May 8, 2026ऊमी: अन्न, आस्था और प्रकृति का पर्व नए गेहूँ का पहला दाना पहले देवता के नाम, फिर हमारे लिए बनता है प्रसाद ‘ऊमी’ निकालने की परंपरा सिर्फ अन्न का भोग नहीं, बल्कि यह है एक सोच प्रकृति के प्रति सम्मान, जीवन के प्रति आभार और समाज के प्रति जुड़ाव देहरादून। उत्तराखंड के पहाड़ों में एक परंपरा है, जो आज भी पहाड़ के गांवों में निभाई जाती है। फाल्गुन की विदाई और चैत्र के आगमन के साथ ही जब खेतों में गेहूँ की बालियाँ सुनहरी आभा बिखेरने लगती हैं, तो ग्रामीण भारत की फिजाओं में एक खास तरह की सोंधी खुशबू घुल जाती है। यह खुशबू है ‘ऊमी’ की होती है।पहाड़ में गेहॅू की कच्ची-पक्की बालियों को धीमी आंच पर भूनकर जब इन्हें हाथों से रगड़कर दाने निकाले जाते हैं, तो वह ‘ऊमी’ कहलाती है। पहाड़ के गांवों में नए अन्न का पहला दाना घर का कोई सदस्य तब तक नहीं चखता, जब तक इसे कुल देवता, क्षेत्रपाल या ग्राम देवता को अर्पित न कर दिया जाए। मान्यता है कि क्षेत्रपाल देवता ने कड़कती धूप और ठंड में फसल की रक्षा की है, इसलिए पहला हक उन्हीं का है।उत्तराखंड के पहाड़ी जीवन में हर परंपरा के पीछे प्रकृति, आस्था और जीवन दर्शन का अद्भुत मेल दिखाई देता है। इस परंपरा के पीछे गहरी मान्यता है कि अन्न केवल मानव श्रम का परिणाम नहीं, बल्कि प्रकृति और दैवीय कृपा का संयुक्त वरदान है। इसलिए इसे सीधे उपभोग करने से पहले उस शक्ति को समर्पित करना आवश्यक माना जाता है, जिसने इसे संभव बनाया।आज के दौर में तेजी से बदलती जीवनशैली और शहरीकरण के कारण ऐसी परंपराएं धीरे-धीरे कम होती जा रही हैं। खेतों से जुड़ाव कम हो रहा है और बाजार आधारित जीवन शैली बढ़ रही है। इसके बावजूद कई गांवों में आज भी ऊमी को उत्साह के साथ बनाकर उत्सव के रूप में मनाते हैं। आज जब दुनिया पर्यावरण संरक्षण की बात कर रही है, तब पहाड़ की यह परंपरा हमें सिखाती है कि प्रकृति के साथ संतुलन और सम्मान ही सच्ची समृ(ि का मार्ग है। बाक्सगांवों के ऑगन में ऊमी की खुशबूअग्नि में तपे इन दानों को जब गुड़ या शक्कर के साथ मिलाकर भगवान को भोग लगाया जाता है, तो वह ऊमी एक दिव्य प्रसाद में बदल जाती है। गाँव की चौपालों और आंगन में जब घर-घर से ऊमी की खुशबू आती है, तो मानों पूरी प्रकृति उत्सव मना रही होती है। बड़े-बुजुर्ग बताते हैं कि यह प्रसाद परिवार में सुख-शांति और अन्न के भंडार भरे रहने का प्रतीक है। आयुर्वेद के अनुसार )तु परिवर्तन के समय नया अनाज सीधे खाना भारी हो सकता है, लेकिन अग्नि में भूनने से यह सुपाच्य और हल्का हो जाता है। यह पाचन तंत्र को मजबूत करता है और शरीर को नई ऊर्जा प्रदान करता है।
May 8, 2026जेलों में बंद कैदियों में पिछले वर्ष की अपेक्षा आयी कमी कारागार मुख्यालय द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूचना से हुआ खुलासा देहरादून। उत्तराखंड जैसे शान्त माने जाने वाले राज्य में भी उत्तराखंड की आधे से अधिक जेलों में उसकी क्षमता से दुगने तक कैदी बंद है जबकि कुल कैदियों की संख्या पिछले वर्ष की 5521 से 765 की कमी होकर 4812 हो गयी है। यह खुलासा सूचना अधिकार के अन्तर्गत कारागार मुख्यालय द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूचना से हुआ है।काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन ने महानिरीक्षक कारागार (कारागार मुख्यालय) उत्तराखंड से उत्तराखंड राज्य की जेलो में बंदियों की क्षमता तथा वर्तमान में बंद कैदियों की संख्या के सम्बन्ध में सूचना मांगी थी। इसके उत्तर में मुख्यालय कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवा विभाग उत्तराखंड के लोक सूचना अधिकारी ने अपने पत्रांक 442 दिनांक 23 फरवरी 2026 से जेलों की क्षमता तथा बंदियों का विवरण उपलब्ध कराया है। इससे पूर्व 7 फरवरी 2025 की सूचना में 2025 में कैदियों की संख्य उपलब्ध करायी गयी है।उपलब्ध सूचना के अनुसार क्षमता से सबसे अधिक लगभग दुगने 141 कैदी 71 क्षमता वाली जिला कारागार नैनीताल में बंद हैं जबकि दूसरे स्थान पर क्षमता के 185 प्रतिशत 189 कैदी 102 क्षमता वाली जिला कारागार अल्मोड़ा में बंद हैं। तीसरे स्थान पर 157 प्रतिशत कैदी 911 कैदी 580 क्षमता वाली देहरादून जेल में बंद हैं। चौथे स्थान पर क्षमता के 152 प्रतिशत 1025 कैदी 675 क्षमता वाली उपकारागार हल्द्वानी जेल में बंद हैं। पांचवें स्थान पर क्षमता के 140 प्रतिशत 772 कैदी 552 क्षमता वाली केन्द्रीय कारागार सितारगंज जेल में बंद हैं। छठे स्थान पर क्षमता के 122 प्रतिशत 298 कैदी 244 क्षमता वाली उपकारागार रूड़की में बंद है।उपलब्ध सूचना के अनुसार क्षमता से सबसे कम 19 प्रतिशत 56 कैदी 300 क्षमता वाली सम्पूर्णनन्द शिविर (खुली जेल) सितारगंज में बंद हैं जबकि दूसरे स्थान पर क्षमता के 64 प्रतिशत 109 कैदी 169 क्षमता वाली जिला कारागार चमोली में बंद हैं। तीसरे स्थान पर क्षमता के 72 प्रतिशत 108 कैदी 150 क्षमता वाली जिला कारागार पौड़ी में बंद हैं। चौथे स्थान पर क्षमता के 98 प्रतिशत 78 कैदी 80 क्षमता वाली जिला कारागार पिथौरागढ़ में बंद हैं जबकि जिला कारागार टिहरी में क्षमता के अनुरूप 150 कैदी ही बंद है।नदीम को 7 फरवरी 2025 को उपलब्ध सूचना के अनुसार 2025 में क्षमता से सर्वाधिक अधिक 185 प्रतिशत कैदी 102 क्षमता वाली जिला कारागार अल्मोड़ा में 291 कैदी थे। दूसरे स्थान पर क्षमता के 201 प्रतिशत कैदी 71 क्षमता वाली जिला कारागार नैनीताल में 143 कैदी बंद थे। तीसरे स्थान पर क्षमता के 193 प्रतिशत कैदी 580 क्षमता वाली जिला कारागार देहरादून में 1122 कैदी बंद थे। चौथे स्थान पर क्षमता के 187 प्रतिशत कैदी 635 क्षमता वाली उपकारागार हल्द्वानी में 1188 कैदी बंद थे। पांचवें स्थान पर क्षमता के 156 प्रतिशत कैदी 552 क्षमता वाली केन्द्रीय कारागार सितारगंज में 860 कैदी बंद थे। छठे स्थान पर क्षमता के 132 प्रतिशत कैदी 150 क्षमता वाली जिला कारागार टिहरी में 198 कैदी बंद थे। सातवें स्थान पर क्षमता के 131 प्रतिशत कैदी 244 क्षमता वाली रूड़की उपकारागार में 319 कैदी बंद थे। आठवें स्थान पर क्षमता के 126 प्रतिशत कैदी 888 क्षमता वाली जिला कारागार हरिद्वार में 1120 कैदी बंद थे। नवें स्थान पर क्षमता के 107 प्रतिशत कैदी 150 क्षमता वाली जिला पौड़ी में 160 कैदी बंद थे। उपलब्ध सूचना के अनुसार प्रदेश में केवल दो जेले ही ऐसी थी जिसमें निर्धारित स्वीकृत क्षमता से कम कैदी बंद थे। इसमें एक विशेष जेल सम्पूर्णानन्द शिविर (खुली जेल) इसकी क्षमता 300 कैदियों की थी जबकि इसकी क्षमता के मात्र 15 प्रतिशत 45 कैदी ही इसमें बंद थे। इसके अतिरिक्त सामान्य जेलों में स्वीकृत क्षमता से कम कैदियों वाली एकमात्र जेल जिला कारागार चमोली है। इसमें उसकी क्षमता 169 की अपेक्षा 71 प्रतिशत 120 कैदी ही बंद थे।
