August 14, 2026देहरादून। उत्तराखंड में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदल रहा है। मौसम विभाग ने 14 से 17 अगस्त तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने का पूर्वानुमान जताया है। इस दौरान कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश, जबकि कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।मौसम विभाग के अनुसार देहरादून, बागेश्वर और नैनीताल में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में तेज बारिश के कारण जलभराव, सड़क बाधित होने और संवेदनशील क्षेत्रों में भूस्खलन जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। प्रदेश के अन्य जनपदों में भी बारिश का असर देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग ने हल्की से मध्यम बारिश की संभावना को देखते हुए कई क्षेत्रों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। लोगों को मौसम विभाग के पूर्वानुमान पर नजर रखने और खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।मौसम विभाग ने लोगों से बारिश के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोग मौसम की जानकारी लेने के बाद ही यात्रा करें। नदी—नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों के आसपास जाने से बचने की सलाह दी गई है।
August 14, 2026अमृतसर। सुखबीर बादल पर हमले के एक दिन बाद अमृतसर में श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह के घर के बाहर फायरिंग की घटना सामने आई है। घटना का पता उस समय चला, जब घर के बाहर खड़ी कार पर गोली लगने का निशान मिला और मौके से एक गोली का खोल भी बरामद किया गया।सीसीटीवी फुटेज में गोली चलने की आवाज रिकॉर्ड होने की बात सामने आई है। लेकिन फायरिंग करने वाले लोगों की स्पष्ट पहचान नहीं हो सकी है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघुबीर सिंह ने ही सुखबीर बादल को बेअदबी मामले में धार्मिक सजा सुनाई थी। सुखबीर बादल पर कल (13 अगस्त को) महाराष्ट्र के नांदेड में गुरुद्वारा माता साहिब में निहंग ने कृपाण से हमला किया। पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। फायरिंग करने वालों की पहचान के लिए पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और आरोपियों तक पहुंचने के प्रयास किए जा रहे हैं।
August 14, 2026प्रत्येक श्रमिक की जान बेहद कीमती, सुरक्षित रेस्क्यू सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताः मुख्यमंत्री चमोली। मायापुर (पीपलकोटी) स्थित टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में हुए हादसे के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटनास्थल पर पहुंचकर रेस्क्यू अभियान की स्थिति का जायजा लेने के उपरांत जिला अस्पताल गोपेश्वर पहुंचे। यहां उन्होंने रेस्क्यू किए गए घायल श्रमिकों से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना और उनसे बातचीत की।मुख्यमंत्री ने श्रमिकों से उनके स्वास्थ्य एवं उपचार के बारे में जानकारी ली तथा अस्पताल में उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सा व्यवस्थाओं के संबंध में चिकित्सकों से भी जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों को घायल श्रमिकों को बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने तथा उनके उपचार में किसी भी प्रकार की कमी न रहने देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि घायल श्रमिकों के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जाए और आवश्यकतानुसार उन्हें सभी जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि, प्रत्येक व्यक्ति की जान हमारे लिए बहुत कीमती है। इसके लिए हमारे पास जितने भी साधन उपलब्ध हैं, उन सभी का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि टनल में फंसे प्रत्येक श्रमिक को सुरक्षित बाहर निकालना राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है