भाजपा का चुनावी एजेंडा

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प्रदेश भाजपा के नेताओं ने आगामी लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी का एजेंडा तय कर दिया है मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस वक्त फुल एक्शन मोड में है। अपने दिल्ली दौरे के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से लेकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तक तमाम बड़े नेताओं से मिलकर एक—एक मुद्दे पर बड़े विस्तार से चर्चा की है। जिससे हर एक मुद्दे पर स्थिति पूरी तरह से साफ रहे कि किस मुद्दे पर किस तरह से आगे बढ़ा जाएगा। अभी बीते दिनों राज्य में लैंड जिहाद और लव जिहाद जैसे मामलों की जो बाढ़ देखी गई थी भले ही अब उसका प्रवाह थम गया हो लेकिन इसके जरिए भाजपा ने जनता को जो संदेश देना था वह संदेश वह दे चुकी है। मुख्यमंत्री धामी द्वारा इन दोनों मुद्दों पर की गई कार्यवाही की जानकारी पार्टी के तमाम नेताओं को दी गई। वही मंत्रिमंडल विस्तार और कार्यकर्ताओं को दायित्वों के बटवारा भी जल्द करने पर विचार किया गया है। जिस यूसीसी कानून को लागू करने की घोषणा विधानसभा चुनाव से पूर्व की गई थी उसका ड्राफ्ट मिलने से पहले ही भाजपा ने अपने पक्ष में माहौल तैयार कर लिया है। निश्चित तौर पर आगामी लोकसभा चुनाव से पूर्व राज्य में तो यूसीसी लागू होना तय है ही इसके साथ—साथ इसे कानूनी जामा राष्ट्रीय स्तर पर पहनाने की तैयारी भी मोदी सरकार द्वारा की जा रही है। जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने, अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण, तीन तलाक को समाप्त करने और यूसीसी कानून लाने जैसी उपलब्धियों को ही चर्चाओं के केंद्र में रखा जाना तय है। वही वोटों के ध्रुवीकरण से जुड़े और हार्ड हिंदुत्व की मूल धारणा को मजबूती देने वाले लैंड जिहाद और लव जिहाद के मुद्दों को भी धार देने का काम इस चुनाव में किया जाएगा। भाजपा विपक्षी दलों को कमजोर करने की अपनी पुरानी रणनीति पर भी मजबूती से काम करेगी। 2024 के चुनाव से पूर्व उत्तराखंड ही नहीं अन्य सभी राज्यों में विपक्षी एकता को तहस—नहस करने के लिए विपक्षी दलों के प्रभावी नेताओं का भाजपा में दिल खोलकर स्वागत करने की तैयारियां कर ली गई है जिसकी शुरुआत हम महाराष्ट्र में एनसीपी के विभाजन से देख रहे हैं। अभी उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भटृ द्वारा जो बयान दिया गया था कि कांग्रेस के कई नेता उनके संपर्क में हैं जो भाजपा में आना चाहते हैं उनका यह बयान बेवजह नहीं था। भले ही कांग्रेस के नेता इसका पुरजोर तरीके से खंडन कर रहे हो लेकिन इस सच्चाई को वह भी जानते हैं कि कांग्रेस के कुछ बड़े नेता अपनी उपेक्षा को लेकर लंबे समय से आहत है और यदि पार्टी के शीर्ष नेताओं का उनके प्रति वैसा ही रवैया रहता है तो वह कभी भी कांग्रेस को टा—टा बाय—बाय कह सकते हैं। 2016 में एक दर्जन भर बड़े नेताओं के भाजपा में जाने के बाद भी कांग्रेस के कई नेता पार्टी छोड़ कर जा चुके हैं। भले ही यशपाल आर्य और डॉ हरक सिंह जैसे नेताओं की कांग्रेस में वापसी हो गई हो लेकिन कांग्रेसी नेता आज तक इन्हें खुले मन से स्वीकार नहीं कर पाए हैं जो कांग्रेस की एक बड़ी कमजोरी है। दरअसल प्रदेश कांग्रेस की इस स्थिति के लिए खुद कांग्रेसी जिम्मेदार है लेकिन भाजपा के लिए उनकी यह रणनीति न सिर्फ पूर्व समय में कारगर सिद्ध हुई थी अपितु भविष्य में भी लाभकारी रहती दिख रही है। सभी प्रदेशों के हालात भले ही थोड़े थोड़े अलग हो लेकिन भाजपा ने जो 2024 के लिए अपना चुनावी एजेंडा तय किया है और वह जिस आक्रामक अंदाज में उस पर आगे बढ़ रही है विपक्ष उसके मुकाबले में कहां टिकता है यह भविष्य ही बताएगा।

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