जोशीमठ का संकट

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जोशीमठ एक ऐतिहासिक और जीवंत शहर भू धसाव के कारण खतरे की जद में है। जोशीमठ के अस्तित्व पर जो खतरा आया है वह एक दिन में नहीं आया, सालों पहले से इस खतरे की आहट मिलनी शुरू हो गई थी। विशेषज्ञों के अनुसार इस भू धसाव का कारण यहां हुआ अनियोजित निर्माण कार्य है। प्राकृतिक जल स्रोतों का मानवीय गतिविधियों के कारण प्रभावित होना बताया गया है। जोशीमठ के नीचे विष्णुप्रयाग में धौलीगंगा और अलकनंदा का संगम है। नदियों के कारण होने वाला भू कटाव और भूगर्भीय हलचलों को भी इस धसाव का कारण हो सकते हैं। मगर सवाल यह नहीं है कि इस संकट का कारण क्या है? अब सवाल यह है कि इस सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर वाले शहर की सुरक्षा कैसे की जाए। आज के ताजा हालात यह है कि नगर के सभी 9 वार्डो को भू धसाव ने अपनी जद में ले लिया है। घरों और व्यवसायिक भवनो के साथ साथ मठ और मंदिरों में भी दरारे आ गई है और यह दरारे लगातार चौड़ी होती जा रही हैं। इन दरारों का दायरा सिर्फ आवासीय क्षेत्रों तक सीमित नहीं है कृषि और बागवानी क्षेत्र की जमीनों से होकर बदरीनाथ हाईवे तक इसकी जद में आ चुका है। इतने बड़े क्षेत्र की इस भू धसाव की रोकथाम या ट्रीटमेंट किया जाना आसान काम नहीं है। स्थिति की भयावहता को इससे भी समझा जा सकता है कि अब तक सैकड़ों घर खाली हो चुके हैं लोग अपनी जान माल की सुरक्षा को लेकर सुरक्षित स्थानों पर शरण ले रहे हैं। बीते कल जेपी कंपनी द्वारा अपने कर्मचारियों के लिए बनाए गए 50 अस्थाई आवासों को भी खाली करा लिया गया है वहीं अब तक 77 घरों को प्रशासन द्वारा खाली करा लिया गया वहीं कई बड़े—बड़े होटलों को भी सील कर दिया गया है जोशीमठ से औली के बीच बना सबसे बड़ा रोपवे को भी फिलहाल बंद कर दिया गया है। शहर में जगह—जगह धरती फाड़ कर पानी निकल रहा है जिसकी गति लगातार बढ़ती जा रही है जो लोगों के घरों में घुस रहा है आज अगर जोशीमठ के लोग भयभीत है तो वह बेवजह नहीं है। आज मुख्यमंत्री धामी ने यहां स्थिति का जायजा लेने के लिए प्रतिनिधिमंडल को भेजा गया है। इस खतरे को लेकर अब शासन प्रशासन से लेकर वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों तक में हड़कंप मचा हुआ है। सवाल यह है कि जोशीमठ में जब नियम विरुद्ध बड़ी—बड़ी इमारतें और होटल बन रहे थे उस समय शासन—प्रशासन कहां सोया हुआ था? एक अन्य महत्वपूर्ण बात है चारधाम ऑल वेदर रोड जैसी बड़ी परियोजनाएं जिनके लिए लाखों पेड़ों का कटान व मलबा नदियों में निस्तारित किये जाने से लेकर पहाड़ों पर हुई अंधाधुंध कटाई इस तरह की समस्याओं के लिए क्या जिम्मेदार नहीं है? जिस विकास के लिए पहाड़ों पर अंधाधुधं अनियोजित निर्माण कार्य हो रहा है उसके संभावी नतीजों पर गौर किये जाने की जरूरत है जोशीमठ के जो लोग बेघर होने के कगार पर हैं सरकार को प्राथमिक आधार पर उनके पुनर्वास की व्यवस्था करनी चाहिए।

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