नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक का नया चेक क्लीयरिंग सिस्टम 4 अक्टूबर 2025 से लागू हो चुका है, लेकिन इसमें अब दिक्कतें आने लगी हैं। आरबीआई ने इस मकसद के साथ इस नए सिस्टम को शुरू किया ताकि बैंक में चेक लगाने के बाद यह घंटों में पास हो जाए और अकाउंट में झटपट पैसे आ जाए। हालांकि, अब तकनीकि गड़बड़ियों और कर्मचारियों की सही ट्रेनिंग के अभाव में चेक क्लीयरिंग और सेटलमेंट सिस्टम में परेशानी आने लगी है। ऐसे में नए सिस्टम के लागू हो जाने के बाद भी लोगों को चेक क्लीयर होने में इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि प्लान यह था कि चेक फटाफट क्लीयर हो और अकाउंट में झटपट पैसे आए। ज्यादातर बैंकों में स्टाफ नए सिस्टम को लेकर अपर्याप्त प्रशिक्षण, चेक की खराब व धुंधली तस्वीरें और स्कैन करने के अल-अलग तरीकों को लेकर परेशान हैं। उनका मानना है कि नए सिस्टम के तहत उन्हें जल्दबाजी में स्कैनिंग, स्कैन की खराब क्वॉलिटी, चेक की अधूरी या धुंधली इमेज जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है इससे सेटलमेंट में देरी हो रही है। कई बैंकों में स्टाफ नए सिस्टम की ट्रेनिंग ले रहे हैं। यह समस्या बड़े शहरों के मुकाबले छोटे शहरों या नॉन-मेट्रो सिटीज में अधिक देखी जा रही है, जहां अभी तक कर्मचारी नए सिस्टम के आदि नहीं हो पाए हैं। सरकारी बैंक के एक अधिकारी का कहना है कि सीटीएस सिस्टम शुरू होने के समय में भी इस तरह की दिक्कतें आई थीं। उम्मीद है कि इस बार भी हालात जल्द संभल जाएंगे।




