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मृत साबित हुई ‘संजीवनी’

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  • नहीं काम आ सकी एयर एंबुलेंस संजीवनी
  • अल्मोड़ा से घायलों को एयरलिफ्ट में लगे 10 घंटे
  • स्वास्थ्य सेवाएं भी सिर्फ प्रचार का माध्यम बनी

देहरादून। एक सप्ताह पूर्व 29 अक्टूबर को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड राज्य को जो सौगात एयर एंबुलेंस के रूप में दी गई जिसे संजीवनी का नाम दिया गया था और इसके उद्घाटन के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुशी जताते हुए पीएम मोदी का आभार जताया तथा प्रदेश के लोगों के लिए आपदा की घड़ी में जिसे संजीवनी साबित होने का दावा किया गया था वह संजीवनी कल अल्मोड़ा में हुए बड़े सड़क हादसे के समय अपनी पहली टेस्टिंग में ही मृत साबित हुई है।
अल्मोड़ा के सल्ट क्षेत्र में जब बस दुर्घटना के घायलों को इस संजीवनी सेवा की जरूरत थी और लोग तड़प—तड़प कर दम तोड़ रहे थे, यह हेली एंबुलेंस सेवा अपनी सर्विस नहीं दे सकी। बताया जा रहा है कि तकनीकी दिक्कतों के कारण संजीवनी की सेवाएं नहीं मिल सकी। सवाल यह है कि अगर यह हेली एम्बुलेंस इतनी खस्ता हाल है तो इसके प्रचार का इतना ढोल पीटना क्या जरूरी था?
उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य है जहां हेली एंबुलेंस सेवा प्रदान की गई। अब कोई भी मरीज मिनटो में अस्पताल लाया जा सकेगा कम से कम समय पर इलाज न मिलने पर कोई नहीं मरेगा जैसे सभी दावों की कलई पहले ही टेस्टिंग में खुल गई है।


घायलों को पहले रामनगर ले जाया गया जो दुर्घटना स्थल से लगभग 45 किलोमीटर दूर था। जहां इलाज की समुचित व्यवस्था न होने से आठ लोगों ने दम तोड़ दिया अगर संजीवनी सेवा मिली होती तथा एनडीआरएफ दुर्घटना स्थल से सीधा घायलों को हल्द्वानी या ऋषिकेश एम्स ला पाती तो शायद कुछ लोगों की जान बच गई होती। लेकिन इन्हें 45 किलोमीटर दूर पहले रामनगर सड़क मार्ग से लाया गया और एम्स तक लाने में शाम के 4.20 बज गए। जबकि हादसा सुबह 7.40 पर हुआ था। यहां पर एनडीआरएफ और एसडीआरएफ जैसी संस्थाओं पर भी उंगली उठ रही है कि वे दुर्घटनास्थल के आसपास टैम्परेरी हैलीपेठ बनाने में अस्मर्थ क्यों रहे।
2020 में पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एम्स में हेलीपैड का उद्घाटन करते हुए फोटो खिंचवाई थी। 29 अक्टूबर को सीएम धामी को एयर एम्बुलेंस के साथ फोटो खिंचवाने का दोबारा मौका मिल गया। सवाल यह है कि इस फोटो सैशन और प्रचार का सूबे की आम जनता को क्या फायदा हुआ है इससे तो अच्छा होता कि राज्य को यह संजीवनी सेवा मिलती ही नहीं। ठीक वैसी ही स्थिति दिल्ली—पिथौरागढ़ हवाई सेवा की है जो अब तक कई बार शुरू हो चुकी है लेकिन अभी भी ठप है। स्वास्थ्य सेवाओं के साथ अगर यह एक बड़ा मजाक नहीं तो और क्या है।

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