July 31, 2026नैनीताल। सुबह सवेरे सड़क किनारे युवका का शव मिलने पर क्षेत्र में सनसनी फैल गयी। मार्निंग वाक पर निकले लोगों ने घटना की सूचना पुलिस को दी। जिस पर पुलिस व फारंसिक टीम ने मौके पर पहुंच कर शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।मामला हल्द्वानी के कमलुवागांजा रोड का है। जानकारी के अनुसार आज सुबह एक युवक का शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। मॉर्निंग वॉक पर निकले लोगों ने सड़क किनारे शव पड़ा देखा और इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी। सूचना मिलते ही मुखानी कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। साथ ही मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया, जिसने घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए। मृतक की पहचान दीपक भटृ, निवासी इन्द्रपुरम कॉलोनी, हरिपुर नायक, हल्द्वानी के रूप में हुई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। फिलहाल पुलिस मौत के कारणों का पता लगाने के लिए हर पहलू से जांच कर रही है। आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है, वहीं घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
July 31, 2026नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सबसे आक्रामक, मुखर और जाने-माने राष्ट्रीय प्रवक्ताओं में से एक, शहज़ाद पूनावाला ने अचानक पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया है। टेलीविजन डिबेट्स में विपक्ष के छक्के छुड़ाने वाले और हर मोर्चे पर नरेंद्र मोदी सरकार का लोहे की तरह बचाव करने वाले पूनावाला के इस फैसले ने राजनीतिक पंडितों से लेकर आम जनता तक सबको सन्न कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को अपना आधिकारिक इस्तीफ़ा सौंप दिया है, जिसके बाद से ही दिल्ली की सियासत में कयासों का दौर चरम पर पहुंच गया है।इस्तीफे की खबरों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा उनके सोशल मीडिया प्रोफाइल को लेकर हो रही है। एक्स पर शहज़ाद पूनावाला ने खुद को केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का “आजीवन अनुयायी” बताया है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि पूरी प्रोफ़ाइल से ‘बीजेपी’ शब्द पूरी तरह नदारद है। दूसरी तरफ, उनके इंस्टाग्राम का बायो अभी भी पुरानी कहानी बयां कर रहा है, जहां वे खुद को बीजेपी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बता रहे हैं।सूत्रों के मुताबिक, शहज़ाद पूनावाला ने निजी कारणों का हवाला देते हुए पार्टी नेतृत्व को अपना इस्तीफा सौंपा है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक बीजेपी या स्वयं पूनावाला की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस्तीफा स्वीकार किया गया है, तो पार्टी जल्द ही इस पर औपचारिक प्रतिक्रिया दे सकती है। फिलहाल सभी की नजरें बीजेपी नेतृत्व और पूनावाला के अगले कदम पर टिकी हैं।इस इस्तीफ़े के ठीक एक दिन पहले पूनावाला ने सोशल मीडिया पर अपना एक पुराना इंटरव्यू दोबारा शेयर किया था, जिसे अब उनके सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने के बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इस इंटरव्यू में उन्होंने अपने दिल की बात साझा करते हुए कहा था कि वे बहुत कम उम्र से, यानी लगभग 18-19 सालों से सक्रिय राजनीति का हिस्सा रहे हैं। पूनावाला ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा था: “अपनी क्षमता के हिसाब से, मुझे लगता है कि मैं वहां पहुंच गया हूं जहां मैं पहुंचना चाहता था। साल 2024 में ही मैंने यह तय कर लिया था कि जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तीसरा कार्यकाल शुरू होगा, मैं सक्रिय राजनीति से पूरी तरह दूरी बना लूंगा।” उन्होंने आगे बताया था कि 2024 की ऐतिहासिक लोकसभा जीत के बाद, उन्होंने कुछ अहम चुनावों में संगठन के लिए अपना योगदान जारी रखने का फैसला किया था, जिसके बाद वे हमेशा के लिए इस चक्रव्यूह से बाहर निकलना चाहते थे।
