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धर्म रक्षा की राजनीति से सतर्क रहे

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धर्म की रक्षा की जिम्मेदारी भले ही धर्माचार्यो और धर्म गुरुओं की सही लेकिन बदलते परिवेश में अब राजनीतिक दलों ने धर्म रक्षा का ठेका ले लिया है। लेकिन यह धर्म के ठेकेदार भावी पीढ़ी को किस तरह दिशा भ्रमित कर उनका जीवन बर्बाद कर रहे हैं इसका उदाहरण हरियाणा के चरखी दादरी की घटना से ज्यादा बेहतर और क्या हो सकता है। घटनाक्रम के अनुसार 27 अगस्त को पुलिस को झुग्गी—झोपड़ी में कुछ बवाल होने की सूचना मिली। मौके पर पुलिस पहुंची तो देखा कि साबिर नाम के एक युवक की हत्या कर दी गई है पुलिस की छानबीन में पता चला कि कुछ युवक आए थे जो गौं मांस खाने और पकाने का आरोप लगा रहे थे। पुलिस ने हत्या के आरोप में 10 युवकों को गिरफ्तार किया जा चुका है तथा इनमें से एक नाबालिक भी है छह आरोपी अभी फरार है पुलिस जल्द इन्हें गिरफ्तार करने का दावा कर रही है। साबिर के पेट से पोस्टमार्टम में जो मांस मिला था उसे जांच के लिए भेजा गया था जिसकी जांच रिपोर्ट अभी—अभी आई है जिसमें इस बात की पुष्टि हुई है कि वह गौ मांस नहीं था। सवाल यह है कि सिर्फ शक आधार पर इस तरह किसी की हत्या किया जाना किस तरह की धर्म रक्षा है? एक अन्य सवाल यह है कि धर्म की रक्षा का यह अधिकार इन युवाओं को किसने दिया है? अगर जांच में यह भी साबित हो जाता है कि साबिर ने गौ मांस ही खाया था तब भी क्या इन युवाओं द्वारा की गई हत्या अपराध के दायरे से बाहर मानी जा सकती है कानून की नजर में तो वह हत्या के आरोपी है ही और अगर वह दोषी साबित हो जाते हैं तो इन युवाओं का भविष्य और जीवन बर्बाद करने के लिए कौन जिम्मेदार होगा। बीते दिनों इस तरह की अनेक घटनाएं प्रकाश में आ चुकी है रेप के आरोपी अब्दुल की फैक्ट्री व घर पर बुलडोजर चलवा दिया गया व डीएनए जांच में पता चला की लड़की के साथ रेप करने वाला आरोपी फैक्ट्री में काम करने वाला लड़का था जिससे डीएनए मैच हुआ। इन दिनों पिथौरागढ़ में एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें भगवाधारी कुछ युवक किसी मस्जिद के सामने खड़े होकर पूछ रहे हैं कि यह किसकी मस्जिद है? यहां मस्जिद बनाने की परमिशन आपको किसने दी? यह देवभूमि है यहां सिर्फ मंदिर बनाये जा सकते हैं मस्जिद नहीं। उत्तरकाशी में इन दिनों मस्जिद को हटाने को लेकर जो बवाल चल रहा है वह भी हमारे सामने है लेकिन धर्म रक्षा यात्राओं व धर्म रक्षा के नाम पर जिस तरह के बीज बोय जा रहे हैं इसकी फसल हमारी वर्तमान और भावी पीढ़ी को ही काटनी पड़ेगी। अपने राजनीतिक हित साधने वाले जो लोग इन किशोर तथा युवा बच्चों को दिशा भ्रमित कर रहे हैं उन्हें खुद पता नहीं है कि वह अपने ही बच्चों का भविष्य खराब कर रहे हैं। नफरत और हिंसा का जो बीजारोपण बच्चों के मन में बोया जा रहा है उससे समाज को कुछ हासिल होने वाला नहीं है। इन बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले तथा पढ़ लिखकर वह अपना और अपने परिवार का भविष्य संवारे ज्यादा अच्छा होगा न कि धर्म रक्षक बनाकर जेल की सलाखों के पीछे रहकर अपना और अपने परिवार की बर्बादी का कारण बने। जो राजनीति कर रहे हैं उन्हें राजनीति करने दे। वर्तमान दौर में हर परिवार और हर एक युवा को धर्म रक्षा की इस राजनीति से सतर्क रहने की जरूरत है।

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