Home News Posts उत्तराखंड यात्रा शुरू होने से पहले ही खुली सरकारी दावों की कलई

यात्रा शुरू होने से पहले ही खुली सरकारी दावों की कलई

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पंजीकरण के लिए हजारों यात्री परेशान

  • रात के 2 बजे से लाइनों में लगे फिर भी निराश
  • क्या ऐसे ही होगी सुगम व सुरक्षित यात्रा

हरिद्वार/ऋषिकेश। उत्तराखंड शासन—प्रशासन द्वारा भले ही अपनी ट्टअतिथि देवो भव, की सभ्यता और चार धाम यात्रियों को सुगम और सुरक्षित यात्रा के दावों का कितना भी ढोल पीटा जाता हो, लेकिन इस यात्रा की तैयारियां कितनी चुस्त दुरस्त हैं और पर्यटन विभाग तथा सरकारी दावों का सच क्या है अगर इसे जानना है तो सत्ता पक्ष में बैठे लोगों को ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए हरिद्वार व ऋषिकेश में बनाए गए पंजीकरण केंद्रों पर जाकर यात्रियों की उस दुर्दशा को जरुर देखना चाहिए जहां हजारों की संख्या में यात्री रात 2 बजे से लाइनों में खड़े होकर भी अपना पंजीकरण नहीं करा पा रहे हैं।
हरिद्वार और ऋषिकेश के इन पंजीकरण केंद्रों में देश के कौन—कौन से राज्यो से आए यह श्रद्धालु किस तरह से सूबे के शासन—प्रशासन को कोस रहे हैं और खरी—खरी सुना रहे हैं तथा सत्ता और प्रशासन में बैठे लोगों को इन केंद्रों से वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड किये जा रहे हैं जो भी इन वीडियो को देख लेगा क्या वह चारधाम यात्रा पर आने का साहस जुटा पाएगा। यही नहीं इससे राज्य की छवि के बारे में कैसा संदेश देश और दुनिया में जाएगा? इस पर सूबे के शासन—प्रशासन को गौर करने की जरूरत है। इन वीडियो में यात्री उत्तराखंड सरकार को सीधे—सीधे ललकारते हुए चुनौती दे रहे हैं कि वह हमारे राज्य में आकर देखें उन्हें पता चल जाएगा कि पर्यटकों के लिए व्यवस्थाएं क्या होती हैं और कैसे होती हैं।
उत्तराखंड शासन—प्रशासन में बैठे लोग इसे लेकर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं कि ऑनलाइन 21 लाख रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं और आज से जो ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन हरिद्वार व ऋषिकेश से शुरू किए गए हैं उसमें एक दिन में एक धाम के लिए अधिकतम 1000 यात्रियों के रजिस्ट्रेशन ही किये जा सकते हैं लेकिन यात्रियों की संख्या अधिक होने और अव्यवस्थाओं के कारण दूसरे राज्यों से आये लोग इस कदर परेशान है कि वह 2 बजे रात से लाइनों में खड़े हैं तथा उन्हें कागजी खानापूर्ति के नाम पर लाइन से बाहर निकाला जा रहा है। जो अत्यंत ही खेद जनक है इस अव्यवस्था को देखकर यह यात्री इस कदर परेशान है कि कुछ लोग तो बिना यात्रा किए ही वापस लौट जाने का मन बनाते दिखे।
सवाल यह है कि क्या सरकार ऐसे ही यात्रा को सुगम सुरक्षित बनाएगी अभी तो यात्रा शुरू भी नहीं हुई है अगर अभी से हाल ऐसा है तो आगे क्या होगा। शासन—प्रशासन और पर्यटन विभाग अगर इस यात्रा में राज्य के आर्थिक हित तलाशती है तो उसे इन यात्रियों के दुख दर्द को भी समझने की जरूरत है उन्हें राम भरोसे नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

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