July 31, 2026पिथौरागढ़। गंगोलीहाट विकासखंड क्षेत्र में दो नाबालिग चचेरी बहनों के साथ दुष्कर्म के प्रयास का गंभीर मामला सामने आया है। सूचना मिलने पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जिसके खिलाफ पॉक्सो अधिनियम समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।पुलिस के अनुसार, एक 10 वर्षीय बच्ची और उसकी 12 वर्षीय चचेरी बहन आड़ू तोड़ने गई थीं। आरोप है कि इसी दौरान एक युवक ने उन्हें बहला—फुसलाकर अपने कमरे में बुलाया। कमरे में पहुंचते ही उसने दरवाजा बंद कर दिया और उनके साथ गलत हरकतें करते हुए दुष्कर्म का प्रयास किया। जिस पर दोनों बच्चियों ने हिम्मत दिखाते हुए कमरे का कुंडा खोलकर वहां से भागने में सफलता हासिल की। घर पहुंचकर उन्होंने पूरी घटना परिजनों को बताई, जिसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। मामले की गम्भीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों के अनुसार आरोपी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। मामले की जांच जारी है और आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है।
July 31, 2026भारतीय संसद के उच्च सदन राज्यसभा द्वारा वंदे मातरम् के सम्मान को कानूनी संरक्षण देने वाला विधेयक पारित किया जाना केवल एक विधायी निर्णय नहीं है, बल्कि राष्ट्रवाद, संविधान और नागरिक कर्तव्यों के बीच संतुलन पर नई बहस का भी आरंभ है। अब यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के गायन में बाधा डालता है, उसे रोकता है या उसका अपमान करता है, तो उसके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई का रास्ता खुल जाएगा। सरकार का कहना है कि जिस राष्ट्रीय गीत ने स्वतंत्रता आंदोलन में करोड़ों भारतीयों को एक सूत्र में बांधा, उसके सम्मान की रक्षा करना राष्ट्र का दायित्व है। इस निर्णय को केवल राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जा सकता। वंदे मातरम् भारत के स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा रहा है। अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष के दिनों में यही उद्घोष लाखों युवाओं की प्रेरणा बना। फांसी के फंदे पर झूलते क्रांतिकारियों के होंठों पर भी यही स्वर था। इसलिए इसका ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व निर्विवाद है। ऐसे राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान की रक्षा करना किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र की स्वाभाविक जिम्मेदारी मानी जाती है। सरकार का तर्क भी इसी आधार पर खड़ा है। यदि राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान के अपमान पर दंड का प्रावधान है, तो राष्ट्रीय गीत को समान कानूनी संरक्षण क्यों न मिले? यह तर्क पहली दृष्टि में तार्किक प्रतीत होता है। राष्ट्रीय सम्मान केवल प्रतीकों का नहीं, बल्कि उस इतिहास और बलिदान का सम्मान भी है जिसने भारत को स्वतंत्र बनाया। लेकिन लोकतंत्र में हर कानून की कसौटी केवल उसकी भावना नहीं, बल्कि उसका व्यावहारिक प्रभाव भी होता है। यही वह बिंदु है जहां बहस शुरू होती है। क्या राष्ट्रभक्ति कानून से पैदा की जा सकती है? क्या सम्मान दंड के भय से अधिक प्रभावी होगा या संस्कारों से? यह प्रश्न नया नहीं है। राष्ट्रप्रेम का सबसे मजबूत आधार शिक्षा, सामाजिक चेतना और इतिहास की सही समझ है। यदि नागरिकों को यह बताया जाए कि वंदे मातरम्श् केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन की धड़कन था, तो उसके प्रति सम्मान स्वाभाविक रूप से विकसित होगा। यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि कानून का उपयोग केवल उन मामलों में हो जहां वास्तव में जानबूझकर अपमान या व्यवधान उत्पन्न किया गया हो। किसी असहमति, तकनीकी त्रुटि या सामान्य परिस्थिति को अपराध का रूप देना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं होगा। कानून की भाषा और उसका क्रियान्वयन दोनों संतुलित होने चाहिए। राष्ट्र के सम्मान की रक्षा और नागरिक स्वतंत्रता दोनों भारतीय संविधान की मूल भावना का हिस्सा हैं। विपक्ष की ओर से यह आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि राष्ट्रवाद से जुड़े विषयों का राजनीतिक उपयोग बढ़ सकता है। यह चिंता पूरी तरह निराधार नहीं कही जा सकती, क्योंकि भारतीय राजनीति में राष्ट्रीय प्रतीकों पर बहस कई बार चुनावी विमर्श का हिस्सा बन चुकी है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि इस कानून को किसी राजनीतिक