May 8, 2026देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्री केदारनाथ धाम में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन अस्पताल का लोकार्पण किया।आज यहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्री केदारनाथ धाम में भारत पेट्रोलियम कॉर्पाेरेशन लिमिटेड हॉस्पिटल का विधिवत लोकार्पण किया। यह अस्पताल स्वामी विवेकानन्द हेल्थ मिशन सोसाइटी द्वारा संचालित किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार श्री केदारनाथ धाम में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर एवं त्वरित स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले इस उच्च हिमालयी क्षेत्र में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से युक्त अस्पताल का संचालन स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती प्रदान करेगा। यह अस्पताल यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के साथ—साथ स्थानीय नागरिकों के लिए भी अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन द्वारा श्री केदारनाथ धाम यात्रा को सुरक्षित, सुगम एवं व्यवस्थित बनाए रखने हेतु स्वास्थ्य सेवाओं को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। यात्रा मार्ग पर चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ, स्वास्थ्य जांच केंद्रों, ऑक्सीजन सुविधाओं एवं आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार स्वस्थ उत्तराखंड समृद्ध उत्तराखंड के सपने को साकार करने के लिए प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार एवं सुधारीकरण की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा आयुष्मान योजना के अंतर्गत अब तक लगभग 61 लाख आयुष्मान कार्ड जारी किए गए हैं जिसके माध्यम से आज प्रदेश के अंदर लाखों मरीजों को निशुल्क उपचार मिल रहा है इसके साथ ही राज्य के प्रत्येक जनपद में एक मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दिशा में भी कार्य कर रहे हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बाबा केदार के दर्शन एवं पूजा—अर्चना कर प्रदेश की सुख—समृद्धि और जनकल्याण की कामना भी की। उन्होंने कहा कि श्री केदारनाथ धाम केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि सेवा एवं मानवता का भी प्रतीक है और इसी भावना के साथ सरकार देवभूमि में स्वास्थ्य एवं जनसुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में कार्य कर रही है। कार्यक्रम में उपस्थित विधायक केदारनाथ श्रीमती आशा नौटियाल ने कहा कि यह अस्पताल सेवा, समर्पण एवं जनकल्याण का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो भविष्य में लाखों श्रद्धालुओं एवं स्थानीय लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस अवसर पर भारत पेट्रोलियम कॉर्पाेरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक संजय