और रेस्क्यू अभियान में किसी भी स्तर पर कमी नहीं रहने दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि घटना में प्रभावित श्रमिकों के परिजनों को समय पर सूचना उपलब्ध कराने के लिए संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से भी उन्होंने स्वयं वार्ता की है। साथ ही टनल दुर्घटना के कारणों की जांच के लिए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए गए हैं। इस दौरान बद्रीनाथ विधायक लखपत सिंह बुटोला, जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट, अपर जिलाधिकारी विवेक प्रकाश, मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. राजीव पाल सहित अन्य संबंधित अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
August 14, 2026चमोली। टीएचडीसी टनल में फंसे 22 लोगों में से 19 को बाहर निकाला गया अब तक 7 लोगों की मृत्यु की सूचना मिली है।आज यहां मायापुर (पीपलकोटी) स्थित टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में मलबा एवं पानी भरने की घटना के बाद जिला प्रशासन की ओर से रातभर राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी रहा। जिलाधिकारी गौरव कुमार स्वयं घटनास्थल पर मौजूद रहकर रेस्क्यू अभियान की निगरानी कर रहे हैं। टीएचडीसी की विष्णुगाड—पीपलकोटी जल विघुत परियोजना के टीआरटी टनल की लंबाई लगभग 3 किलोमीटर है। टनल के लगभग 1.50 किलोमीटर हिस्से में भूधंसाव के कारण मलबा एवं पानी आने की स्थिति उत्पन्न हुई है। इसके चलते टनल में कार्यरत कुछ लोग अंदर फंस गए। टनल में कुल 22 लोगों के फंसे होने की सूचना थी, जिनमें से रातभर चले राहत एवं बचाव अभियान में अब तक 19 लोगों को बाहर निकाल लिया गया है। वहीं शेष 3 लोगों की तलाश एवं रेस्क्यू अभियान लगातार जारी है। घटना के बाद राहत एवं बचाव कार्यों में सहयोग के लिए टनल के अंदर गए 6 बचावकर्मी भी सुरक्षित हैं। घटना में अभी तक 7 लोगों की मृत्यु की सूचना है। तरेस्क्यू किए गए घायलों को उपचार के लिए जिला चिकित्सालय गोपेश्वर लाया गया है, जहां उनका उपचार चल रहा है। चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा घायलों के उपचार एवं स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जा रही है। र9ाहत एवं बचाव अभियान में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, पुलिस सहित अन्य तकनीकी एवं विशेषज्ञ टीमें मौके पर मौजूद हैं। टनल के भीतर मलबा एवं पानी की चुनौती के बीच बचाव दल अत्यंत सावधानी एवं समन्वय के साथ अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। नलरीजिलाधिकारी गौरव कुमार ने मौके पर अधिकारियों एवं रेस्क्यू टीमों से लगातार जानकारी लेते हुए शेष लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए सभी आवश्यक संसाधनों एवं तकनीकी सहायता का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन द्वारा घटनास्थल पर राहत एवं बचाव कार्यों के साथ ही घायलों के उपचार एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी लगातार जुटाई जा रही हैं। ¥जिला प्रशासन द्वारा पूरे घटनाक्रम पर लगातार निगरानी रखी जा रही है तथा रेस्क्यू अभियान को सर्वाेच्च प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है।
August 14, 2026टनल के अंदर जाकर बचाव एवं राहत कार्यों का लिया जायजा, अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देशचमोली। मायापुर (पीपलकोटी) स्थित टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में मलबा एवं पानी भरने की घटना के बाद मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को घटनास्थल पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू अभियान की प्रगति की जानकारी ली तथा अधिकारियों एवं बचाव दलों से आवश्यक जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने टनल के अंदर जाकर बचाव एवं राहत कार्यों का जायजा लिया और रेस्क्यू अभियान में जुटी टीमों से मौके पर आवश्यक जानकारी ली।