August 18, 2026पौड़ी। नाबालिग बेटियों के साथ लम्बे समय से दुष्कर्म करने वाले कलयुगी पिता को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जिसे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है।जानकारी के अनुसार कोटद्वार निवासी एक महिला द्वारा कोतवाली कोटद्वार में एक शिकायती पत्र देकर बताया गया कि उसके पति द्वारा अपनी नाबालिग पुत्रियों के साथ पिछले कई समय से दुष्कर्म एवं यौन शोषण किया जा रहा था, साथ ही इसके संबंध में किसी को जानकारी देने अथवा पुलिस में शिकायत करने पर जान से मारने तथा घर से निकाल देने की धमकी दी जाती थी। मामले की गम्भीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल पोक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गयी। प्रकरण की प्रारम्भिक जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि पति—पत्नी के मध्य पारिवारिक विवाद चल रहा था। ऐसे में शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता एवं सत्यता का निष्पक्ष रूप से जांच करना, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि प्रकरण में कहीं आपसी आरोप—प्रत्यारोप अथवा पारिवारिक विवाद के चलते लगाए गए आरोप तो नहीं हैं। प्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने जांच की। जांच के दौरान पीड़िता के बयान नियमानुसार दर्ज किए गए तथा घटनाक्रम से संबंधित विभिन्न पहलुओं की गहन जांच कर प्रकरण में उपलब्ध साक्ष्यों का संकलन किया गया। साथ ही प्रकरण में पुलिस टीम द्वारा आरोपी से पूछताछ एवं जानकारी की गई। प्रारम्भ में आरोपी द्वारा विभिन्न प्रकार के बहाने बनाकर तथ्यों को छिपाने का प्रयास किया गया, किंतु आवश्यक साक्ष्य संकलन, पीड़िता के बयानों व आवश्यक कार्यवाही के पश्चात आरोपी द्वारा किए गए अपराध को स्वीकार किया गया। जिस पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जहंा से उसे जेल भेज दिया गया है। गिरफ्तार आरोपी का नाम अनुप चंद्र, निवासी कोटद्वार बताया जा रहा है।
August 18, 2026सब्सिडी की फाइल बढ़ाने पर मांगी गयी थी 10 हजार रूपये की रिश्वत हरिद्वार। कृषि यंत्र खरीदने के लिए मिलने वाली सब्सिडी की फाइल आगे बढ़ाने के एवज में 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगना सहायक कृषि अधिकारी को भारी पड़ गया। सतर्कता अधिष्ठान की ट्रैप टीम ने आरोपी अधिकारी को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है।शिकायतकर्ता ने सतर्कता अधिष्ठान में शिकायत की थी कि उसके भाई को कृषि यंत्र खरीदने के लिए मिलने वाली सब्सिडी की फाइल आगे बढ़ाने के बदले रिश्वत की मांग की जा रही है। शिकायत के सत्यापन के बाद सतर्कता टीम ने ट्रैप की कार्रवाई की। 18 अगस्त को टीम ने हरिओम यादव पुत्र स्व. लाल सिंह, निवासी प्रतापनगर, नजीबाबाद रोड, कोटद्वार, पौड़ी गढ़वाल, हाल सहायक कृषि अधिकारी, विकासखंड खानपुर, जिला हरिद्वार को शिकायतकर्ता से 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। सतर्कता अधिष्ठान की टीम आरोपी से पूछताछ के साथ मामले में आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।बता दें कि उत्तराखण्ड राज्य में रिश्वतखोरी व भ्रष्टाचार के मामले लगातार सामने आ रहे है। हालांकि सर्तकता अधिष्ठान ऐसे लोगों पर लगातार कार्यवाही कर रहा है। लेकिन फिर भी यह मामले थमने का नाम नहीं ले रहे है। बीते एक वर्ष के दौरान कई विभागों के अधिकारी व कर्मचारी रिश्वतखोरी के मामले में जेल की हवा खा चुके है।
August 18, 2026हरिद्वार। धनौरी क्षेत्र में बावनदर्रा पुल के बीचोंबीच एक विशालकाय मगरमच्छ के सड़क पर आ जाने से राहगीरों में हड़कंप मच गया। सड़क पर मगरमच्छ को देखकर राहगीरों के होश उड़ गए। इस दौरान किसी राहगीर ने मगरमच्छ का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।पिरान कलियर में दरगाह साबिर पाक का सालाना उर्स चल रहा है। उर्स में शामिल होने के लिए देश के कोने—कोने से जायरीन दिन—रात पिरान कलियर पहुंच रहे हैं। ऐसे में व्यस्त मार्ग पर विशालकाय मगरमच्छ के आ जाने से किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, मेहवड़ और धनौरी के बीच पुरानी गंगनहर से कई बार मगरमच्छ बाहर निकलकर सड़क तक पहुंच जाते हैं। इससे राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। रात के समय सड़क पर मगरमच्छ दिखाई न देने से हादसे का खतरा और बढ़ जाता है। उर्स के चलते इस मार्ग पर जायरीनों और वाहनों की आवाजाही लगातार बढ़ी हुई है। ऐसे में लोगों ने वन विभाग से सड़क और आबादी के आसपास दिखाई देने वाले मगरमच्छों को सुरक्षित तरीके से पकड़कर गंगनहर से दूर सुरक्षित स्थान पर छोड़ने की मांग की है। लोगों का कहना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो उर्स के दौरान किसी जायरीन के साथ गंभीर हादसा हो सकता है। स्थानीय लोगों ने वन विभाग से गश्त बढ़ाने और मगरमच्छों की आवाजाही वाले संवेदनशील स्थानों को चिह्नित कर प्रभावी कार्रवाई करने की मांग की है।
