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दुखद हादसा

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बीती रात प्रयागराज महाकुंभ में मची भगदड़ की खबर ने सभी के जहन को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे का प्रथम दृष्टया जो कारण सामने आया है वह भीड़ का अत्याधिक दबाव ही है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार महाकुंभ के द्वितीय शाही स्नान के दौरान लगभग 8 से 10 लाख श्रद्धालुओं की भीड़ प्रयागराज में थी। महाकुंभ का दायरा भले ही 20 किलोमीटर तक फैला हो लेकिन 8—10 लाख की भीड़ के लिहाज से यह क्षेत्र पर्याप्त नहीं कहा जा सकता है जिसमें से आधे से अधिक क्षेत्रों पर संतों—महंतों और अखाड़ों के लिए आवासीय व्यवस्था की गई है। एक अन्य महत्वपूर्ण बात यह है कि सभी श्रद्धालुओं की अगर मंशा यह हो कि वह संगम तथा त्रिवेणी घाट जैसे घाटों पर ही अमृत स्नान करें तो कुछ खास स्थलों पर भीड़ का अत्यधिक बढ़ जाना अति स्वाभाविक है और हुआ भी वही जब अखाड़े के अमृत स्नान के लिए तय मार्गों पर बैरेक्टिंग तोड़कर श्रद्धालुओं की बेहिसाब भीड़ आगे बढ़ने लगी तो भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई भले ही इस भीड़ को नियंत्रित करने के लिए शासन—प्रशासन के स्तर पर कितने भी पुख्ता इंतजाम किए गए हो उनका कम पड़ जाना स्वाभाविक है। कहा जाता है कि भीड़ का मेकैनिज्म नहीं होता है कहीं से भी अगर एक धक्का दिया जाता है तो लोग गिरते चले जाते हैं और जब सब अपनी जान बचाने के लिए इधर—उधर भागने लगे तो उन्हें नियंत्रण में नहीं रखा जा सकता है। इस भगदड़ में कितने लोगों की जान गई है तथा कितने घायल हुए हैं और कितने लापता है या अपनों से बिछड़ गए हैं इसका पता लगाया जाना संभव नहीं है। फिर भी अगर स्थिति अब नियंत्रण में होने तथा घायलों को अस्पताल पहुंचाने और प्रतीकात्मक तौर पर अखाड़ों के शाही स्नान करने की व्यवस्था किए जाने की हो रही है तो यह संतोषप्रद बात है। इससे पूर्व तो खबर यह भी आई थी कि अमृत स्नान को अखाड़े ने स्थगित कर दिया है और अब वह बसंत पंचमी को ही स्नान करेंगे। शासन—प्रशासन पूरी मुस्तैदी के साथ व्यवस्थाओं को बनाने में जुटा है। प्रयागराज में भीड़ का दबाव कम करने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। प्रयागराज की ओर जाने वाले सभी हाईवे बंद कर दिए गए हैं। वहीं आसपास के जनपदों से आज स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं से भी अपील की जा रही है कि वह जहां भी हैं वहीं पुण्य स्नान कर ले तथा प्रयागराज नहीं आए। वहीं कुछ विशेष ट्रेनों की व्यवस्था प्रयागराज से लौटने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी की गई है पीएमओ से लेकर राज्य सरकार तक स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। इस भगदड़ में अब तक जन धन हानि की जो खबरें मिली है वह अत्यंत ही बड़े आयोजनों के दृष्टिकोण से न्यूनतम ही कहीं जा सकती हैं अब तक देखा गया है कि छोटे—छोटे आयोजनों में भी बहुत अधिक नुकसान हो जाता है अभी बीते दिनों भी प्रथम शाही स्नान से पूर्व भी महाकुंभ में आगजनी की घटना हुई थी लेकिन उसमें किसी तरह की कोई जनहानि नहीं हुई सिवाय कुछ झोपड़ियां के जलने के। इस अव्यवस्था को बहुत जल्द दुरुस्त कर लिया गया था। दो हादसों के बाद अब इस महाकुंभ में और भी अधिक सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर सतर्कता बढ़ाये जाने की जरूरत है। जिससे अब और कोई हादसा या अव्यवस्था का सामना न करना पड़े। किसी भी स्थिति में अत्यधिक भीड़ के दबाव को रोका जाना जरूरी है। आस्था के सैलाब को रोकना चुनौती जरूर है लेकिन एक दिन या समय विशेष में कितने श्रद्धालुओं की अधिकतम भीड़ जमा होनी चाहिए शासन—प्रशासन को इसकी पुख्ता व्यवस्था करनी ही होगी अन्यथा इस तरह के हादसो से बच पाना संभव नहीं है होगा।

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