नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सबसे आक्रामक, मुखर और जाने-माने राष्ट्रीय प्रवक्ताओं में से एक, शहज़ाद पूनावाला ने अचानक पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया है। टेलीविजन डिबेट्स में विपक्ष के छक्के छुड़ाने वाले और हर मोर्चे पर नरेंद्र मोदी सरकार का लोहे की तरह बचाव करने वाले पूनावाला के इस फैसले ने राजनीतिक पंडितों से लेकर आम जनता तक सबको सन्न कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को अपना आधिकारिक इस्तीफ़ा सौंप दिया है, जिसके बाद से ही दिल्ली की सियासत में कयासों का दौर चरम पर पहुंच गया है।
इस्तीफे की खबरों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा उनके सोशल मीडिया प्रोफाइल को लेकर हो रही है। एक्स पर शहज़ाद पूनावाला ने खुद को केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का “आजीवन अनुयायी” बताया है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि पूरी प्रोफ़ाइल से ‘बीजेपी’ शब्द पूरी तरह नदारद है। दूसरी तरफ, उनके इंस्टाग्राम का बायो अभी भी पुरानी कहानी बयां कर रहा है, जहां वे खुद को बीजेपी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बता रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, शहज़ाद पूनावाला ने निजी कारणों का हवाला देते हुए पार्टी नेतृत्व को अपना इस्तीफा सौंपा है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक बीजेपी या स्वयं पूनावाला की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस्तीफा स्वीकार किया गया है, तो पार्टी जल्द ही इस पर औपचारिक प्रतिक्रिया दे सकती है। फिलहाल सभी की नजरें बीजेपी नेतृत्व और पूनावाला के अगले कदम पर टिकी हैं।
इस इस्तीफ़े के ठीक एक दिन पहले पूनावाला ने सोशल मीडिया पर अपना एक पुराना इंटरव्यू दोबारा शेयर किया था, जिसे अब उनके सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने के बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इस इंटरव्यू में उन्होंने अपने दिल की बात साझा करते हुए कहा था कि वे बहुत कम उम्र से, यानी लगभग 18-19 सालों से सक्रिय राजनीति का हिस्सा रहे हैं। पूनावाला ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा था: “अपनी क्षमता के हिसाब से, मुझे लगता है कि मैं वहां पहुंच गया हूं जहां मैं पहुंचना चाहता था। साल 2024 में ही मैंने यह तय कर लिया था कि जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तीसरा कार्यकाल शुरू होगा, मैं सक्रिय राजनीति से पूरी तरह दूरी बना लूंगा।” उन्होंने आगे बताया था कि 2024 की ऐतिहासिक लोकसभा जीत के बाद, उन्होंने कुछ अहम चुनावों में संगठन के लिए अपना योगदान जारी रखने का फैसला किया था, जिसके बाद वे हमेशा के लिए इस चक्रव्यूह से बाहर निकलना चाहते थे।




