April 21, 2026चुनाव से पूर्व राजनैतिक दलों का यह ट्रेंड आज नया नहीं पार्टियों में ‘बगावत’ आम बात, प्रजातंत्र की है एक प्रक्रिया दलों में जुड़ने व टूटने का सिलसिला रहता है लगातार जारी देहरादून। राजनीति के अपने ही अलग और अनोखे रंग चुनावी साल में बार-बार दिखते है। उत्तराखंड में विधानसभा के चुनाव की घोषणा से पूर्व भाजपा में जहां ‘भगदड़’ मची है, वही कांग्रेस में ‘फूट’ भी सार्वजनिक हो गई है। चुनाव से पूर्व राजनैतिक दलों का यह ट्रेंड आज नया नहीं है। देश के इतिहास में अभी तक हुए चुनावों में यह सामान्य रूप से चलता आ रहा है और आगे भी चलता रहेगा। क्योंकि यह राजनीति का ही एक अनोखा रूप है।बता दें कि उत्तराखंड में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव से पूर्व सभी दल अपनी हलचलें तेज कर देते हैं और चुनाव आते-आते यह अपने चरम पर होती है। प्रदेश में दो प्रमुख दलों के बीच मुख्य मुकाबला होता है और यह मुकाबला किसी महाभारत से कम नहीं होता है। राजनैतिक दल इसके लिए एक साल से तैयारियों में लगे रहते है। एक-दूसरे दल से लोगों को तोड़ना और जोड़ना चुनाव से पूर्व लगा रहता है। इससे दलों में फूट और भगदड़ मचना स्वाभाविक है। प्रदेश में वैसे भी भाजपा और कांग्रेस में यह साफ देखा जाता है। हालांकि प्रदेश में क्षेत्रिय दल भी है, लेकिन इस दल से जुडे़ लोग दल में लंबे समय से है और दल के प्रति अपनी निष्ठा को निभाते है।दूसरी ओर चुनावी साल में भाजपा-कांग्रेस में नेताओं का आना और जाना लगा रहता है। पहले यहां भाजपा की बात करें तो भाजपा वर्तमान समय में सत्ता में है और सत्ता के बल पर आगामी विधानसभा चुनाव में जीत के लिए अपनी पकड़ बनाने के लिए सभी हथकंडे अपनाने में लगी है। सरकार में रहते हुए भाजपा सभी कार्यकर्ताओं और नेताओं को तो खुश नहीं कर सकती है। इसलिए भाजपा से नाराज लोगों का कांग्रेस में जाना स्वाभाविक है। यह कहा जाए कि चुनावी साल में भाजपा में भगदड़ मची है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण भी पिछले दिनों सामने आया है। भाजपा के छह बडे़ नेता कांग्रेस में शामिल हो गए। इसके साथ ही अगर कांग्रेस के दावों को सच माने तो कई भाजपा नेता कांग्रेस में शामिल होने के लिए कांग्रेस के संपर्क में है। यह अपने आप में यह दर्शाता है कि भाजपा में भगदड़ मची है और आगे ओर भी भगदड़ मचेगी।दूसरी ओर कांग्रेस की बात करें तो कांग्रेस में छह भाजपा नेताओं के शामिल होने के साथ ही फूट पड़ गई और यह फूट सावजनिक हो गई है। कांग्रेस के बडे़ नेता के राजनैतिक अवकाश इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इसके साथ ही कांग्रेस ने प्रदेश की अपनी नये अध्यक्ष के साथ टीम अभी तक खड़ी नहीं की। इससे साफ संदेश जाता है कि कांग्रेस के अंदर फूट है और कांग्रेस में सब ठीक नहीं चल रहा है। कांग्रेस नेताओं के नाराज होने का क्रम जारी है और यह विधानसभा चुनाव में टिकट बटवारे तक जारी रह सकती है। राजनैतिक विशेषज्ञों की माने तो पार्टियों में फूट,भगदड़ से राजनैतिक माहौल खराब होता ही है। इसके साथ ही चुनाव के समय इससे नुकसान भी होता है और यह क्रम दोनों दलों में जारी रहता है।चुनावी साल में पार्टियों में ‘बगावत’ आम बात है और प्रजातंत्र की यह एक प्रक्रिया है। छोटे चुनाव हो या बडे़ यह होता ही है। देश की प्रमुख पार्टियों पर सभी की नजरें रहती हैं, लेकिन चुनाव के समय सभी दलों में यह सब चलता रहता है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव के समय तो देश के प्रमुख दलों में अंतरकलह समान्य बात है और दलों में जुड़ने और टूटने का सिलसिला लगातार जारी रहता है। इसके फायदे और नुकसान चुनाव के समय दलों को होता है।
