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इश्क नचाए जिसको यार…

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हो सकता है इस संपादकीय की हेडिंग पढ़कर आपको महसूस हो कि हम यह कैसी शेरो—शायरी करने लगे? लेकिन सच यह है कि इस मुद्दे पर हमारी कुछ लिखने की मंशा ही नहीं थी। क्योंकि सत्ता का इस तरह का ड्रामा और आडंबर देखते—देखते और लिखते—लिखते सालों साल गुजर गए हैं। इसलिए अब ऐसे विषय बहुत बोरिंग लगने लगे हैं लेकिन राहुल गांधी ने बीते कल बिहार के चुनाव में एंट्री मारते ही उस मुद्दे को एक बार फिर चर्चाओं के केंद्र में ला दिया गया जो 2 दिन पहले छठ पूजा में समापन के साथ समाप्त हो गया था। पूरे देश ने बीते 12 सालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जितने भी विभिन्न रूपों में देखा है वह सभी जानते हैं कि वह अपने व्यक्तित्व का प्रदर्शन करने की कितनी कलाओं में निपुण है। जब तक लोगों को पीएम मोदी इवेंट मैनेजमेंट का सच पता नहीं था तब तक लोग उनकी हर एक इवेंट पर तारीफ करते हुए नहीं थकते थे। देश के लोग आज तक प्रधानमंत्री के रूप में पहली बार संसद में प्रवेश के उस क्षण को भूले नहीं है जब संसद भवन की सीढ़ियों में कदम रखते हुए वह दंडवत लेट गए थे। मीडिया ने इसे लोकतांत्रिक मंदिर का सम्मान और संविधान के रक्षक के रूप में खूब प्रचारित किया था। तब से लेकर आज तक बीते 15 सालों में लोग कभी उन्हें केदारनाथ में धूनी रमाते और ध्यान करने से लेकर समुद्र में गोते लगाने से लेकर जंगल सफारी की सैर करने और फाइटर प्लेन में उड़ान भरते अनेक रूपों में देखा है। वह जिस राज्य में भी चुनावी जनसभा करने जाते हैं उस राज्य की वेशभूषा और भाषा अपना लेते हैं। कोरोना को भगाने के लिए वह पूरे देश से थाली और ताली बजवा देते हैं मोबाइल की टॉर्च जलवा देते हैं। लेकिन अब उनकी इस अद्भुत कला की कलई खुल चुकी है। अभी दिल्ली में छठ पूजा पर यमुना में स्नान का जो इवेंट मैनेजमेंट किया गया था जिसमें इस नदी को प्रदूषण मुक्त करने और छठ की पूजा के जरिए बिहार के मतदाताओं का मन जीतने का प्रयास किया जाना था उसके सच से एक दिन पहले बीबीसी के संवाददाता और आम आदमी पार्टी के पूर्व मंत्री सौरभ ने ऐसा भांडा फोड़ा कि पीएम को अपना यह कार्यक्रम ही रद्द करना पड़ा। यमुना किनारे दिल्ली सरकार ने लाखों करोड़ों रुपए खर्च कर कैसे कृत्रिम तालाब बनाए और उसमें पाइप के जरिए सोनिया विहार से गंगा का फिल्टर लाया गया, इसका सच पूरे देश के सामने ला दिया गया। इस मुद्दे पर नेता विपक्ष राहुल गांधी ने बिहार में अपनी पहली जनसभा में यह कहकर कि पीएम बिहार के लोगों का वोट पाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। अगर बिहार के लोग उनसे कहे कि हम आपको वोट देंगे बस आप मंच पर भाषण देने की बजाय हमें नाच कर दिखा दो तो वह नाचने लगेंगे। वह कहते हैं कि मोदी वोट के लिए कुछ भी कर सकते हैं। चुनाव से पहले बिहार के लोग उनसे जो चाहे करवा सकते हैं। राजनीति और सत्ता से इश्क क्या सच में किसी भी नेता को इस तरह नचा सकता है। बिहार के चुनाव का कार्यक्रम छठ पूजा को मद्देनजर रखकर ही ऐसा तय किया गया था। खैर देखते जाइए बिहार चुनाव जीतने के लिए देश के नेता अभी आपके सामने कैसे—कैसे नाच नाचते हैं। मगर इस बार जनता भी सब जान चुकी है। वह इनका नाच तो दिखेगी पर वोट किसे देगी यह नतीजो से ही पता चलेगा।

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