July 4, 2026देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि) एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को आईडीपीएल ग्राउंड, ऋषिकेश में “सेवा पखवाड़ा” कार्यक्रम में देहरादून जनपद के विकास को नई गति प्रदान करते हुए ₹172.78 करोड़ लागत की 38 विकास योजनाओं का शिलान्यास तथा ₹46.50 करोड़ लागत की 13 योजनाओं का लोकार्पण किया। इस प्रकार उन्होंने कुल ₹219.29 करोड़ की 51 विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास कर जनपद को महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं की सौगात दी।₹ 61.87 लाख की जनपद देहरादून के विधानसभा क्षेत्र सहसपुर के अन्तर्गत ग्राम पंचायत भगवानपुर के अंतर्गत ललित मोहन भदोला के घर से भद्रकाली मन्दिर तक इन्टरलोकिंग टाईल्स द्वारा निर्माण कार्य।₹ 66.41 लाख की लागत से विधानसभा क्षेत्र मसूरी मोटर मार्ग के किमी 13 से मालसी सम्पर्क मार्ग में इन्टरलोकिंग टाईल्स द्वारा सतह सुधार का कार्य।₹ 132.52 लाख की लागत से विधानसभा क्षेत्र मसूरी दून विहार के आन्तरिक मार्गो का सुधारीकरण का कार्य।₹210.61 लाख की लागत से देहरादून के विलासपुर मुख्य मार्ग से विलासपुर एनक्लेव तक मार्ग का इन्टरलोकिंग टाईल्स द्वारा निर्माण कार्य ।₹ 181.74 लाख की लागत से वार्ड नं0-8 सालावाला के आन्तरिक मार्गों एवं नालियों का निर्माण एवं सुधारीकरण का कार्य।₹ 48.14 लाख की लागत से विधानसभा क्षेत्र सहसपुर के अन्तर्गत ग्राम डूंगा सुदामा के घर से बलवीर के घर तक इन्टरलोकिंग टाईल्स द्वारा निर्माण कार्य।₹541.28 लाख की लागत से विधानसभा क्षेत्र मसूरी में न्यू कैंट रोड में कि.मी. 1 चैनेज 0.35 सालावाला में 20 मीटर आर०सी०सी० गर्डर सेतु का निर्माण कार्य।₹ 536.10 लाख की लागत से विधानसभा क्षेत्र मसूरी में न्यू कैंट रोड कि की.मी 2 चैनेज 1.625 में 30 मीटर स्पान पी०एस०सी० गर्डर सेतु (दो लेन) का निर्माण कार्य।₹96.07 लाख की लागत से डोईवाला के वार्ड 99 में लक्ष्मीपुरम व प्रयाग एन्कलेव में इण्टरलॉकिग टाईल्स निर्माण का कार्य ।₹ 87.75 लाख की लागत से नकरौन्दा में नागेश्वर पुरम, चित्रा विहार आदि आन्तरिक मार्गो में इण्टरलॉकिग टाईल्स का निर्माण कार्य।₹ 775.77 लाख की लागत से विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत रायपुर मण्डल के अन्तर्गत 20 किमी0 आपदा से क्षतिग्रस्त मुख्य व आन्तरिक मार्गो का नालियों सहित पुनः निर्माण का कार्य (भाग-2)।₹ 611.54 लाख की लागत से धर्मपुर के अन्तर्गत वार्ड नं. 89 हरभजवाला में चन्द्रबनी से हरभजवाला तक आसन नदी की सफाई व दोनों ओर पुश्ता निर्माण(द्वितीय चरण)।₹ 246.14 लाख की लागत से रायपुर विधानसभा के अन्तर्गत गुर्जर बस्ती से ओएसिस स्कूल तक सौंग नदी पर चैनेलाईजेशन का कार्य।₹ 321.84 लाख की लागत से नगर निगम क्षेत्र के अन्तर्गत सुसवा नदी के दोनों तटो पर दूधा देवी पुल के अपस्ट्रीम में बाढ़ सुरक्षा योजना।₹ 412.70 की लागत से डोईवाला विधान सभा क्षेत्र में दुल्हनी नदी के विभिन्न स्थानों पर यथा लक्ष्मण सिद्ध कालोनी, नकरोन्दा रोड (विवेक विहार एवं वायु विहार) निर्मल कालोनी, वनस्थलीपुरम एवं दिल्ली फार्म में बाढ सुरक्षा योजना।₹ 460.45 लाख की लागत से रायपुर विकासखण्ड़ में डिफेन्स कॉलोनी एवं जोगीवाला बद्रीपुर में बहने वाले नाले में बाढ़ सुरक्षा कार्य।₹ 99.06 लाख की लागत से विकासखण्ड चकराता के अन्तर्गत ग्राम पंचायत मठियाणा के ग्राम सुनौडा में पाईप नहर निर्माण की योजना।₹ 79.78 लाख की लागत से जनजाति विकासखण्ड चकराता के अन्तर्गत दो नहरों (बानपुर एवं शेडिया) के जीर्णोद्धार की योजना।₹ 97.15 लाख की लागत से विकासखण्ड चकराता के ग्राम पंचायत दसऊ में दसऊ पाईप नहर एवं मुख्य टेंक से जल वितरण प्रणाली आफसूट निर्माण की योजना।