हथियार के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सम्मान के साधन के रूप में लागू करे। दूसरी ओर, विपक्ष को भी यह समझना होगा कि राष्ट्रीय गीत का सम्मान किसी दल विशेष का एजेंडा नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की साझा विरासत है। स्वस्थ लोकतंत्र में कानून के प्रावधानों पर सवाल उठाए जा सकते हैं, संशोधन सुझाए जा सकते हैं, लेकिन राष्ट्रीय प्रतीकों के महत्व को राजनीतिक ध्रुवीकरण का विषय बनाना उचित नहीं होगा। भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता है। अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों और आस्थाओं के बावजूद यह देश एक है। वंदे मातरम् का संदेश भी इसी मातृभूमि के प्रति समर्पण का संदेश है। यदि यह कानून उस भावना को मजबूत करता है, तो इसका स्वागत होना चाहिए। लेकिन यदि इसका उपयोग भय या विभाजन पैदा करने के लिए होता है, तो उसके उद्देश्य पर प्रश्न उठेंगे। अंततः किसी भी राष्ट्र का गौरव केवल कानूनों से सुरक्षित नहीं रहता। वह नागरिकों के मन, शिक्षा, संस्कृति और साझा विश्वास से सुरक्षित रहता है। संसद ने अपना दायित्व निभाया है, अब समाज की जिम्मेदारी है कि वह वंदे मातरम् को केवल कानूनी संरक्षण का विषय न बनाए, बल्कि उसे स्वतंत्रता संग्राम की उस विरासत के रूप में याद रखे जिसने भारत को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने में अद्वितीय भूमिका निभाई। राष्ट्रगीत का सम्मान तब सबसे अधिक सार्थक होगा, जब वह अदालत के आदेश से नहीं, बल्कि हर भारतीय के हृदय से स्वतः निकले। यही लोकतंत्र की शक्ति है और यही भारत की आत्मा भी।
July 31, 2026देहरादून। राजधानी देहरादून के व्यस्तम क्षेत्र घंटाघर के पास चकराता रोड पर आज सुबह एक दुकान में आग लगने की घटना से अफरा—तफरी मच गयी। सूचना मिलने पर पुलिस व फायरकर्मियों ने मौके पर पहुंच कर आग पर काबू पाया। आग लगने की इस घटना से दुकान का सारा सामान जल चुका है।जानकारी के अनुसार आज सुबह लगभग 7 बजे चकराता रोड पर गोयल फोटो के पास एक दुकान में आग लगने की घटना से अफरा तफरी मच गयी। स्थानीय लोगों ने घटना की सूचना पुलिस व दमकल विभाग को दी। सूचना मिलने पर पुलिस व दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और लगभग एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। बताया जा रहा है कि यह दुकान मिक्सिंग व फ्रेमिंग की है। जिसका सारा सामान इस घटना में जलकर स्वाह हो चुका है। हालांकि पुलिस व दमकल विभाग दुकान में आग लगने के कारणों की जांच में जुटी है। वहीं प्रथम दृष्टया आग लगने के कारणों में शाट सर्किट होने की बात भी कही जा रही है।
July 30, 2026देहरादून। राजधानी के क्लेमेनटाउन क्षेत्र स्थित नई बस्ती में गुरुवार को दर्दनाक हादसे में दो सगी बहनों की बरसाती नाले में बहने से मौत हो गई। हादसे के समय दोनों बच्चियां घर के बाहर खेलते-खेलते नाले के पास पहुंच गई थीं। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है।पुलिस के अनुसार, गुरुवार शाम करीब चार बजे राजेश मित्तल ने क्लेमेनटाउन थाने को सूचना दी कि दुर्गा मंदिर, नई बस्ती के पास बरसाती नाले में दो बच्चियां बहकर रैंप के नीचे फंस गई हैं। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। तब तक स्थानीय लोगों ने दोनों बच्चियों को बाहर निकाल लिया था, लेकिन उनकी मौत हो चुकी थी।मृतक बच्चियों की पहचान लक्ष्मी कुमारी (7) और सोनाक्षी कुमारी (3) के रूप में हुई है। दोनों रुदल सदा और रीना कुमारी की बेटियां थीं। परिवार मूल रूप से बिहार के खगड़िया जिले के छोटम पिपरा गांव का निवासी है और वर्तमान में क्लेमेनटाउन की नई बस्ती में किराये के मकान में रहकर दिहाड़ी मजदूरी करता है।मृतक बच्चियों की मां रीना कुमारी ने पुलिस को बताया कि गुरुवार दोपहर करीब एक बजे दोनों बेटियां घर के बाहर बरसाती नाले में नहाने गई थीं। इसी दौरान अचानक नाले में पानी का तेज बहाव आ गया और दोनों बहकर नाले के ऊपर बने रैंप के नीचे फंस गईं। काफी देर तक बच्चियां घर नहीं लौटीं तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान बड़ी बेटी की टांग रैंप के नीचे दिखाई दी। इसके बाद स्थानीय लोगों की मदद से दोनों बच्चियों को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।