खन्ना, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह—सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल, अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश सोनी, विश्व हिंदू परिषद के संरक्षक दिनेश चंद्र, बद्री केदार मंदिर समिति अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, बद्री केदार उपाध्यक्ष विजय कप्रवान, श्री केदार सभा के अध्यक्ष पं. राजकुमार तिवारी, ब्लॉक प्रमुख ऊखीमठ पंकज शुक्ला, जिला पंचायत सदस्य अमित मेंखडी, महा मंत्री अकिंत सेमवाल, संजय तिवारी, जिला पंचायत सदस्य सुबोध बगवाड़ी, केशव बहुगुणा, जिलाधिकारी विशाल मिश्रा, पुलिस अधीक्षक निहारिक तोमर, उप जिलाधिकारी कृष्णा त्रिपाठी, कर्नल अजय कोटियाल सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
May 8, 2026प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके निकटतम सहयोगी अमित शाह जिन्हें अब देश के नेता राजनीति का चाणक्य कहते हैं, के नेतृत्व में भाजपा निरंतर चुनावी जीत दर जीत दर्ज करती हुई उस मुकाम तक पहुंच चुकी है जहां कभी कांग्रेस हुआ करती थी। कांग्रेस की उस बुलंदी का कारण था उसका राजनीतिक एकाधिकार जहां उसे चुनौती देने वाला कोई दूसरा बड़ा प्रतिद्वंद्वी था ही नहीं लेकिन वर्तमान की भाजपा ने यह उपलब्धि लंबे संघर्ष तथा तमाम छोटे बड़े दलों की चुनौतियों का सामना करते हुए की है जिसके लिए वह बधाई के पात्र हैं। लेकिन उसे उसकी राजनीतिक सफलताओं के लिए बधाई देने वाले भी इस बात को कहने से चूकते नहीं है कि उसने यह सफलता संवैधानिक व्यवस्थाओं और मान्यताओं तथा परंपराओं की बलि चढ़ा कर हासिल की है। यही कारण है कि विपक्षी दल और उनके नेताओं के लिए संविधान और लोकतंत्र बचाओ का मुद्दा 70 के दशक के आपातकाल जैसा ही अहम हो गया है। यह बात अलग है कि विपक्षी नेता अपने—अपने निजी स्वार्थो की प्रतिपूर्ति के चलते आपातकाल की तरह एकजुट नहीं हो सके हैं जिसका लाभ उठाते हुए भाजपा एक—एक कर क्षेत्रीय क्षत्रपों और राजनीतिक दलों को तहस—नहस करती चली जा रही है। पंजाब से अकाली दल महाराष्ट्र से शिवसेना, बिहार से जेडीयू तथा राजद यूपी से बसपा और दक्षिण भारत सहित देश के अन्य तमाम राज्यों से कितने दलों का अस्तित्व समाप्त हो चुका है। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी दलों ने जो इंडिया के नाम से एक संयुक्त मोर्चा बनाया था भले ही वह नीतीश कुमार और ममता बनर्जी जैसे नेताओं के अहम ने उसे सफल नहीं होने दिया हो लेकिन इसके बावजूद भी उसने 400 पार का नारा देने वाली भाजपा को 240 पर ही लाकर खड़ा कर दिया था मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और बिहार के सुशासन बाबू जो अब पूर्व सीएम हो चुके हैं उनका तथा उनके दलों का भविष्य क्या होगा यह तो आने वाला समय ही तय करेगा, हां उसे भाजपा को किए गए असाधारण सहयोग से मोदी की सरकार अपनी सफलता की नई कहानी लिखने में सफल जरूर रही है। आने वाले दिनों में पंजाब में चुनाव होना है जहां आप की सरकार है। इसके बाद उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के चुनाव हैं देखना होगा कि दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और बिहार के बाद