बहुचर्चित अंकिता भडांरी हत्याकांड में भले ही आनाकानी करने के बाद सरकार द्वारा इसकी जांच के आदेश के लिए सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी गयी हो। लेकिन राज्यवासियों को अब भी संदेह है कि मामले में सरकार वीआईपी को बचाने के प्रयास अब भी कर रही है। क्योंकि लोगों का सवाल है कि आखिर सीएम धामी द्वारा जब यह कहा जा चुका है कि अंकिता के माता—पिता की इच्छानुसार इसकी जांच अब सीबीआई से करायी जा रही है। अगर यह सच है तो फिर इस मामले में नये करेक्टर डा. अनिल जोशी की क्या भूमिका है जिन्होने ेइस मामले के तीन साल बीत जाने के बाद सामने आकर देहरादून के बसंत विहार थाने में अज्ञात वीआईपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। इसको देखते हुए लोगों का कहना है कि यह उस कथित वीआईपी को बचाने का कोई षडयंत्र तो नही? लोगोंं का मानना है कि इस मामले की सीबीआई जांच उसी थाना क्षेत्र से शुरू की जानी चाहिए जहंा से अंिकता का शव बरामद किया गया था। साथ ही लोगों का कहना है कि इस मामले में वादी अंकिता के माता—पिता या परिजन ही होने चाहिए ताकि जांच प्रभावित न हो सके। डा. अनिल जोशी के इस मुकदमें को कराने के बाद अकिंता के माता—पिता तो इस केस से लगभग बाहर ही हो चुके है। जिसके चलते अंकिता को पूर्ण न्याय मिल सकेगा इस बात पर भी संदेह जताया जा रहा है।



