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भ्रष्टाचार पर क्यों चुप है सरकार?

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भ्रष्टाचार जो हमारे देश और समाज की सबसे बड़ी समस्या है उस मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार में बैठे लोगों द्वारा हमेशा ही चुप्पी क्यों साधी जाती रही है। यह सवाल हर आम आदमी के मन में चुभता रहता है। भ्रष्टाचार शब्द का उपयोग नेताओं द्वारा या तो अपने चुनावी लाभ के लिए किया जाता है या फिर अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ ईडी और सीबीआई के छापे के जरिए उन्हें चुप कराने के लिए। अलबत्ता भ्रष्टाचार को मिटाने के नाम पर हमेशा एक गंभीर उदासीनता ही बनी रहती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब देश की सत्ता संभाली थी तब उन्होंने कहा था कि ट्टन खाऊंगा न खाने दूंगा’ लेकिन उनके शासनकाल के 11 साल बीत जाने के बाद भी देश की सर्वाेच्च अदालत को उनकी सरकार से अब यह पूछना पड़ रह है कि उन्होंने भ्रष्टाचार को रोकने और लोकायुक्त और लोकपाल गठन को लेकर क्या किया? अभी कुछ वर्षों पूर्व नैनीताल हाई कोर्ट द्वारा उत्तराखंड की धामी सरकार को नोटिस जारी कर लोकायुक्त का गठन न किए जाने पर जवाब मांगते हुए लोकायुक्त के कार्यालय पर होने वाले खर्च पर रोक लगा दी गई थी। उत्तराखंड में भी बीते 8 सालों से भाजपा की सरकार है लेकिन लोकायुक्त की नियुक्ति के बिना ही लोकायुक्त कार्यालय पर पिछले कई वर्षों तक करोड़ों रुपए खर्च किये गये। यह अत्यंत ही हास्यापद स्थिति है कि भ्रष्टाचार रोकने के नाम पर सत्ता में बैठे लोगों द्वारा तरह—तरह के नाटक किए जाते हैं और कोई भी सरकार या नेता इस समस्या को लेकर कभी संजीदा नहीं रहे। इससे पूर्व त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व वाली सरकार की बात की जाए तो चुनाव के दौरान भाजपा ने सरकार बनने के 100 दिन के भीतर लोकायुक्त गठन का वायदा किया था। त्रिवेंद्र सिंह रावत अपने चार साल के कार्यकाल में भी लोकायुक्त का गठन नहीं कर सके हद तो तब हो गई जब उनके द्वारा विधानसभा में पेश किए गए लोकायुक्त प्रस्ताव पर कोई सवाल पूछता तो उनका जवाब होता कि जब सूबे में भ्रष्टाचार ही नहीं रहा तो लोकायुक्त की क्या जरूरत है। अहो भाग्य इस प्रांत के लोगों के जिनके नेताओं द्वारा सच नजर नहीं आता और अगर आता है तो वह बिल्ली को सामने देखकर अपनी आंखें मूंद लेते हैं और सोचते हैं कि अब बिल्ली भी उन्हें नहीं देख सकती है। इन दिनों भी उत्तराखंड की राजनीति में कई भ्रष्टाचार के मुद्दों ने तहलका मचा रखा है जिसमें भर्ती घोटाले सहित अन्य कई घोटाले हैं। सवाल यह है कि क्या इस भ्रष्टाचार को रोकने के लिए किसी भी स्तर पर कभी भी किसी भी सरकार द्वारा कोई भी प्रभावी कदम उठाये जा सकेंग?े

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