नई दिल्ली। तालीबान ने अफगानिस्तान में चेस यानी शतरंज के खेल पर प्रतिबंध लगा दिया है। उसने इस खेल को इस्लामिक कानून के खिलाफ बताते हुए यह कदम उठाया है। अफगानिस्तान में तालीबान का राज आने के बाद यह देश में खेल और मनोरंजन को सीमित करने का एक और एक्शन है। खामा प्रेस की खबर के मुताबिक, सदगुण प्रचार और दुराचार निवारण मंत्रालय ने यह बैन लगाया है। उसने अपने इस एक्शन में चेस को हराम करार दिया है और इसके साथ ही अफगानिस्तान चेस फेडरेशन को भी तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। तालीबान के खेल मंत्रालय ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा, ’11 मई से चेस से संबंधित सभी गतिविधियां अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई हैं।’ उन्होंने कहा, ‘जब तक इस मामले पर धार्मिक चिंताएं दूर नहीं हो जातीं तब तक यह प्रतिबंध जारी रहेगा।’ सरकारी खेल विभाग के प्रवक्ता अटल मशवानी के अनुसार, ‘शतरंज को शरिया कानून के अनुसार, जुआ माना जाता है और तालीबान शरिया का कड़ाई से पालन करता है।’ उन्होंने कहा, ‘शरिया में शतरंज को जुए का एक साधन माना गया है और पिछले साल लागू हुए सद्गुण प्रचार और दुराचार निवारण कानून के अनुसार जुआ प्रतिबंधित है।’ तालीबान के बाहर इस खबर से चेस जगत में काफी हैरानी जताई जा रहा है। शतरंज के खेल में अफगानिस्तान ने अभी बेहतरीन सुधार दिखाया था। यहां की चेस फेडरेशन खिलाड़ियों के साथ मिलकर उन्हें इंटरनेशनल टूर्नामेंट में प्रभावशाली छाप छोड़ने के लिए तैयार कर रहा था।




