्रयास करने के न जाने कितने मामले अब तक खबरों में रह चुके हैं। इसमें कोई संदेह जैसी कोई बात नहीं है। खुद मनोचिकित्सक भी इस बात को मानते हैं कि नशे का आदी हो चुका एक व्यक्ति किसी बड़ी से बड़ी और अनैतिक घटना को अंजाम दे सकता है। जिसकी एक स्वस्थ व्यक्ति कल्पना भी नहीं कर सकता है दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि आज बाजार में न जाने कितने तरह के नशे के सामान उपलब्ध हैं। सरकार भले ही शराब बेचती है लेकिन नशा तस्कर न जाने क्या—क्या बेच रहे हैं। हर राज्य में हजारों करोड़ों का अवैध नशे का कारोबार हो रहा है। युवा पीढ़ी का भविष्य चौपट हो रहा है परिवार उजड़ रहे हैं और समाज नशा जनित समस्याओं के कारण तमाम तरह की मुश्किलें झेल रहा है लेकिन इसे सख्ती से रोकने के लिए कोई भी ठोस प्रयास नहीं किया जा रहे हैं। देश का हर राज्य और केंद्र की सरकार अगर दृढ़ता के साथ यह फैसला कर ले कि वह अपने राज्यों की सीमाओं में नशे को नहीं घुसने देगा तो बहुत कुछ हद तक इस बड़ी समस्या से निपटा जा सकता है। वर्तमान में जिस तरह से नशा मुक्ति अभियान और जन जागरूकता अभियान तथा नशा मुक्ति केंद्र चलाए जा रहे हैं उनसे कुछ नहीं होने वाला है। नशा तस्करी रोकने वाले कानून को और अधिक सख्त किए जाने की जरूरत तो है ही साथ ही पुलिस प्रशासन को भी और अधिक मुस्तैदी से इसे रोकने के लिए काम करना होगा।




