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कानून या क्रूरता

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  • पुलिस कार्रवाई पर उठे बड़े सवाल

देहरादून। दून पुलिस द्वारा छात्र—छात्राओं और स्थानीय लोगों पर जिस तरह हिंसक हमला किया गया जिसे अब पुलिस के आला अधिकारी हल्का लाठी चार्ज और दो पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर हल्का—फुल्का मामला बनाने की कोशिश की जा रही है। उसकी तस्वीर और वायरल वीडियो पुलिस की इस अमानवीय तथा बर्बरतापूर्ण कार्यवाही की कहानी खुद बता रही हैं इसके लिए किसी भी तरह के साक्ष्य की कोई जरूरत नहीं है।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम बात यह है कि प्रेम नगर क्षेत्र के जिस उत्तरांचल विश्वविघालय को प्रशासन द्वारा दी गई अनुमति को 15 दिन पहले खारिज कर दिया गया था उसकी सूचना छात्र—छात्राओं को देना प्रबंधको ने क्यों जरूरी नहीं समझा और अनुमति खारिज होने के बाद भी इस संगीत शो का आयोजन क्यों किया गया। क्या इसके लिए वह भीड़ जिम्मेदार थी जिस पर पुलिस द्वारा बेरहमी से लाठियां भाजी गई या फिर वह विश्वविघालय और उसका वह प्रबंधन जिन्होंने इसकी अवहेलना करते हुए इस कार्यक्रम का आयोजन कराया गया। क्या पुलिस प्रशासन द्वारा विश्वविघालय प्रबंधन के खिलाफ भी कोई कार्यवाही की जाएगी या फिर मासूम जनता पर लाठियां भांज कर और कुछ लोगों को अस्पताल पहुंचा कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली गई है।
इस घटना को लेकर अब लोगों में भारी आक्रोश है तथा इस पुलिसिया कार्रवाई के लिए सोशल मीडिया पर थू—थू किया जा रहा है। यह ठीक है कि इस कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ के कारण यातायात बाधित हुआ लेकिन इसके जिम्मेदार वह लोग नहीं है जो सिंगर दर्शन रावल को सुनने आए थे। महिलाओं की चीख पुकार और पुलिस कर्मियों के लाठियां बरसाने की तस्वीर बताती है कि यह अगर हल्का लाठीचार्ज है तो फिर बड़ी कार्रवाई तो सिर्फ गोलियां मारना ही हो सकता है। लोगों की आलोचना के बाद दो पुलिस कर्मियों को लाइन हाजिर क्यों किया गया अगर पुलिस की कोई गलती नहीं थी। अभी—अभी दो दिन पूर्व एक प्रॉपर्टी डीलर से लूट के मामले में एक बदमाश का एनकाउंटर कर वाहवाही लूटने वाली प्रेम नगर पुलिस ने इस कार्यवाही से अपनी सारी साख को धोकर रख दिया है।
चारों तरफ इसे लेकर पुलिस की निंदा हो रही है। राजधानी में आए दिन होने वाले मर्डर और अपराधों को रोक पाने में नाकाम पुलिस का आम लोगों पर उतारा गया यह गुस्सा किसी भी सूरत में ठीक नहीं कहा जा सकता है। देखना यह है कि अब प्रशासन विश्वविघालय प्रबंधन पर कोई कार्रवाई करने का साहस दिखा पता है या नहीं।

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