टीएचडीसी की विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना के टीआरटी टनल की लंबाई लगभग 3 किलोमीटर है। टनल के लगभग 1.50 किलोमीटर हिस्से में भूधंसाव के कारण मलबा एवं पानी आने की स्थिति उत्पन्न हुई।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि रेस्क्यू अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी उपलब्ध संसाधनों एवं तकनीकी विशेषज्ञता का प्रभावी उपयोग किया जाए। उन्होंने बचाव कार्य में जुटी एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, पुलिस सहित सभी टीमों के साथ समन्वय बनाए रखने तथा टनल में फंसे शेष 3 लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हरसंभव प्रयास करने के निर्देश दिए।जिलाधिकारी गौरव कुमार ने मुख्यमंत्री को घटनाक्रम, अब तक किए गए रेस्क्यू तथा मौके पर संचालित राहत एवं बचाव कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। जिलाधिकारी ने बताया कि टनल में फंसे 22 लोगों में से अब तक 19 लोगों को बाहर निकाला जा चुका है, जबकि शेष 3 लोगों की तलाश एवं रेस्क्यू अभियान लगातार जारी है। घटना में अभी तक 7 लोगों की दुखद मृत्यु की सूचना है।रेस्क्यू किए गए घायलों को उपचार के लिए जिला चिकित्सालय गोपेश्वर लाया गया है, जहां स्वास्थ्य विभाग एवं चिकित्सकों की टीम द्वारा उनका उपचार एवं स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जा रही है।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि रेस्क्यू अभियान के साथ-साथ घायलों के उपचार, परिजनों की सहायता एवं घटनास्थल पर आवश्यक व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की कमी न हो। उन्होंने बचाव दलों के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखते हुए अभियान को पूरी गंभीरता एवं सावधानी के साथ संचालित करने के निर्देश दिए।इस दौरान काबीना मंत्री एवं प्रभारी मंत्री भरत चौधरी, थराली विधायक भूपाल राम टम्टा, जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट, राज्य मंत्री हरक सिंह, पूर्व काबीना मंत्री राजेंद्र भंडारी, नगर पंचायत अध्यक्ष आरती नवानी, सभासद राजा जोशी, आपदा सचिव विनोद कुमार सुमन, गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप, जिलाधिकारी गौरव कुमार, पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार, उपजिलाधिकारी राजकुमार पांडेय, चंद्रशेखर वशिष्ठ सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी व कार्मिक उपस्थित रहे।
August 14, 2026उत्तराखंड को सड़क चाहिए, सुरंग चाहिए, बिजली चाहिए, पर्यटन चाहिए और रोजगार भी चाहिए। पहाड़ के विकास को रोकने की बात कोई नहीं कर रहा। लेकिन विकास की रफ्तार और पहाड़ की क्षमता के बीच संतुलन जरूरी है। सड़क चौड़ीकरण के नाम पर पहाड़ों की कटिंग, सुरंगों का निर्माण, जलविद्युत परियोजनाएं और निर्माण गतिविधियां यदि वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप न हों तो इसका सीधा असर पहाड़ की स्थिरता पर पड़ता है। उत्तराखंड के पहाड़ों में बारिश नई बात नहीं है। सदियों से पहाड़ बारिश को झेलते आए हैं। नदियां उफनती रही हैं, पहाड़ दरकते रहे हैं और रास्ते भी बंद होते रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में जिस तेजी से भूस्खलन की घटनाएं बढ़ रही हैं, उसने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है क्या अब पहाड़ सिर्फ बारिश से नहीं, बल्कि हमारी विकास नीति से भी कमजोर हो रहा है? चमोली इसका सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने है। मानसून में जिले के कई हिस्सों में सड़क पर मलबा आना, पहाड़ों से पत्थर गिरना और सड़कें धंसना लगातार जारी है। बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग से लेकर ग्रामीण संपर्क मार्गों तक यातायात बाधित होना अब जैसे मानसून की स्थायी तस्वीर बनती जा रही है। समस्या यह नहीं कि बारिश