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पर्यटन प्रोत्साहन नीति

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बीते कल राज्य कैबिनेट की बैठक में 32 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई इन प्रस्तावों में पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा नगर पालिकाओं को नगर निगम के रूप में उच्चकृत किए जाने से लेकर हरिद्वार के भगवानपुर में मुख्य मंडी बनाए जाने सहित तमाम महत्वपूर्ण फैसले शामिल थे। लेकिन इस बैठक में जो सबसे अहम फैसला लिया गया वह था उत्तराखंड पर्यटन उघमी प्रोत्साहन योजना 2024 को मंजूरी दिया जाना। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में पर्यटन विकास के लिए विशेष को आकर्षित करना है। उत्तराखंड राज्य गठन को 22 साल हो चुके हैं जब राज्य का गठन हुआ था उस समय से लेकर आज तक इस मुद्दे पर लगातार बहस होती रही है कि उत्तराखंड के विकास का प्रमुख आधार क्या हो सकता है। राज्य की पहली निर्वाचित कांग्रेस सरकार के मुखिया पंडित नारायण दत्त तिवारी ने उत्तराखंड राज्य में भले ही संसाधनों की प्रचुर मात्रा में उपलब्धता और अनुकूल परिस्थितियों के मद्देनजर राज्य को ऊर्जा प्रदेश के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई थी उन्होंने उसे समय में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री को बुलाकर दर्जन भर से अधिक बड़ी जल विघुत परियोजनाओं का शिलान्यास कराया गया था। राज्य गठन के साथ केंद्र सरकार द्वारा राज्य के औघोगिक विकास के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की व्यवस्था भी की गई थी। सिडकुल और पिडकुल के माध्यम से राज्य में तमाम नामी गिरामी और बड़े उघोग तथा छोटे उघोगों का अच्छा खासा रुझान देखा गया था। राज्य में मिलने वाले औघोगिक पैकेज के तहत उघमियों को तमाम तरह की छूट और सब्सिडी दी जा रही है। जिसका लाभ लेने के लिए उघमियों की लंबी कतार लगी हुई थी। सरकार ने इन उघोगों में राज्य के बेरोजगारी की समस्या का समाधान भी खोजा जा रहा था। क्षेत्रीय युवाओं को 70 फीसदी रोजगार देने की शर्त को भी जोड़ा गया था। लेकिन इसका नतीजा ढाक के तीन पात ही रहां। जब तक पैकेज का लाभ मिला उघोग आते रहे और पैकेज का लाभ समाप्त होते ही वह भी अपना बोरिया बिस्तर समेट कर चलते बने। इन उघोगों में 70 फीसदी रोजगार देने के नियम का भी कोई पालन नहीं हुआ। बीते एक दशक से राज्य को भाजपा की केंद्र और प्रदेश सरकार के नेतृत्व में पर्यटन प्रदेश के रूप में विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। चार धाम ऑल वेदर रोड के निर्माण से शुरू हुई इस यात्रा में अब तक मानस मंदिर माला की तरह तमाम तरह के आयाम जुडते जा रहे हैं जिसे आप धार्मिक पर्यटन विकास का नाम दे सकते हैं। इसके विकास के लिए जो काम हो रहे हैं उसमें 900 किलोमीटर की लंबी चार धाम ऑल वेदर रोड ही नहीं रोपवे निर्माण और होमस्टे जैसी तमाम योजनाओं के साथ—साथ साहसिक पर्यटन को भी शामिल किया गया है। जिसके लिए सरकार द्वारा निवेशकर्ताओं को बड़ी सहूलियतों व सब्सिडी के रूप में कई अन्य लाभ दिए जा रहे हैं। सरकार ने कल जिस पर्यटन निवेश नीति को मंजूरी दी है उसमें भी निवेश को 80 लाख से लेकर अधिकतम 1.5 करोड रुपए सब्सिडी देने का प्रावधान किया गया है इसके साथ ही निवेशकों के लिए स्थानीय युवाओं का 70 फीसदी रोजगार देने की शर्त को जोड़ा गया है। देखना होगा कि सरकार की यह नई नीति कितने युवाओं को रोजगार दिला पाती है और पहाड़ से पलायन रोकने में कितना सफल हो पाती है? तथा राज्य के पर्यटन विकास को कितनी ऊंचाइयों तक ले जाती है। बीते 23 सालों में सरकार के स्तर पर जितने भी प्रयास किए गए उनका तजुर्बा तो कोई खास उत्साह जनक नहीं रहा है। उम्मीद की जानी चाहिए कि इसका लाभ राज्य के लोगों के साथ निवेशकों को भी मिल सकेगा

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