₹ 238.34 लाख की लागत से विकासखण्ड विकासनगर में ढलानी नहर निर्माण की योजना₹ 480.64 लाख की लागत से विकासखण्ड सहसपुर में नून नदी के दांये -तट पर स्थित ग्राम दयानगर एंव जामुनवाला के खेल मैदान की बाढ़ सुरक्षा योजना₹ 186.28 की लागत से विधानसभा क्षेत्र कैंट के अन्तर्गत टौंस नदी के बांये तट पर स्थित स्वर्गआश्रम एंव गौशाला की सुरक्षा दीवार निर्माण की योजना।₹344.33 लाख की लागत से डोईवाला विकासखण्ड में छिद्रवाला नहर, खदरी एवं गुलरानी नहर के पुनरोद्धार की योजना।₹ 438.33 लाख की लागत से जनपद विकासखण्ड डोईवाला में बुल्लावाला नहर व हैड के पुनरोद्धार कार्य की योजना।₹ 207.82 लाख की लागत से विकासखण्ड डोईवाला में शमशेरगढ़ माईनर नानक एकेडमी माईनर मालीमौल्ला माईनर, घिसरपड़ी माईनर हर्रावाला माईनर के पुनरोद्धार कार्य की योजना।₹ 418.83 लाख की लागत से ग्राम विकासखण्ड डोईवाला में बुल्लावाला नहर के कमाण्ड क्षेत्र वाली नहरों की पुनरोद्धार की योजना।₹ 71.82 लाख की लागत से रिंग रोड़ नत्थनपुर, अलकनन्दा एन्कलेव विवेकानन्द ग्राम से राजेश्वरीपुरम् तक सिंचाई विभाग की पुरानी गूल का पुर्ननिर्माण / भूमिगत व मार्ग चौड़ीकरण का कार्य किया जायेगा ।₹ 422.53 लाख की लागत से रायपुर के अंतर्गत लोहे के पुल से सौंग पुल तक बाढ़ सुरक्षा कार्य का निर्माण।₹ 70.24 लाख की लागत से रायपुर विकास खण्ड में कालंगा गंगा नहर के के मध्य दुनाली के पास खुली नहर पर कवरिंग का कार्य।₹ 92.98 लाख की लागत से कांवली नहर की हरवंशवाला माइनर एवं गूलों के सुदृढ़ीकरण एवं आधुनिकीकरण का कार्य योजना ।₹ 21.04 लाख की लागत से ग्राम पंचायत खदरी खड़कमाफ, विकासखण्ड डोईवाला में निर्मित अमृत सरोवर को पर्यटन एवं वॉटर स्पोर्ट्स की दृष्टि से विकसित किये जाने सम्बन्धी कार्य₹ 250 लाख की लागत से उत्तराखण्ड औद्यानिक एकीकृत विकास सोसायटी के पी०एम०यू० कार्यालय भवन का निर्माण।₹ 33.05 लाख राजकीय प्राथमिक विद्यालय बद्रीपुर का पुर्ननिर्माण कार्य।₹ 489.04 लाख की लागत से ग्राम माजरी विकासखण्ड डोईवाला के अन्तर्गत निराश्रित गौवंश के संरक्षण हेतु गौशाला / शरणालय का निर्माण।₹ 190.59 लाख की लागत से ग्राम भोपालपानी विकासखण्ड रायपुर के अन्तर्गत निराश्रित गौवंश के संरक्षण हेतु गौशाला / शरणालय का निर्माण।₹ 5102 लाख की लागत से मसूरी डायवर्जन चौक, देहरादून से लाईब्रेरी चौक, मसूरी तक एल०ई०डी० स्ट्रीट लाईटिंग मय पोल्स का कार्य₹ 2750 लाख की लागत से आई०एस०बी०टी० देहरादून में निर्माण, सुदृढ़ीकरण एवं उच्चीकरण का कार्य₹ 499.50 लाख की लागत से मसूरी विधानसभा क्षेत्र के अन्तर्गत झडीपानी ट्रैक पर लैण्डसकेपिंग / सौन्दर्गीकरण का कार्य। लोकार्पण ₹ 60.65 लाख की लागत से जनपद देहरादून के विधानसभा क्षेत्र रायपुर में ग्राम पंचायत द्वारा के राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से कुण्ड घराट तक सम्पर्क मार्ग का निर्माण कार्य।₹ 62.77 लाख की लागत से विधान सभा क्षेत्र डोईवाला के वार्ड नं0 5 एवं ग्राम पंचायत रानीपोखरी में आन्तरिक मार्गो का इण्टरलॉकिंग टाईल्स द्वारा निर्माण कार्य।₹ 70.75 लाख की लागत से विधान सभा क्षेत्र डोईवाला में हरिद्वार मुख्य मार्ग के वैष्णौ माता मन्दिर से गढवाल बिस्कुट फैक्ट्री के गेट नं0-2 […]
