पर्यटन पर भारी पड़ रहा है अंकिता मर्डर केस : होटलों व रिजार्टस् की 55 फीसदी बुकिंग कैंसिल

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मालिकों को कार्यवाही का भय सता रहा है
पर्यटक भी यात्रा में असुविधा से सहमें

देहरादून। अंकिता मर्डर केस के बाद राज्य के होटल और रेस्टोरेंट, होमस्टे और रिजार्ट के खिलाफ शासन के आदेश पर चलाए जा रहे जांच अभियान का असर अब राज्य के पर्यटन पर भी पड़ने लगा है। अंकिता मर्डर केस के बाद बीते 2 दिनों में राज्य के होटल और रिजार्ट में 55 फीसदी से अधिक बुकिंग कैंसिल की जा चुकी है।
उल्लेखनीय है अभी सांध्य दैनिक दून वैली मेल ने 20 सितंबर के अंक में अंकिता मर्डर केस पर्यटन को बड़ा झटका प्रकाशित किया गया था जिसकी अब इस खबर से पुष्टि हो चुकी है। अंकिता मर्डर केस में चर्चाओं में आए ऋषिकेश के वनंत्रा रिजॉर्ट के बाद सरकार ने राज्य के सभी जिला अधिकारियों को होटल और रिजार्ट की जांच के आदेश देते हुए कहा था कि नियम विरुद्ध बने होटल और रिजॉर्ट के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
राज्य में होटल और रिजॉर्ट के खिलाफ बीते 5 दिनों से जो जांच अभियान चलाया जा रहा है उसे लेकर होटल और रिजार्ट मालिकों में हड़कंप मचा हुआ है। अब तक सैकड़ों होटल और रिजॉर्ट सील किए जा चुके हैं। जिनमें अनियमितताएं पाई गई थी। होटल और रिजार्ट स्वामियों को अब इस बात का डर सता रहा है कि कहीं उन पर भी कोई कार्यवाही न हो जाए? ऐसी स्थिति में वह किसी की भी बुकिंग लेने से बच रहे हैं और पर्यटक जो एडवांस बुकिंग करा चुके हैं वह भी अपनी बुकिंग कैंसिल करा रहे हैं उन्हें भी अपनी यात्रा के दौरान असुविधा का डर सता रहा है। राज्य के होटल और रेस्टोरेंट तथा रिजार्ट से बीते 2 दिनों में 55 फीसदी से अधिक बुकिंग कैंसिल हो चुकी है। यहां यह उल्लेखनीय है कि राज्य में 90 फीसदी होटल और रिजार्ट ऐसे हैं जो नियम कानूनों के अनुसार नहीं बने हैं या फिर तय मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं। लेकिन इन पर कभी किसी भी सरकार द्वारा ध्यान नहीं दिया गया।
शासन के आदेश के बाद नगर मजिस्ट्रेट हरिद्वार द्वारा जो जांच अभियान चलाया जा रहा है वह तो अलग है ही। उन्होंने सभी होटल रिजॉर्ट और रेस्टोरेंट स्वामियों को एक नोटिस जारी कर 1 अक्टूबर तक अपने पुरानी कचहरी देवपुरा स्थित कार्यालय आकर प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। सवाल यह है कि इन प्रमाण पत्रों में भू स्वामित्व, मानचित्र स्वीकृति, होटल रिजार्ट पंजीकरण, अग्निशम, खाघ सुरक्षा प्रमाणपत्र से लेकर कचरा निस्तारण संबंधी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने को कहा गया है। होटल व रेस्टोरेंट व्यवसाई इतने सारे प्रमाण पत्र और अनापत्ति पत्र कहां से लाएंगे? इसे लेकर परेशान हैं। जब सब कुछ अनियमित तरीके से हो रहा है तो उसे नियमित ढंग से तरीके में लाना बहुत मुश्किल काम है। लेकिन जो भी हो रहा है इससे पर्यटन को एक बड़ा नुकसान जरूर हो रहा है।

धर्मशालाओं, आश्रमों व मठों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
हरिद्वार। नगर मजिस्ट्रेट द्वारा हरिद्वार में होटल और रेस्टोरेंट के खिलाफ तो कार्रवाई की ही जा रही है लेकिन धर्मनगरी हरिद्वार में बनी सैकड़ों धर्मशालाओं और आश्रमों तथा मठों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है इसे लेकर होटल स्वामियों में भारी आक्रोश है उनका कहना है कि अधिकांश धर्मशालाएं होटलों में तब्दील हो चुकी हैं अनेक आश्रम अतिक्रमण कर सरकारी जमीनों पर बने हैं और उनमें भी वही सब काम हो रहे हैं जो होटलों और रेस्टोरेंटों में होते हैं। वह भी किराया लेकर लोगों को ठहराते हैं। सबसे अधिक गंदगी और प्रदूषण फैलाते हैं सिर्फ होटलों के खिलाफ जांच के नाम पर की जाने वाली कार्यवाही क्या उचित है क्या इनके खिलाफ कार्रवाई जांच नहीं होनी चाहिए।

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