अंकिता भण्डारी हत्याकाण्ड की जांच सीबीआई से कराने की मांग

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देहरादून। अंकिता भण्डारी हत्याकाण्ड की जांच सीबीआई से कराये जाने की मांग को लेकर महानगर कंाग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष डाॅ0 जसविन्दर सिंह गोगी के नेतृत्व में कांग्रेसियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा।
राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन में कहा गया है कि
जनपद पौडी गढ़वाल के अन्तर्गत यमकेश्वर ब्लाक में घटित अंकिता हत्याकाण्ड के जघन्य अपराध की घटना मानवता को शर्मसार करने वाली तथा देवभूमि उत्तराखण्ड की अस्मिता को कलंकित करने वाली घटना है। जिसके लिए दोषियों को फांसी की सजा दी जानी चाहिए जो कि इस प्रकार के अपराध करने वालों के लिए एक नजीर साबित हो।
अंकिता हत्याकण्ड की घटना से साबित हो गया है कि उत्तराखण्ड राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है तथा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली भाजपा सरकार में महिलाओं पर अत्याचार की घटनायें लगातार बढती जा रही हैं। अंकिता हत्याकाण्ड जैसे जघन्य अपराध राज्य में महिला सुरक्षा के लिए गम्भीर चिन्ता का विषय हैं। जनपद पौडी गढ़वाल के यमकेश्वर ब्लाक में भाजपा नेता के रिजार्ट में राज्य की बेटी अंकिता भण्डारी के साथ हुई जघन्य अपराध की घटना के उपरान्त जिस प्रकार रातोंरात सबूत नष्ट करने का काम किया गया उससे स्पष्ट होता है कि भाजपा सरकार में अपराधियों को खुला संरक्षण दिया जा रहा है। इस जघन्य आपराधिक घटना में शामिल सभी तथाकथित वी.आइ.पी. नामों का खुलासा करने से भी राज्य पुलिस कतरा रही है। राज्य सरकार इस जघन्य हत्याकाण्ड के सबूतों को नष्ट करने का काम कर रही है।
भाजपा नेता के पुत्र का रिसाॅर्ट होने के चलते राज्य सरकार द्वारा शुरूआत से ही इस जघन्य अपराध की घटना पर पर्दा डालने का काम किया गया। सरकार के दबाव में पहले राजस्व पुलिस द्वारा रिपोर्ट दर्ज करने में हीला हवाली की गई तथा इसके उपरान्त रेगुलर पुलिस द्वारा 19 सितम्बर, 2022 को लापता हुई युवती की चार दिन तक भी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। कानून की नजर में जब कभी भी ऐसी घटना होती है तो उस स्थान को सील कर दिया जाता है परन्तु रात के अंधेरे में सबूतों को नष्ट करने का काम किया गया। जिस वीआईपी के नाम पर अंकिता हत्याकाण्ड को अंजाम दिया गया उसके नाम का भी खुलासा करने में सरकार के दबाव में पुलिस प्रशासन कतरा रहा है। राज्य में लगातार घट रही महिला अपराध की घटनाओं से आज राज्य की महिलाएं अपने को असुरक्षित महसूस कर रही हैं।
राज्य पुलिस के आला अधिकारी इस हत्याकाण्ड के मुख्य अपराधी के पिता से हाथ मिलाते हुए दिख रहे हैं ऐसे में पुलिस की जांच पर विश्वास कैसे किया जा सकता है।
Qउत्तराखंड की बेटी अंकिता की निर्मम हत्या करने वाले अपराधियों को इतना वक्त दिया गया कि वह साक्ष्य मिटा सके, एक महत्वपूर्ण साक्ष्य बुलडोजर से तोड़कर नष्ट कर दिया गया। जहां सीसी टीवी कैमरा सहित कई साक्ष्य कोर्ट में महत्वपूर्ण हो सकते थे। अपराधियों के मोबाइल और उनके संरक्षकों के मोबाइल गायब बताए जा रहे हैं। अपराधियों को पुलिस रिमांड में लेने में जान बूझकर विलंब किया गया। मृतक के पोस्ट मार्टम में महिला डॉक्टर को सम्मिलित न करना रहस्य को और गहरा कर दे रहा है। 18 सितंबर की सांय से ही चर्चा में आ चुके अंकिता की हत्या की आशंका के बावजूद अभियुक्तों की गिरफ्तारी में विलंब, शव खोजने में विलंब, प्रमुख अभियुक्त के रहस्यमय तरीके से गायब मोबाइल की खोज न होना कहीं न कहीं सवाल खड़े कर रहा है।

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