July 4, 2026सीएम धामी के पांच साल बना देशभर में नंबर-1 पॉलिटिकल ट्रेंड देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार के पाँच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर सोशल मीडिया पर धामी के पांच साल देश का नंबर—1 पॉलिटिकल ट्रेंड बन गया। एक्स पर यह हैशटैग राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्थान पर पहुंचा, जो मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व, सरकार के कार्यों और जनता के व्यापक समर्थन को दर्शाता है।पिछले पाँच वर्षों में उत्तराखंड ने कई ऐसे ऐतिहासिक निर्णय देखे, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान बनाई। समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनने से लेकर सख्त नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून, सशक्त भू—कानून, मदरसा बोर्ड की समाप्ति तथा पारदर्शी भर्ती व्यवस्था जैसे निर्णयों ने उत्तराखंड को सुशासन का मॉडल बनाने की दिशा में नई मिसाल पेश की।इसी अवधि में प्रदेश में चारधाम यात्रा, पर्यटन, सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी, निवेश, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, सीमांत विकास तथा बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई। पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से हजारों युवाओं को सरकारी सेवाओं में अवसर मिले, जबकि मातृशक्ति, किसानों, सैनिकों और गरीब कल्याण से जुड़ी अनेक योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया गया।सोशल मीडिया पर `धामी के पांच सााल, के नंबर—1 ट्रेंड बनने को राजनीतिक विश्लेषक केवल डिजिटल अभियान नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और सहभागिता का प्रतीक मान रहे हैं। हजारों लोगों ने पोस्ट, वीडियो, ग्राफिक्स और संदेशों के माध्यम से मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में हुए विकास कार्यों को साझा किया।धामी के पांच साल का राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष ट्रेंड बनना इस बात का संकेत है कि उत्तराखंड की विकास यात्रा और सुशासन की चर्चा अब केवल प्रदेश तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश में एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में देखी जा रही है।
July 4, 2026देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज आईडीपीएल ग्राउंड, ऋषिकेश में आयोजित सेवा, सुशासन एवं समर्पणः जन—जन की सरकार, जन—जन के द्वार’ सेवा पखवाड़ा कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए प्रदेशवासियों को संबोधित किया।इस अवसर पर राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने देहरादून जनपद की 219 करोड़ रूपये से अधिक लागत की 51 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) ने कहा कि यह अभियान लोकसेवा, सुशासन और जनकल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक सफलता तभी है, जब शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े प्रत्येक नागरिक तक सम्मान, संवेदनशीलता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ पहुँचे। राज्यपाल ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री के रूप में पांच वर्ष से अधिक समय तक दायित्व निभाने की उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।राज्यपाल ने कहा कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने वाला उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य बना, जिसने समानता, न्याय और सामाजिक समरसता की भावना को सुदृढ़ किया है। उन्होंने कहा कि युवाओं के हितों की रक्षा के लिए सशक्त नकल विरोधी कानून, जबरन धर्मांतरण और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी प्रावधान तथा प्रभावी भू—कानून जैसे निर्णय जनहित और सुशासन के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। उन्होंने महिलाओं को सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत क्ष्ौतिज आरक्षण, स्वयं सहायता समूहों के सशक्तीकरण तथा ट्टलखपति दीदी’ जैसी