भाजपा के इस शक्ति प्रदर्शन के पीछे क्या है?

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भाजपा के वजन व विजन के लिए समारोह ने दिया साफ संकेत

देहरादून। भाजपा की नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में भाजपा ने जिस तरह का शक्ति प्रदर्शन किया है इस शक्ति प्रदर्शन के पीछे क्या है? यह सवाल हर आम और खास व्यक्ति के मन में उठना इसलिए लाजमी है क्योंकि इससे पूर्व उत्तराखंड ही नहीं बल्कि किसी राज्य में अब तक हुए किसी भी सरकार के शपथ ग्रहण में इस तरह का शक्ति प्रदर्शन पहले कभी नहीं देखा गया है।
किसी सरकार का कोई शपथ ग्रहण समारोह क्या ऐसा दिव्य व भव्य भी हो सकता है इससे पूर्व किसी ने इसकी कल्पना भी नहीं की होगी। जिसमें देश के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, रक्षामंत्री से लेकर आधा दर्जन से अधिक केंद्रीय मंत्री और सांसदों की उपस्थिति रही हो एवं संगठन का राष्ट्रीय नेतृत्व से लेकर अन्य तमाम पदाधिकारी मौजूद रहे हो। यही नहीं इसके अलावा तमाम राज्यों के वर्तमान और पूर्व मुख्यमंत्रियों को एक साथ मंच पर देखा गया हो। वाकई यह तस्वीर हैरान करने वाली ही कही जा सकती है जब केंद्र सरकार और भाजपा के राष्ट्रीय संगठन के तमाम शीर्ष पदाधिकारी एक साथ मौजूद रहे।
कहा जाता है कि भाजपा का कोई भी काम बेवजह नहीं होता सिर्फ आध एक घंटे के इस कार्यक्रम के दौरान जो देखा गया वह भले ही पहली बार देखा गया हो और इसका वृहद रूप 25 मार्च को यूपी के लखनऊ में आयोजित होने वाले योगी के शपथ ग्रहण समारोह में देखने को मिले और दून से इसकी शुरुआत हुई हो लेकिन इसके पीछे कई मायने हैं। 2024 के आम चुनावों की तैयारियों के मद्देनजर यह शक्ति प्रदर्शन विपक्षी दलों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के मद्देनजर भी हो सकता है। भाजपा इसके जरिए यह संदेश देना चाहती है कि अब उसकी ताकत के सामने कोई भी विपक्ष नहीं टिक सकता है। इस कार्यक्रम से पूर्व आज सूबे के भाजपा नेताओं को अपने नजदीकी पूजा स्थलों में जा कर पूजा पाठ करने के निर्देश भी दिए गए थे जिसका सभी नेता पालन करते दिखे। वही इस कार्यक्रम में तमाम साधु—संतों को निमंत्रण व उनका आगमन भी दर्शनीय रहा। शपथ ग्रहण से पूर्व तमाम केंद्रीय नेता और पुष्कर धामी भी उनका आशीर्वाद लेते दिखे। यहां हुई पुष्प वर्षा भी देखने योग्य थी। कुल मिलाकर भाजपा ने अपनी सांकेतिक भाषा में इस आयोजन के जरिए अपना विजन और वजन दोनों ही साफ कर दिए हैं।

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