परीक्षा परिणाम के आगे

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बीते कल उत्तराखंड की 10वीं व 12वीं की बोर्ड परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया गया है। इस परीक्षा में दसवीं के 77.47 और 12वीं के 82.63 फीसदी बच्चों ने सफलता हासिल की। पासिंग परसेंट के लिहाज से इस परीक्षाफल को अच्छा माना जा सकता है। इस परीक्षाफल में कई ऐसी बातें हैं जो उल्लेखनीय है। हर साल की तरह इस साल भी बोर्ड परीक्षाओं में छात्रों के मुकाबले छात्राओं का बेहतर प्रदर्शन रहा है। जो शिक्षा के प्रति बेटियों की बढ़ती जागरूकता का प्रमाण है। भारत सरकार द्वारा बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ जैसे स्लोगन की देश को अब शायद कोई जरूरत नहीं रह गई है देश की माताओं—बहनों ने अब शिक्षा के महत्व को उस हद तक समझ लिया जितना जरूरी था। बेटियां पढ़ेगी तभी तो आगे बढ़ेंगी। यह खुशी की बात है कि अब पढ़ाई को लेकर बेटों की अपेक्षा बेटियां ज्यादा जागरूक हो चुकी हैं। इस परिणाम में हर साल की तरह इस बार भी जो वरीयता सूची बनाई गई है अगर उस पर गौर किया जाए तो यह पता चलता है कि टॉप टेन की रैंक हासिल करने वाले छात्र—छात्राओं ने 99 फीसदी से लेकर 95 फीसदी के बीच अंक हासिल किए हैं। जब इस विषय पर चर्चा होती है तो एक सवाल हमेशा ही जेहन में आता है कि कोई छात्र 500 में से भला कैसे 495 अंक प्राप्त कर सकता है। क्या कोई भी छात्र भले ही वह कितना भी कुशाग्र बुद्धि का हो और कितना भी मेहनती क्यों न हो और उसकी तैयारी भले ही किसी भी स्तर की रही हो, उसे चाहे सभी सवालों के जवाब क्यों न पता हों, लेकिन इन सवालों का जवाब लिखने में भी कोई गलती नहीं हो सकती है। कहा जाता है कि 100 प्रतिशत ठीक तो दुनिया में कोई भी चीज नहीं हो सकती है। फिर यह कौन सा चमत्कार है जो छात्र—छात्राओं को 99 और 98 फीसदी सही होने तक पहुंचा देता है। मेधावियों की सूची में जिन छात्र—छात्राओं ने अपने नाम दर्ज कराए हैं वह बधाई के पात्र हैं। लेकिन साम, दाम, दंड, भेद से हासिल की गई उपलब्धि का कहीं कोई उपयोग नहीं होता है। दरअसल हमारे देश की व्यवस्थाओं में इतने छेद है कि वह कई अयोग्य लोगों को भी बड़े—बड़े सम्मान दिला देते हैं। बिहार के पूर्व सीएम लालू यादव की पुत्री ने बिना मैट्रिक की पढ़ाई किए ही एमबीबीएस कर लिया था। कुछ वर्ष पूर्व बिहार के टॉपर्स का एक रियल्टी टेस्ट किया गया था पता चला कि जो वरीयता सूची में टॉपर रहे वह परीक्षा तक देने नहीं गए थे। पेपर लीक होने से लेकर नकल माफिया तक इस देश में इस कदर हावी रहे हैं कि उन्होंने देश की पूरी शिक्षा प्रणाली को ही चौपट करके रख दिया। है इस परीक्षा में सफल रहे सभी छात्र छात्राओं को बधाई और जो असफल रहे हैं उन्हें और अधिक बेहतर करने के संदेश।

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