April 21, 2026महिलाओं को राज्यों की विधानसभाओं तथा संसद में 33 फीसदी आरक्षण देने के लिए केंद्र की मोदी सरकार द्वारा नारी वंदन बिल लाया गया तथा इसे एक मास्टर स्ट्रोक के रूप में देखा जा रहा था वह बिल ही भाजपा और सरकार के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन जाएगा? यह किसी ने भी नहीं सोचा था। सत्ता शीर्ष पर बैठे नेताओं की गलत सोच ने अब उन्हें पूरी तरह से एक्सपोज कर दिया है। विपक्ष इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि इस बिल का विरोध करने का मतलब है अपना इतना बड़ा नुकसान करना कि उनका कभी सत्ता में आने का सपना पूरा नहीं हो सकता वहीं सत्ता में बैठे लोग भी जानते थे कि अगर महिलाओं को अपने पाले में खड़ा कर लिया तो वह हमेशा अजेय बने रहने की किसी गारंटी से कम नहीं होगा। मगर भाजपा के नीतिकारों की कुछ गलतियों के कारण अब उनका पूरा खेल खराब हो चुका है। पीएम मोदी अब भले ही कितने भी घड़ियाली आंसू बहा ले और कांग्रेस तथा विपक्ष पर आरक्षण बिल की भ्रूण हत्या करने का आरोप लगा दें उनका कोई दांव पेेच काम आने वाला नहीं है। ऐसा नहीं है कि उनके पास इस बात के पर्याप्त अवसर नहीं थे कि वह नए संसद भवन में अपने सबसे पहले लाये गए बिल को लेकर उसी समय 2011 की जनगणना के आधार पर किए गए परिसीमन के अनुरूप लागू कर देना चाहिए था। आज अगर विपक्ष के नेता और तमाम महिलाएं इस बात का आरोप लगा रही है कि सरकार महिलाओं को आरक्षण देना ही नहीं चाहती है तो यह एक सच्चाई है। सरकार ने इसे 2026 से होने वाली जनगणना और नए परिसीमन तक लटकाए क्यों रखा? सरकार को इसे लागू करने से पहले ही इसमें संशोधन की जरूरत क्यों पड़ गई? जब सरकार जानती थी कि उनके पास संविधान संशोधन के लिए पर्याप्त संख्या बल नहीं है और बिल पास नहीं हो सकता तब इस बिल को क्या जानबूझकर इसलिए लाया गया था। प्रधानमंत्री द्वारा अपने राष्ट्रीय संबोधन में जो रोना पिटना किया गया और जिस तरह विपक्ष पर वह बरसे तथा बिल गिरने पर भाजपा की महिला सांसदों ने विपक्ष के खिलाफ प्रदर्शन किया? वह सब भाजपा की एक सूची समझी नौटंकी ही थी। इसका सच अब पूरे देश के सामने आ गया है सोशल मीडिया पर सरकार के इस कृत्य को लेकर उनकी जिस तरह थू—थू हो रही है और भाजपा के वरिष्ठ नेता वसुंधरा राजे तथा मुरली मनोहर जोशी ने पीएम मोदी और सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए भाजपा की दुर्दशा करने का आरोप लगाया है और देशभर में कांग्रेस की महिलाओं द्वारा पीएम के पुतले फूके जा रहे हैं और भाजपा के खिलाफ नारीबाजी की जा रही है तथा भाजपा नेताओं द्वारा महिलाओं के साथ किए गए कूकृत्यों का इतिहास उन्हें याद दिलाया जा रहा है तो यह समझने के लिए काफी है कि भाजपा ने इस महिला आरक्षण बिल को लेकर जो तमाशा किया है या करना चाहती थी उसका पूरा सच अब जनता के सामने आ चुका है। वह बिहार की तरह महिलाओं के खातों में पैसे भेज कर और महिला आरक्षण के नाम पर राजनीति करके उनसे अब भविष्य में वोट नहीं ले सकते हैं।
April 21, 2026महिला ने भी मौत को गले लगाया हरिद्वार। लूट की झूठी सूचना देने वाले नशेड़ी युवक ने फांसी लगाकर जान दे दी। वहीं गृहक्लेश के चलते एक महिला ने भी आत्महत्या कर ली है। सूचना मिलने पर पुलिस ने दोनो शवों को कब्जे मे लेकर अग्रिम कार्यवााही शुरू कर दी है।जानकारी के अनुसार रानीपुर कोतवाली क्षेत्र के सलेमपुर गांव में 35 वर्षीय युवक ने आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान नितिन कुमार के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि युवक लंबे समय से नशे का आदी था। परिजनों के अनुसार, सोमवार सुबह काफी देर तक कमरे का दरवाजा नहीं खुला तो शक हुआ। पड़ोसी की मदद से दीवार पार कर अंदर देखा गया, जहां युवक फंदे से लटका मिला। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को नीचे उतारकर कब्जे में लिया। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ दिन पहले युवक ने पुलिस को लूट की झूठी सूचना दी थी, जिस पर पुलिस मौके तक पहुंची थी। हालांकि, नशे की हालत को देखते हुए उस समय कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। इसके दो दिन बाद ही युवक ने आत्महत्या कर ली है।आत्महत्या का दूसरा मामला सिडकुल थाना क्षेत्र के ब्रह्मपुरी इलाके का है। यहां रामधाम कॉलोनी में रहने वाली एक विवाहिता लता ने आत्महत्या कर ली। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि महिला का अपने पति के साथ अक्सर विवाद होता था। घरेलू कलह से परेशान होकर महिला ने यह कदम उठाया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
April 21, 2026पिस्टल निकाल कर दी जान से मारने के धमकी देहरादून। राजधानी दून की कानून व्यवस्था किस तरह से चरमरा गयी है। इसकी बानगी बीते रोज पटेलनगर क्षेत्र में सामने आयी है। यहंा कार सवार कुछ बदमाशों द्वारा जहंा एक भाजपा नेता को जान से मारने का प्रयास किया गया लेकिन जब यह प्रयास असफल रहा तो फिर उसके अपहरण की कोशिश की गयी। घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।जानकारी के अनुसार बीती शाम पटेलनगर कोतवाली क्षेत्र में भाजपा युवा मोर्चा के मंडल उपाध्यक्ष पर कार से टक्कर मारकर हत्या का प्रयास किया गया और उसके बाद जबरन अपहरण करने की कोशिश की गई। घटना के दौरान पीड़ित की बाइक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और एक मकान की दीवार भी टूट गई। पीड़ित 26 वर्षीय हर्ष वालिया नयागांव चंद्रबनी निवासी हैं। वे गौतम कुंड स्थित एक कैफे से शाम को लौट रहे थे। तभी पीछे से एक सफेद रंग की एक कार ने उनकी बाइक में जोरदार टक्कर मार दी। तेज रफ्तार की वजह से हर्ष वालिया सड़क पर गिर गए।इस बीच कार से उतरकर आए युवकों ने तुरंत उनके सिर पर पिस्टल तान दी। जबकि दूसरी कार से कुछ और युवक पहुंचे और पीड़ित को जबरन अपनी गाड़ी में बैठाने की कोशिश करने लगे। हर्ष वालिया ने शोर मचाया तो आसपास के स्थानीय लोग मौके पर जुटने लगे। आरोपियों ने जान से मारने की धमकियां देते हुए उन पर मारपीट भी शुरू कर दी। हर्ष वालिया ने मौके का फायदा उठाते हुए पास की दीवार फांदकर भाग निकलने में सफलता पाई। घटना में उनकी बाइक पूरी तरह से बर्बाद हो गई। एक मकान की बाउंड्री वॉल भी टूट गई। पीड़ित ने बाद में पटेलनगर कोतवाली में तहरीर देकर बताया कि यह हमला प्लान्ड था। पीड़ित ने पुलिस को दी तहरीर में चार मुख्य आरोपियों के नाम लिए हैं— हार्दिक शर्मा, अभिषेक वर्मा, अभिनव काकरान और चेतन्य शर्मा। इनके अलावा तीन अन्य अज्ञात युवक भी शामिल बताए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दिन पहले क्लेमनटाउन थाने में एक मामले को लेकर इन युवकों से उनकी बहस हुई थी, जिसमें उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई थी। बहरहाल पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।