योजनाओं को महिला सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। राज्यपाल ने कहा कि केदारनाथ एवं बदरीनाथ धाम के पुनर्विकास कार्य, पर्यटन और होमस्टे योजना के विस्तार, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, जी—20 बैठकों, राष्ट्रीय खेलों तथा आधारभूत संरचना परियोजनाओं ने उत्तराखण्ड को विकास और निवेश के नए केंद्र के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने युवाओं से स्टार्टअप और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे नवाचार आधारित क्षेत्रों में आगे बढ़ने का आह्वान किया।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज से पांच वर्ष पूर्व उन्हें देवभूमि उत्तराखण्ड की सेवा का अवसर प्राप्त हुआ था और यह यात्रा जनसेवा, सुशासन एवं समर्पण की भावना के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2035 तक उत्तराखण्ड को विकसित एवं श्रेष्ठ राज्य बनाना है। इसी उद्देश्य से प्रदेश में आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, कृषि, पर्यटन, उघोग, निवेश, स्वरोजगार एवं सीमांत क्षेत्रों के विकास पर विशेष बल दिया जा रहा है।
July 4, 2026भाजपा और कांग्रेस में शह-मात का खेल अभी से हुआ शुरू तीसरे विकल्प की तलाश में छटपटाती देवभूमि की राजनीति दिल्ली दूर, गांवों व बूथों से तय होगा उत्तराखंड का महासमर देहरादून। प्रदेश की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी है। सत्ता की राह दिल्ली से नहीं, बल्कि गांवों, बूथों और कार्यकर्ताओं के मन से होकर गुजरती है। 2027 की चुनावी शतरंज में मोहरे सजने शुरू हो गए हैं, लेकिन बाजी कौन जीतेगा, इसका फैसला आने वाले महीनों में कार्यकर्ताओं के मूड और जनता के मन से तय होगा। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव-2027 अभी समय है, लेकिन प्रदेश की राजनीति पूरी तरह चुनावी मोड में आ चुकी है। सत्तारूढ़ भाजपा तीसरी बार लगातार सत्ता में लौटने का इतिहास रचने की तैयारी में है, तो कांग्रेस एक बार फिर सत्ता विरोधी माहौल को भुनाने की रणनीति बना रही है। वहीं, क्षेत्रीय दल और नए राजनीतिक विकल्प भी अपने लिए जमीन तलाश रहे हैं। इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रदेश का राजनीतिक समीकरण किस करवट बैठेगा और कार्यकर्ताओं का मूड क्या कह रहा है?प्रदेश में भाजपा की सबसे बड़ी ताकत उसका मजबूत संगठन और बूथ स्तर तक फैला नेटवर्क है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार विकास, समान नागरिक संहिता, निवेश और बुनियादी ढांचे के मुद्दों को चुनावी नैरेटिव बनाने की तैयारी में है। लेकिन पार्टी के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। कई विधायकों की सार्वजनिक नाराजगी, नौकरशाही के बढ़ते प्रभाव को लेकर असंतोष और टिकट कटने की आशंकाओं ने संगठन के भीतर बेचौनी पैदा कर दी है। भाजपा के कार्यकर्ताओं का एक वर्ग यह मानता है कि सरकार की योजनाएं जनता तक पहुंची हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को अपेक्षित महत्व नहीं मिल पाया है। पार्टी के अंदर यह चर्चा भी तेज है कि 2027 में बड़े पैमाने पर टिकट परिवर्तन हो सकता है। ऐसे में कई मौजूदा विधायक और दावेदार अपने-अपने क्षेत्रों में राजनीतिक ताकत दिखाने में जुट गए हैं।कांग्रेस के लिए 2027 सत्ता में वापसी का बड़ा अवसर माना जा रहा है। पार्टी सत्ता विरोधी रुझान, बेरोजगारी, महंगाई, पलायन और स्थानीय मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। लेकिन कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती उसकी आंतरिक गुटबाजी और नेतृत्व का सवाल है। पार्टी के कार्यकर्ता यह मानते हैं कि यदि समय रहते संगठनात्मक एकजुटता नहीं दिखाई गई तो भाजपा के खिलाफ माहौल बनने के बावजूद चुनावी लाभ उठाना मुश्किल होगा। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में उत्साह जरूर है, लेकिन वह स्पष्ट रणनीति और मजबूत नेतृत्व का इंतजार भी कर रहे हैं। पार्टी की चुनावी संभावनाएं काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेंगी कि वह अपने भीतर के मतभेदों को कितना नियंत्रित कर पाती है।उत्तराखंड क्रांति दल एक बार फिर क्षेत्रीय अस्मिता, मूल निवास, भू-कानून और पलायन जैसे मुद्दों को लेकर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि संगठनात्मक कमजोरी और सीमित जनाधार उसके सामने बड़ी चुनौती हैं। फिर भी यदि राज्य में त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बनती है, तो कुछ सीटों पर क्षेत्रीय दलों की भूमिका निर्णायक हो सकती है। राजनीतिक दलों की रणनीति का केंद्र इस बार युवा मतदाता हैं। रोजगार, स्वरोजगार, शिक्षा और तकनीकी अवसरों के मुद्दे युवाओं के बीच सबसे अधिक चर्चा में हैं। महिला मतदाताओं के बीच सरकारी योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का असर देखने को मिल सकता है, जबकि पहाड़ से पलायन कर चुके मतदाताओं को भी चुनावी विमर्श में शामिल करने की कोशिशें शुरू हो गई हैं।जमीनी स्तर पर भाजपा कार्यकर्ताओं में सरकार की उपलब्धियों को लेकर आत्मविश्वास है, लेकिन स्थानीय नेतृत्व और संगठनात्मक समन्वय को लेकर कुछ असंतोष भी दिखाई देता है। दूसरी ओर कांग्रेस कार्यकर्ता भाजपा विरोधी माहौल की उम्मीद में हैं, लेकिन वह यह भी मानते हैं कि केवल सरकार विरोधी भावनाओं के भरोसे चुनाव नहीं जीता जा सकता। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि 2027 का चुनाव केवल नेताओं का नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं की ऊर्जा और संगठनात्मक प्रबंधन का चुनाव होगा। जिस दल का कार्यकर्ता सबसे अधिक सक्रिय और संतुष्ट होगा, वही चुनावी बढ़त हासिल कर सकता है।
July 4, 2026तमंचा, कारतूस, नगदी, गौ मांस व बाइक बरामद गौकशी और पुलिस पार्टी पर फायरिंग की घटना में चल रहा था फरार गौकशी मामले में पहले भी जा चुका है जेल उधमसिंहनगर। गौकशी व पुलिस पार्टी पर फायरिंग मामले में फरार चल रहे आरोपी को एसओजी व पुलिस टीम ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के पैर में गोली लगी है जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आरोपी के कब्जे से पुलिस ने तमंचा, कारतूस, गौमांस व बाइक बरामद की है। हालांकि मुठभेड़ के दौरान गौ तस्कर का एक साथी फरार होने मेंं सफल रहा जिसकी तलाश जारी है।जानकारी के अनुसार बीती रात एसओजी व थाना गदरपुर पुलिस को सूचना मिली कि गदरपुर क्षेत्र में पूर्व में गोकशी कर पुलिस टीम पर फायरिंग करने वाला फरार आरोपी मोईन पुत्र यामीन निवासी चक्कर की मिलक, मुरादाबाद, उ.प्र. अपने किसी अन्य साथी के साथ स्वार (रामपुर) के रास्ते बाजपुर में गोमांस की तस्करी करने की फिराक में है। सूचना पर त्वरित कार्यवाही करते हुए एसओजी व थाना गदरपुर पुलिस ने बाजपुर क्षेत्र के कनौरा तिराहे (राष्ट्रीय राजमार्ग 74) पर चेकिंग शुरू की। इस दौरान स्वार की ओर से आ रही एक संदिग्ध मोटरसाइकिल को जब पुलिस ने रोकने का इशारा किया, तो चालक ने पुलिस टीम को देखकर मोटरसाइकिल तेज गति से बाजपुर की ओर भगा ली।पुलिस टीम द्वारा पीछा करने पर आरोपियों की मोटरसाइकिल अनियंत्रित होकर आम के बाग की तरफ गिर गई। अपने आप को घिरा देख आरोपियों ने जान से मारने की नीयत से पुलिस टीम पर सीधे फायरिंग झोंक दी। पुलिस टीम ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए आत्मरक्षार्थ जवाबी फायरिंग की, जिसमें मुख्य आरोपी मोईन के बाएं पैर में गोली लगी और वह वहीं गिर गया, जबकि उसका साथी अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया। घायल आरोपी मोईन को तत्काल प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल भेजा गया। जिसके कब्जे से एक तमंचा, तीन जिन्दा व दो खोखा कारतूस, करीब 17 किलो गौमांस व घटना में प्रयुक्त बाइक बरामद की गयी है। पुलिस अब फरार आरोपी की तलाश में दबिश देने में जुट गयी है।