में सड़क बंद क्यों हुई। असली सवाल यह है कि हर साल उन्हीं स्थानों पर सड़क क्यों टूटती है और हर साल उन्हीं स्थानों पर भूस्खलन क्यों होता है? भूस्खलन होते ही प्रशासन और संबंधित विभाग सक्रिय हो जाते हैं। जेसीबी मशीनें पहुंचती हैं। मलबा हटता है। सड़क खुलती है और व्यवस्था राहत की सांस लेती है। लेकिन अगली बारिश में फिर वही कहानी दोहराई जाती है। यह व्यवस्था आपदा प्रबंधन तो हो सकती है, स्थायी समाधान नहीं। चमोली जैसे संवेदनशील जिले में अब हर भूस्खलन के बाद केवल मलबा हटाने के बजाय उसका वैज्ञानिक अध्ययन होना चाहिए। यह पता लगाया जाना चाहिए कि पहाड़ दरका क्यों? पानी का निकास कहां बाधित हुआ? सड़क निर्माण में कहां गलती हुई? ढलान को सुरक्षित करने के लिए क्या उपाय किए गए थे? यदि इन सवालों के जवाब नहीं खोजे गए तो जेसीबी आती-जाती रहेंगी और पहाड़ टूटते रहेंगे। यह बात अब केवल पर्यावरणविदों की चिंता नहीं रह गई है। लगातार बढ़ती आपदाएं इसे आम आदमी की समस्या बना चुकी हैं। पहाड़ को सड़क के लिए काटना पड़े तो काटिए, लेकिन यह भी तय कीजिए कि काटने के बाद पहाड़ को संभालेंगे कैसे। सड़क बंद होने की खबर अखबार में कुछ पंक्तियों की खबर बन जाती है। लेकिन जिस गांव का संपर्क सड़क टूटने से बंद होता है, उसके लिए यह पूरी जिंदगी का संकट है। किसी बीमार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाना हो, बच्चे को स्कूल जाना हो, किसान को अपनी उपज बाजार तक पहुंचानी हो या गांव में जरूरी सामान पहुंचाना होकृसड़क ही जीवन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। इसलिए भूस्खलन को केवल सड़क विभाग की समस्या मानना भूल होगी। यह स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और ग्रामीण जीवन से जुड़ा सवाल है। मौसम विभाग बारिश की चेतावनी देता है। प्रशासन संवेदनशील क्षेत्रों को लेकर अलर्ट जारी करता है। फिर भी कई बार हादसे हो जाते हैं। इसका मतलब यह है कि चेतावनी और जमीन पर तैयारी के बीच कहीं न कहीं बड़ा अंतर है। चमोली में संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां पहले से मशीनरी, बचाव दल और जरूरी संसाधन तैनात किए जा सकते हैं। भूस्खलन वाले क्षेत्रों में यातायात रोकने के लिए स्पष्ट प्रोटोकाल होना चाहिए। स्थानीय ग्रामीणों को भी यह जानकारी होनी चाहिए कि खतरे की स्थिति में उन्हें कहां जाना है और किससे संपर्क करना है। आपदा प्रबंधन का मतलब सिर्फ हादसे के बाद राहत पहुंचाना नहीं, हादसे से पहले खतरा कम करना भी है। उत्तराखंड में विकास का सबसे बड़ा पैमाना सिर्फ यह नहीं होना चाहिए कि कितनी सड़क बनी और कितने पुल तैयार हुए। यह भी देखा जाना चाहिए कि निर्माण के बाद कितने गांव सुरक्षित रहे, कितने जलस्रोत बचे और पहाड़ की प्राकृतिक संरचना कितनी सुरक्षित रही। चमोली बार-बार संकेत दे रहा है। पहाड़ की दरारें केवल भूगर्भीय घटना नहीं हैं, वे चेतावनी भी हैं। सरकार को अब भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों का स्थायी वैज्ञानिक उपचार, संवेदनशील सड़कों का नियमित भूगर्भीय ऑडिट और निर्माण परियोजनाओं की सख्त निगरानी सुनिश्चित करनी होगी। स्थानीय लोगों के अनुभव को भी योजना का हिस्सा बनाना होगा, क्योंकि पहाड़ को जितना वैज्ञानिक समझ सकता है, उतना ही वह व्यक्ति भी समझता है जिसने पूरी जिंदगी उसी पहाड़ पर बिताई है। बारिश को रोकना हमारे हाथ में नहीं है। लेकिन बारिश के बाद होने वाली तबाही को कम करना जरूर हमारे हाथ में है। चमोली की घटनाएं इसलिए सिर्फ चमोली की खबर नहीं हैं। यह पूरे उत्तराखंड के लिए चेतावनी हैं। अगर हर बरसात के बाद वही सड़क टूटती है, वही पहाड़ दरकता है और वही जेसीबी मलबा हटाती है, तो समस्या बारिश में नहीं, हमारी तैयारी में है। अब समय है कि उत्तराखंड हादसों का इंतजार करने के बजाय खतरे को पहले पहचाने। क्योंकि पहाड़ को बचाना सिर्फ पर्यावरण का सवाल नहीं है यह उत्तराखंड के भविष्य को बचाने का सवाल है।