पश्चिम बंगाल में विजय पताका फहराने वाली भाजपा अरविंद केजरीवाल और समाजवादी पार्टी को कितना नुकसान पहुंचाती है। जिस तरह तेजी से क्षेत्रीय क्षत्रपों का सफाया हो रहा है उतनी ही तेजी से भाजपा बुलंदियों की ओर अग्रसर है। विपक्ष के नेताओं को यह समझ ही नहीं आ रहा है कि यह हो क्या रहा है क्योंकि भाजपा ने उन्हें एसआईआर तथा स्टीन फाइल जैसे मुद्दों में या फिर नारी वंदन अधिनियम जैसे मुद्दों में उलझा रखा है। या फिर विपक्षी नेता सीबीआई और ईडी के फंदे से बचने की जोड़ जुगाड़ में ही लगे रहते हैं। इस सभी हालातो के बीच एक अहम सवाल यह है कि जिस लोकतंत्र में जनता ही जनार्दन होती है उसने भाजपा के वर्तमान चाल चरित्र और चेहरे को इस रूप में स्वीकार कर लिया है जैसी भाजपा और उसके नेता हैं? उसकी चुनावी जीत तो यही बताती है। अगर जनता को वह सब स्वीकार नहीं होता जो सत्ता में रहकर भाजपा के नेता या सरकारें कर रही हैं तो फिर उसे वह वोट क्यों देती? अगर यह सच नहीं है तो क्या वह सच है जिसमें ममता बनर्जी 100 सीटों की चोरी करने की बात कह रही है या फिर यह सच है कि देश से लोकतंत्र खत्म हो चुका है, आप भी इस पर मंथन कीजिए?
May 8, 2026देहरादून। इन्वेस्टमेन्ट के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले गैंग के एक सदस्य को एसटीएफ ने राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया है। करोड़ों रूपये की इस ठगी प्रकरण में इस गैंग के मास्टर माइंड सहित अब तक 5 शातिरों की गिरफ्तारी हो चुकी है।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि श्रीनगर, पौडी गढवाल के निवासी नागरिक द्वारा साइबर ठगी के सम्बन्ध में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून में शिकायत दर्ज करायी गयी थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि अक्टूबर से दिसम्बर 2025 के मध्य अज्ञात साइबर ठगों (कथित रजत वर्मा व मीना भटृ आदि) द्वारा उसे एक लिंक के माध्यम से एक व्हाट्सएप ग्रुप से जोडा गया था व प्रतिदिन 5 प्रतिशत से अधिक कमाने का झांसा देकर एक लिंक के माध्यम से रजिस्ट्रेशन करवाया गया और निवेश के नाम पर विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से रुपये जमा करवाकर कुल लगभग 1,31,76,000/— (एक करोड़ इकतीस लाख छिहत्तर हजार रुपये) की धोखाधड़ी की गयी। कुछ समय पश्चात शिकायतकर्ता को स्वंय के साथ साइबर ठगी होने का आभास हुआ, जिस पर शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत दर्ज करायी गयी। शिकायत के आधार पर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गयी। साईबर क्राईम पुलिस द्वारा घटना में प्रयुक्त बैंक खातों/ रजिस्टर्ड मोबाइल नम्बरों / व्हाट्सअप की जानकारी हेतु सम्बन्धित बैंकों, सर्विस प्रदाता कम्पनियों, मेटा कम्पनी से पत्राचार कर डेटा प्राप्त किया गया। प्राप्त डेटा के विश्लेषण एवं विवेचना के आधार पर उक्त अपराध में संलिप्त अपराधियों को चिन्ह्ति कर तलाश जारी की गयी, विवेचना के दौरान जानकारी में आया कि उक्त साईबर अपराध में संलिप्त गैंग के महाराष्ट्र निवासी 3 सदस्य केन्द्रीय कारागार पटियाला में किसी अन्य अपराध में निरुद्ध हैं, जिस पर त्वरित कार्यवाही करते हुये उक्त तीनों