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सत्ता मजबूत, विपक्ष मजबूर

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इन दिनों जहां देश की अर्थव्यवस्था की डावांडोल स्थिति और उसका आम आदमी की जिंदगी पर पहला प्रभाव और दूसरी तरफ राजनीतिक स्तर पर मची भारी उथल—पुथल के बीच आज 2 साल बाद ब्लॉक इंडिया की बड़ी बैठक हुई वही इस बैठक से एन पूर्व रात के अंधेरे में दिल्ली की सड़कों पर लगे कुछ पोस्टर और होडिग्ंस जिनमें राहुल गांधी को एक नाकारा और मूर्ख नेता साबित करने का प्रयास किया गया है और इस सबसे भी महत्वपूर्ण एक अन्य तीसरी घटना जिसे ऑपरेशन लोटस कहा जा सकता है जिसके जरिए टीएमसी के बीस सांसदों के पार्टी छोड़ने और एनडीए सरकार को समर्थन देने की बात सामने आई है, ने एक बार फिर अब यह साबित कर दिया है कि भाजपा की कुटिल नीतियों से जीत पाना या उसका मुकाबला करने का सामर्थ्य अब किसी दल और मोर्चे में नहीं बचा है। पश्चिम बंगाल में अप्रत्याशित हार के बाद टीएमसी के 58 विधायकों को भाजपा पहले ही तोड़ चुकी है आज रही सही कमी इन बीस सांसदों ने पूरी कर दी जिन्होंने अपने हस्ताक्षरों का पत्र लिखकर लोकसभा अध्यक्ष से अलग व्यवस्था करने की बात कही है। निश्चित तौर पर पश्चिम बंगाल का चुनाव हारने के बाद इन 20 सांसदों का टीएमसी का साथ छोड़ने का मतलब ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के लिए राजनीतिक अवसान से कम नहीं है। भाजपा को भले ही पश्चिम बंगाल जीतने में और ममता बनर्जी का राजनीतिक अस्तित्व समाप्त करने में कितना भी अधिक समय लगा हो लेकिन अब वह अपने मकसद में सफल हो चुकी है। चड्ढा के साथ गए आप के सांसदों और 20 टीएमसी के सांसदों के साथ आने पर अब भाजपा राज्य में पूर्ण बहुमत हासिल कर चुकी है वहीं लोकसभा भी अब उसे नायडू और नीतीश पर निर्भरता को लगभग समाप्त कर दिया है। विपरीत परिस्थितियों के बीच भी वह पहले से अधिक मजबूत हो गई है। अब बात करते हैं उन पोस्टरों की जो ब्लॉक इंडिया की बैठक से पूर्व दिल्ली की सड़कों पर लगाए गएा इन सभी पोस्टरों में राहुल गांधी की फोटो समान रूप से लगी है इसके साथ ब्लॉक इंडिया के सहयोगी दलों के नेताओं जिसमें शरद पवार, ममता बनर्जी और केजरीवाल तथा अन्य कई के फोटो के साथ राहुल के बारे में पूर्व समय में दिए गए बयानों के सहारे राहुल गांधी को एक नासमझ और नाकारा तथा आरोग्य कहा गया है उनका हवाला देकर नीचे सभी पोस्टरों में लिखा गया है यह आपस में लड़ने वाले क्या देश संभालेंगे? बड़ी साफ बात है कि भाजपा की केंद्र सरकार के निशाने पर सिर्फ राहुल गांधी ही हैं अन्य कोई भी नेता नहीं है। क्योंकि वह अकेले भाजपा से लोहा भी ले रहे हैं और सरकार उनका कुछ भी बिगाड़ तो पा ही नहीं रही है। बल्कि उनका खौफ ही इन पोस्टरों के पीछे से झलकता नजर आता है। रही बात ब्लॉक इंडिया की बैठक की तो 2 साल बाद हुई यह बैठक इंडिया की मजबूरी है। वह चाहे ममता बनर्जी हो या शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे या फिर तेजस्वी यादव इस बैठक में शामिल हुए तमाम वह नेता जो कांग्रेस के नेतृत्व को गवारा नहीं करते थे अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। भाजपा इन्हें इतना कमजोर कर चुकी है कि उनका अहंकार चूर—चूर हो चुका है वह अब समझ चुके हैं कि सिर्फ कांग्रेस व राहुल गांधी ही है जो उनकी मदद कर सकते हैं अब उन सभी 25 दलों के नेताओं को कांग्रेस के नेतृत्व कबूल हो। इस बैठक में जो पांच फैसले लिए गए हैं उनमें कुछ खास ऐसा नहीं है जो भविष्य की कोई बेहतर संभावना जताता हो। बस एकजुट होकर संसद व सांसद के बाहर जनहित के मुद्दों पर लड़ेंगे। कैसे लड़ेंगे और कितना लड़ पाएंगे? यह समय ही बताएगा। कॉकरोच को हिट कर चुकी भाजपा अब और अधिक मजबूत हो चुकी है तथा विपक्ष गठबंधन इंडिया मजबूरी में साथ खड़ा दिख रहा है।

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