सामाजिक सरोकारों से विरत होती राजनीति

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सामाजिक सुरक्षा और समस्याओं से शायद अब देश की राजनीति का कोई सरोकार नहीं रह गया है। मणिपुर में क्या हो रहा है? और उसे कैसे रोका जाए? इस मुद्दे पर चिंतन मंथन से ज्यादा जरूरी नेताओं के लिए वह हंगामा है जिसके कारण संसद की कार्यवाही एक सप्ताह से बाधित है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला का कहना है की इससे संसद जिसे लोकतंत्र का मंदिर कहा जाता है उसकी गरिमा समाप्त हो रही है उसके लिए वह भले ही विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों को जिम्मेदार बताते हैं लेकिन सत्ता पक्ष जो विपक्ष की बात सुनने को ही तैयार नहीं है संसद के शांतिपूर्ण संचालन की जिम्मेवारी उसी की है। यह कोई पहला मर्तबा नहीं है जब संसद में इस तरह का व्यवधान सामने आया है वर्तमान लोकसभा का पूरा कार्यकाल इसका गवाह है। भले ही उस मोबाइल वीडियो बनाने वाले और उसे वायरल करने वाले का जिसने मणिपुर की उस शर्मनाक स्थिति को सबके सामने लाया जिसने प्रधानमंत्री मोदी को इसे शर्मनाक और अत्यंत ही निंदनीय बताने के लिए विवश कर दिया अन्यथा इस जघन्य अपराध और सामाजिक सुरक्षा के सवाल पर वैसे ही पर्दा डाल दिया गया होता जैसे अन्य तमाम घटनाओं पर आज से पहले डाला जाता रहा है। अब जरा अन्य जन समस्याओं पर बात करें तो आज वर्तमान दौर में महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और गरीबी यह चार समस्याएं सबसे बड़ी समस्याएं हैं। लेकिन यह विडंबना देखिए कि आज देश के नेताओं द्वारा इनमें से किसी भी मुद्दे पर एक बार भी कोई चर्चा नहीं की जाती है। देश की 80 फीसदी जनसंख्या इन चार समस्याओं से इस कदर परेशान है कि उसका जीवन नर्क बन चुका है। फिर भी देश के नेताओं की नजर में ऑल इज वेल है। सत्ता पक्ष के लोग जो कभी विपक्ष में थे वह इन मुद्दों को लेकर हंगामा खड़ा किया करते थे आज वह इन मुद्दों पर एक शब्द भी बोलने को तैयार नहीं है। पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस ही नहीं फल, सब्जी, दूध और अन्य आम उपभोग की वस्तुओं में 20 से 25 फीसदी तक वृद्धि ने आम आदमी के जीवन को दुश्वारियां से भर दिया है। बेरोजगारी ने तमाम रिकॉर्ड तोड़ दिए। भ्रष्टाचार के बारे में खुद पीएम मोदी का यह कहना है कि यह देश की एक बड़ी समस्या है लेकिन उनकी सरकार ने बीते 9 सालों में क्या किया इसका कोई जवाब किसी के पास नहीं है। देश में गरीबी की रेखा से नीचे जीने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है कोरोना काल के दौरान देश के 30 करोड़ गरीब जो गरीबी की रेखा से ऊपर आने वाले थे फिर गरीबी के अंधेरे कुए में फंस चुके हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीसरे टर्म में देश को विश्व की तीन बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शुमार कराने का दावा कर रहे हैं। भाजपा देश में शहीदों के सम्मान में मेरी माटी मेरा देश अभियान चलाने जा रही है। इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता कि शहीदों का सम्मान हो लेकिन वोट की राजनीति के लिए किए जाने वाले इस सम्मान के बारे में यह भी सत्य है की राष्ट्रीय सम्मान का यह मुद्दा इसलिए उठाया जा रहा हैं क्योंकि विपक्ष से इनके विरोध का कोई खतरा नहीं है। जनता की समस्या और जन सरोकारों से दूर होती इस दौर की राजनीति का भविष्य क्या होगा यह आने वाला समय ही बताएगा?

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