और कितने रामविलास?

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भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे आईएएस अफसर रामविलास यादव अपनी सेवानिवृत्ति से एक सप्ताह पहले जेल पहुंच गए। एक दिन पहले ही सरकार ने उन्हें निलंबित भी कर दिया था। रामविलास यादव के खिलाफ की गई कार्रवाई को सूबे की भाजपा सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा बता कर खुद ही अपनी पीठ थपथपाने में लगी है। रामविलास यादव के खिलाफ विजिलेंस को मुकदमा दर्ज करने की अनुमति देकर तथा उन्हें निलंबित कर सत्ता में बैठे लोगों को यह लग रहा है कि जैसे उन्होंने कोई बड़ी लड़ाई जीत ली है और राज्य से भ्रष्टाचार का समूल नाश कर डाला है। भ्रष्टाचार यूं तो ऐसी एक राष्ट्रीय समस्या है जिसका निदान असंभव है। लेकिन अगर बात उत्तराखंड की की जाए तो राज्य गठन से लेकर अब तक सैकड़ों बड़े भ्रष्टाचार के मामले खबरों की सुर्खियों में रह चुके हैं। सूबे के लोगों को भले ही अब उन भ्रष्टाचार घोटालों के नाम भी याद न रहे हो जिन्हें चुनावी मुद्दा बनाकर भाजपा और कांग्रेस के नेता एक दूसरे की बखिया उधेड़ा करते थे। पोलिंग बूथ तक जाने वाले रास्तों पर इन घोटालों की सूचियों के बैनर लगाए जाते थे। और यह बताने की कोशिशें की जाती थी कि हमारे शासनकाल में उनके शासनकाल की तुलना से बहुत कम घोटाले हुए। खास बात यह है कि नेताओं और पार्टियों के नाम लिखें या दर्ज घोटालों में अधिकारियों के नाम नहीं होते थे। लेकिन यह सर्व विदित है कि इन घोटालों को अंजाम देने में अफसरों और नेताओं का गठजोड़ अनिवार्य रूप से रहता था। नेता और अफसर राज्य को दोनों हाथों से लूट रहे है यह बात आम आदमी तक की जुबान पर रहती थी। रामविलास की गिरफ्तारी पर अगर काबीना मंत्री गणेश जोशी अगर यह कह रहे हैं कि राज्य में और भी रामविलास हैं तो इसमें कुछ गलत नहीं है। उनके इस बयान पर अगर कांग्रेसी नेता यह पूछ रहे हैं कि राज्य में उनकी 6 साल से सरकार है अगर वह अन्य रामविलासों को जानते हैं तो उन्हें छुपा क्यों रखा है उनके नाम भी उजागर करें और उन्हें भी जेल भेजे तो इसमें भी कांग्रेसी नेता क्या गलत कह रहे हैं। कांग्रेसी नेता यह भी कह रहे हैं कि जिन मंत्रियों के साथ अन्य रामविलास काम कर रहे हैं उन मंत्रियों की संपत्तियों की जांच कराई जाए। सवाल यह है कि भले ही भ्रष्टाचार के आरोपी रामविलास को तो भाजपा सरकार ने जेल भिजवा दिया क्या वह कुर्ता धारी नेताओं को भी जेल पहुंचाने की हिम्मत दिखाएंगे जिनके नाम बड़े—बड़े घोटालों से जुड़े रहे हैं? रामविलास तो भ्रष्टाचार के मामले में जेल जाने वाले राज्य के पहले अधिकारी बन चुके हैं। लेकिन भ्रष्टाचार में जेल जाने वाला पहला नेता या मंत्री कौन होगा? यह सबसे अहम सवाल है। अभी त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री रहते हुए कहा था कि अब राज्य में भ्रष्टाचार ही नहीं रहा तो लोकायुक्त की क्या जरूरत है लेकिन उनके पद से हटते ही कुंभ में कोरोना जांच घोटाला हो गया। उससे पहले एनएच—74 जमीन मुआवजा घोटाला हो गया जिसमें कई कुर्ताधारी व कई रामविलासोंंंंंंं के नाम चर्चा में रहे। लेकिन इसकी जांच का क्या हुआ कुछ पता नहीं। भले ही एक रामविलास जेल चले गए लेकिन भ्रष्टाचार जेल कब जाएगा? इसका पता नहीं है।

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