नौकरियां पाने वाले दोषी, देने वाले निर्दाेष

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पूर्व स्पीकर प्रेमचंद्र अग्रवाल काबीना मंत्री बने रहेंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनके इस्तीफे की मांग को लेकर पूर्व समय में जो कहा था कि जांच खत्म तो मामला खत्म, वह बात अब प्रेमचंद्र अग्रवाल भी कह रहे हैं। जो लोग अब तक यह उम्मीद लगाए बैठे थे कि भाजपा हाईकमान प्रेमचंद्र अग्रवाल पर सख्त कार्रवाई कर सकता है उन्हें अब तक यह पता चल चुका होगा कि विधानसभा में बैकडोर भर्ती मामले में जो कार्यवाही होनी थी वह हो चुकी है। अब यह मुद्दा कब्र में दफनाया जा चुका है। भले ही सवाल उठाने वाले सवाल उठाते रहे या नैतिकता के आधार पर उनके इस्तीफे की मांग करते रहे। दरअसल भाजपा नेताओं ने यह मान लिया है कि उनके द्वारा की गई सख्त कार्यवाही से उनके मंत्री और भाजपा की छवि पर जो दाग लगा था वह धुल चुका है। खास बात यह है कि भाजपा के दो पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत और तीरथ सिंह रावत लगातार इस बात को जोरदार तरीके से उठा रहे थे कि उनके खिलाफ भी कार्यवाही होनी चाहिए जिन्होंने गलत तरीके से नौकरियां दी। बात सिर्फ कांग्रेसी नेताओं के द्वारा किए जाने वाले विरोध का ही नहीं है कि हरीश रावत यह पूछ रहे हैं कि जिनको नौकरियां दी गई उनकी नौकरियां तो छीन ली गई क्या उन पर भी सरकार कोई कार्यवाही करेगी जिन्होंने गलत तरीके से नौकरियां दी। भाजपा सरकार और हाईकमान ने भले ही बड़ी खूबसूरती से इस मामले पर सख्त कार्रवाई की आड़ में लीपापोती कर दी हो लेकिन यह इंसाफ सही मायने में तब तक अधूरा इंसाफ ही है जब तक नौकरी देने वालों पर भी वैसी ही कार्यवाही नहीं की जाती है जैसी गलत तरीके से नौकरी लेने वालों पर की गई है। जिन पर कार्यवाही की गई सही मायने में वह उतने बड़े दोषी नहीं थे जितना बड़ा दोष नौकरी देने वालों का है। तुलसी बाबा ने शायद रामायण में ठीक ही लिखा है कि ट्टसमरथ को नहिं दोष गुसाईं, जो सामर्थ्य वान है वह दोषी भला कैसे हो सकता है दोषी तो हमेशा कमजोर को ही ठहराया जाता है। बात चाहे यूकेएसएसएससी पेपर लीक घोटाले की हो या फिर बैक डोर भर्तियों की जो विधानसभा में हुई कार्यवाही के नाम पर छोटी मछलियों को ही फसाए जाएगा बड़ी मछलियों को बचाने का यह भी एक तरीका ही है। मुद्दा कोई भी रहा हो हर राजनीतिक मुद्दा चन्द दिन ही गर्म रहता है। जैसे ही एक दो बड़ी दुर्घटनाएं नई सामने आ जाती है पुराने मुद्दों को दरकिनार कर दिया जाता है। ऐसा ही कुछ भर्ती घोटालों को लेकर भी हो रहा है। अंकिता हत्याकांड के बाद शासन और प्रशासन का फोकस अवैध रिजार्ट और होटलों पर आ गया है। जिनके ध्वस्तिकरण और सीलिंग की कार्रवाई इन दिनों गतिमान है आगे आने वाले दिनों में सामान नागरिकता कानून की धूम तैयार है। आगे बढ़ो पीछे मत देखो अगर पीछे देखोगे तो राजनीति की दौड़ में पिछड़ जाओगे। यही वर्तमान दौर की राजनीति है।

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