Home राष्ट्रीय Uttar Pradesh धर्मांतरण के बाद अनुसूचित जाति से जुड़ी सुविधाएं बंद हों : इलाहाबाद...

धर्मांतरण के बाद अनुसूचित जाति से जुड़ी सुविधाएं बंद हों : इलाहाबाद हाई कोर्ट

0
396


नई दिल्ली। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने धर्मांतरण को लेकर अहम फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने कल मंगलवार को अपने एक फैसले में धर्मांतरण के बाद अनुसूचित जाति का दर्जा बनाए रखने को संविधान के साथ धोखाधड़ी के समान करार दिया। साथ ही कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह यह ध्यान रखे कि दूसरे धर्म (ईसाई) में जाने वाले लोग अनुसूचित जाति से जुड़े फायदे न ले सकें। ईसाई धर्म को स्वीकार करते ही अनुसूचित जाति से संबंधित मिलने वाली सभी सुविधाएं बंद हो जानी चाहिए। हाई कोर्ट ने अपने फैसले के साथ ही उत्तर प्रदेश के पूरे प्रशासनिक तंत्र को यह तय करने का निर्देश दिया कि धर्मांतरण के बाद ईसाई बनने वाले लोग अनुसूचित जाति के तहत मिलने वाले लाभ लेते न रहें। कोर्ट ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव को यह तय करने के लिए उचित कदम उठाने का निर्देश भी दिया कि अल्पसंख्यक दर्जा और अनुसूचित जाति के दर्जे के बीच अंतर को सख्ती से लागू किया जाए। साथ ही हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में सभी जिलाधिकारियों के लिए ऐसे मामलों की पहचान कर उनकी रोकथाम के लिए कानून के मुताबिक कार्रवाई करने के लिए 4 महीने की समयसीमा तय कर दी है। जस्टिस प्रवीण कुमार गिरि ने जितेंद्र साहनी नाम के शख्स की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए यह निर्देश जारी किया। याचिका में धर्म परिवर्तन के आरोप में एसीजेएम की कोर्ट में चल रहे आपराधिक केस कार्यवाही को रद्द किए जाने की मांग की गई थी। जितेंद्र साहनी पर हिंदू देवी- देवताओं का मजाक उड़ाने और वैमनस्य को बढ़ावा देने का आरोप है। साहनी ने इस आधार पर चार्जशीट रद्द करने की मांग की थी कि उसने ईसा मसीह के उपदेशों का अपनी खुद की जमीन पर प्रचार करने के लिए संबंधित अधिकारियों से अनुमति मांगी थी और उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है। कोर्ट ने 21 नवंबर को सुनवाई के दौरान याचिका के समर्थन में दाखिल हलफनामे पर गौर करते हुए पाया कि याचिकाकर्ता की ओर से हलफनामा में अपना धर्म हिंदू लिखा गया है, जबकि वह धर्म बदलकर ईसाई धर्म अपना चुका है। कोर्ट को यह बताया गया कि धर्मांतरण से पहले याचिकाकर्ता का ताल्लुक अनुसूचित जाति समुदाय से था और हलफनामे में उसने अपना धर्म हिंदू ही लिखा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here