July 4, 2026जब कोई श्रद्धालु मंदिर की दानपेटी में एक रुपया डालता है, तो वह केवल एक सिक्का नहीं चढ़ाता, बल्कि अपने विश्वास, अपनी उम्मीद और अपने ईश्वर के प्रति समर्पण को अर्पित करता है। मंदिरों में चढ़ने वाला चढ़ावा धन का विषय कम और आस्था का विषय अधिक होता है। इसलिए जब किसी मंदिर का दानपात्र तोड़ा जाता है, चढ़ावे की चोरी होती है या धार्मिक संपत्तियों पर हाथ साफ किया जाता है, तब केवल रुपये-पैसे की चोरी नहीं होती, बल्कि समाज की सामूहिक आस्था भी घायल होती है। अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बनना देश की सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण का प्रतीक है। करोड़ों लोगों ने इसे अपनी सदियों पुरानी आस्था की जीत माना। लेकिन इस ऐतिहासिक क्षण के साथ एक बड़ी जिम्मेदारी भी जुड़ी है क्या हम अपने मंदिरों की पवित्रता, संपदा और सुरक्षा को लेकर भी उतने ही सजग हैं, जितने उनके निर्माण को लेकर रहे हैं? देवभूमि उत्तराखंड इस प्रश्न के केंद्र में खड़ा दिखाई देता है। यहां के चारधाम बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्रीकृकेवल मंदिर नहीं, बल्कि सनातन आस्था के जीवंत तीर्थ हैं। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु हजारों किलोमीटर की यात्रा तय कर इन धामों में पहुंचते हैं। कोई अपनी मनोकामना लेकर आता है, कोई कृतज्ञता व्यक्त करने और कोई आत्मिक शांति की तलाश में। उनके द्वारा चढ़ाया गया दान उस अटूट विश्वास का प्रतीक है, जो पीढ़ियों से भारतीय समाज को जोड़ता आया है। विडंबना यह है कि इसी आस्था पर समय-समय पर अपराधियों की नजर पड़ती रही है। मंदिरों में चढ़ावे की चोरी की घटनाएं यह बताती हैं कि हमारी धार्मिक संस्थाओं की सुरक्षा व्यवस्था अभी भी कई स्थानों पर कमजोर है। यह प्रश्न केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता का भी है। आखिर ऐसा क्यों हो कि जिन स्थलों को लोग ईश्वर का धाम मानते हैं, वह अपराधियों के लिए आसान निशाना बन जाएं? आज आवश्यकता केवल मंदिरों की भव्यता बढ़ाने की नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा को भी उतनी ही प्राथमिकता देने की है। दानपात्रों की निगरानी, सीसीटीवी व्यवस्था, डिजिटल लेखा-जोखा, पारदर्शी प्रबंधन और स्थानीय समुदाय की भागीदारी को मजबूत करना समय की मांग है। मंदिरों की सुरक्षा को एक व्यापक सांस्कृतिक दायित्व के रूप में देखना होगा। आस्था की रक्षा केवल कानून नहीं कर सकता। इसके लिए समाज को भी प्रहरी बनना होगा। मंदिरों की घंटियां तभी तक पवित्रता का संदेश देंगी, जब तक उनमें समर्पित विश्वास सुरक्षित रहेगा। यदि श्रद्धालु यह महसूस करने लगें कि उनका अर्पण भी सुरक्षित नहीं है, तो यह केवल मंदिरों की नहीं, समाज के नैतिक ताने-बाने की भी क्षति होगी। राम मंदिर का निर्माण हमें यह संदेश देता है कि आस्था केवल पूजा का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना का आधार है। इसलिए देश के हर मंदिर, हर तीर्थ और हर दानपात्र की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। क्योंकि जहां विश्वास सुरक्षित रहता है, वहीं संस्कृति जीवित रहती है और जहां आस्था पर चोट होती है, वहां समाज की आत्मा भी कहीं न कहीं आहत हो जाती है।