अपराधियों का वारण्ट बी प्राप्त कर देहरादून लाया गया व बीती 25 मार्च को इस मुकदमें में रिमाण्ड लेकर देहरादून जेल भेजा गया तथा संलिप्त एक अन्य अपराधी अरवाज सैफी को बीती 9 अप्रैल को गाजियाबाद से गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। साईबर टीम द्वारा जांच में और तेजी लाते हुये उक्त अपराध में संलिप्त एक अन्य आरोपी रिंकू पुत्र किशोरी लाल निवासी जिला झुंझुनूं राजस्थान को चिन्हित कर उसकी तलाश प्रारंभ की गयी और इसी क्रम में आरोपी रिंकू को झुंझुनू राजस्थान से गिरफ्तार किया गया जिसके कब्जे से घटना में प्रयुक्त मोबाईल फोन और सिम बरामद हुआ है। पीड़ित के साथ ठगी के रुपयों में से 2 लाख रूपये की धनराशि आरोपी रिंकू के बैंक खाते में बरामद हुई थी, जिसे उसके द्वारा तत्समय सेल्फ चेक के माध्यम से निकाला गया था। जांच से रिंकू के बैंक खाते के खिलाफ पूरे भारत वर्ष में कई शिकायतें दर्ज होना प्रकाश में आयी हैं जिनमें अब तक तेलंगाना, तमिलनाडू, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, हरियाणा आदि राज्यो में 16 शिकायतें प्रकाश में आयी हैं।
May 8, 2026चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति इस समय अपने सबसे नाटकीय मोड़ पर खड़ी है। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके ने चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर सबको चौंका दिया, लेकिन सत्ता की कुर्सी अब भी उनसे दूर दिखाई दे रही है। इसी बीच पार्टी की ओर से आया एक बड़ा अल्टीमेटम पूरे राज्य में राजनीतिक भूचाल पैदा कर चुका है-अगर डीएमके या एआईडीएमके सरकार बनाने की कोशिश करती हैं, तो टीवीके के सभी 108 विधायक इस्तीफा दे देंगे।टीवीके का दावा है कि जनता ने सबसे ज्यादा सीटें देकर उन्हें सबसे बड़ा जनादेश दिया है, इसलिए संवैधानिक परंपरा के अनुसार राज्यपाल को पहले सरकार बनाने का मौका उन्हें देना चाहिए। लेकिन राज्यपाल ने विजय को साफ कह दिया कि बिना 118 विधायकों के समर्थन पत्र के उन्हें शपथ की अनुमति नहीं दी जा सकती। यहीं से सियासी टकराव और तेज हो गया। टीवीके अब इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बता रही है और अदालत जाने की तैयारी में है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि पर्दे के पीछे डीएमके और एआईडीएमके मिलकर उन्हें सत्ता से दूर रखने की रणनीति बना रही हैं।तमिलनाडु की राजनीति में दशकों से एक-दूसरे की सबसे बड़ी दुश्मन रही डीएमके और एआईडीएमके के बीच संभावित समझौते की खबर ने सभी को हैरान कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, एक ऐसा फॉर्मूला चर्चा में है जिसमें एडप्पादी के. पलानीस्वामी मुख्यमंत्री बन सकते हैं और एमके स्टालिन की डीएमके बाहर से समर्थन दे सकती है।एआईडीएमके फिलहाल खुलकर कोई कदम नहीं उठा रही, लेकिन पार्टी ने अपने विधायकों को चेन्नई में रुकने और सतर्क रहने को कहा है। अंदरखाने यह चर्चा जरूर तेज है कि पार्टी टीवीके के साथ जाएगी या डीएमके के साथ कोई नई रणनीति बनाएगी। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने टीवीके से गठबंधन की संभावना को सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया है।