April 21, 2026कब्जे से अलग—अलग बैंको के 66 एटीएम बरामद देहरादून। पुलिस ने एटीएम कार्ड बदलकर लोगों के साथ धोखाधडी करने वाले तीन लोगों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से विभिन्न बैंकों के 66 एटीएम कार्ड बरामद किये। पुलिस ने तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उनको न्यायालय में पेश किया जहां से उनको न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।मिली जानकारी के अनुसार प्रेमनगर पुलिस द्वारा वाहन चेकिंग के दौरान वाहन सफेद रंग की वेन्यू को रोक कर चेक किया गया जिसमें सवार 3 व्यक्ति इमरान अली पुत्र मोहम्मद अली निवासी डाबर तालाब संगम विहार गाजियाबाद, नसीरुद्दीन पुत्र बशीरुद्दीन निवासी वेलकम जफरा नॉर्थ ईस्ट दिल्ली चाणक्यपुरी, एवं मोहम्मद खालिद पुत्र हमीद निवासी लोनी गाजियाबाद की तलाशी ली गई तो उनके कब्जे से अलग—अलग बैंकों के 66 एटीएम कार्ड बरामद हुए इसके संबंध में कोतवाली प्रेम नगर पर पर तत्काल मुकदमा दर्ज किया गया। पूछताछ में उनके द्वारा बताया गया कि वो अलग—अलग एटीएम में जाकर पहले एटीएम में आये सीधे साधे तथा बुजुर्ग लोगों को टारगेट करते थे जिसके उपरान्त उस एटीएम से पैसा निकालने वाले लोगों के पैसे न निकलने पर उनकी सहायता करने के बहाने उनका एटीएम पिन देख लेते हैं तथा उनके द्वारा पूछताछ में बताया कि उनके यहां 14 जून 2025 को हरबर्टपुर में एटीएम बदलकर बाबूगढ़ चुंगी वाले एटीएम से 50000 रूपये निकले थे जिस संबंध में कोतवाली विकास नगर को बताया गया है। उनसे अन्य घटनाओ के बारे में जानकारी की जा रही है, एवम सम्बंधित जनपद से इनके आपराधिक इतिहास की जानकारी भी की जा रही है। प्रारम्भिक पूछताछ मेँ इनके द्वारा लगभग 25 लाख रूपये से अधिक की धनराशि विभिन्न एटीएम पर विभिन्न लोगों से ठगे जाने की स्वीकारोक्ति की गई है जिसके सम्बन्ध में भी जांच की जा रही है। पुलिस ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उनको न्यायालय में पेश किया जहां से उनको न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
April 21, 2026उघमसिंह नगर। खटीमा क्षेत्र में वन विभाग के कर्मियों और एक बीजेपी नेता के बीच हुए विवाद ने स्थानीय स्तर पर तूल पकड़ लिया है। बीजेपी अनुसूचित जनजाति चकरपुर मंडल के अध्यक्ष तथा ग्राम प्रहरी विपिन राणा पर वन रेंजर समेत तीन कर्मियों द्वारा कथित मारपीट, गाली—गलौज और जान से मारने की धमकी का आरोप है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।घटना शुक्रवार को तब हुई जब विपिन राणा को लकड़ी चोरी से जुड़े एक मामले में पूछताछ के लिए वन चौकी बुलाया गया। उनके अनुसार, वन बीट अधिकारी का फोन आने के बाद वह चौकी पहुंचे। वहां बिना किसी पूछताछ के उनके साथ मारपीट शुरू कर दी गई। इसके बाद उन्हें बूड़ाबाग कुटरा मार्ग से दोपहिया वाहन पर खटीमा रेंज ले जाया गया, जहां फिर से मारपीट की गई। आरोप है कि इस दौरान उनका वीडियो बनाया गया और अन्य लोगों के नाम बताने का दबाव डाला गया।विपिन राणा ने पुलिस को दी तहरीर में स्पष्ट रूप से कहा, “मुझे एक वन बीट अधिकारी का फोन आया था। उन्होंने मुझे वन चौकी बुलाया। जहां मेरे साथ बिना बातचीत के मारपीट कर दी। फिर जंगल में ले जाकर मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी। साथ ही एक वीडियो भी बनवाई। मैं ग्राम प्रहरी हूं। ऐसे में मुझे लोगों को लकड़ी के बारे में जानकारी देनी पड़ती है, लेकिन मेरे साथ मारपीट की गई। मारपीट के बाद विपिन राणा की हालत बिगड़ गई। शनिवार को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इस दौरान उन्होंने वन विभाग के कर्मचारियों पर मारपीट, गाली—गलौज, आपराधिक षड्यंत्र और जान से मारने की धमकी के आरोप लगाए।शुरुआत में पुलिस की ओर से कोई तत्काल कार्रवाई न होने पर स्थानीय स्तर पर आक्रोश फैल गया। रविवार को भाजपा कार्यकर्ताओं, जनजाति मोर्चा, किसान मोर्चा, युवा मोर्चा के पदाधिकारियों और ग्रामीणों ने खटीमा कोतवाली का घेराव किया। बहरहाल पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।