August 18, 2026हरिद्वार। नहर किनारे गला कटा हुआ शव मिलने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। सूचना मिलने पर पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मृतक की शिनाख्त के प्रयास शुरू कर दिये है।मामला मंगलौर कोतवाली क्षेत्र का है। यहंा नहर किनारे एक व्यक्ति का गला कटा शव बरामद होने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। सूचना मिलते ही मंगलौर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर अग्रिम कार्यवाही शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि मृतक की पहचान नहीं हो पायी है जिसकी शिनाख्त के प्रयास पुलिस ने शुरू कर दिये है। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आसपास के क्षेत्र में भी जानकारी जुटाई तथा घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र किए। जानकारी मिलने पर एसपी देहात शेखर चंद सुयाल भी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण कर पुलिस अधिकारियों से मामले की जानकारी ली। उन्होंने पुलिस टीम को घटना के सभी पहलुओं की गहनता से जांच करने के निर्देश दिए। एसपी देहात ने बताया कि फिलहाल शव की शिनाख्त के प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस मामले की जांच में जुटी है और जल्द ही घटना का खुलासा किया जाएगा। घटना को लेकर पुलिस आसपास के लोगों से भी पूछताछ कर रही है।
August 18, 2026पौड़ी। सतपुली तहसील में भारी बारिश के कारण एक बड़ा हादसा हो गया। द्वारीखाल ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम मेहरगांव (भलगांव) में एक मकान पर भारी मात्रा में मलबा गिरने से पूरा मकान धराशाई हो गया। मलबे में चार लोगों के दबे होने की सूचना मिलते ही प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीम सक्रिय हो गई है।स्थानीय निवासियों के अनुसार, रात भर की लगातार बारिश के बाद सुबह के समय पहाड़ी ढलान से बड़ी मात्रा में मिटृी, पत्थर और मलबा फिसलकर मकान पर आ गिरा। जिस कारण मकान पूरी तरह ढह गया और उसके नीचे रहने वाले लोग मलबे में दब गए। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस मकान में एक मैक्स चालक अपने परिवार के साथ रहता था। घटना की खबर फैलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया। सतपुली और लैंसडौन से एसडीआरएफ की टीम तथा प्रशासनिक अधिकारी तुरंत मौके के लिए रवाना हो गए हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है और मलबे में दबे लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिशें जारी हैं। मौसम विभाग के अनुसार क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से भारी से बहुत भारी बारिश हो रही है, जिससे कई जगहों पर भूस्खलन और मकानों के क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं सामने आ रही हैं।जिला प्रशासन ने सतपुली तहसील के संवेदनशील क्षेत्रों में अलर्ट जारी कर रखा है। एसडीआरएफ, स्थानीय पुलिस और राजस्व विभाग की टीमें प्रभावित इलाकों में तैनात हैं। अधिकारियों ने बताया कि बारिश जारी रहने की संभावना को देखते हुए लोगों से अनुरोध किया गया है कि वे असुरक्षित स्थानों से सुरक्षित जगहों पर चले जाएं। पहाड़ी ढलानों के पास बने मकानों में रहने वाले परिवारों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। एसडीआरएफ टीम के पहुंचने के बाद मलबा हटाने का काम मशीनरी और मानव बल दोनों से किया जा रहा है। घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जाएगा। प्रशासन प्रभावित परिवार को राहत सामग्री और मुआवजे की प्रक्रिया भी शुरू करने वाला है।
August 18, 2026राजनीति में विरोधी को नाम देना पुरानी परंपरा है। कभी कोई देशद्रोही कहलाता है, कभी अराजकतावादी, कभी टुकड़े-टुकड़े गैंग और कभी किसी नए विशेषण से संबोधित किया जाता है। लेकिन लोकतंत्र की विडंबना तब सामने आती है, जब सत्ता की ओर से दिया गया कोई तंज विरोधियों के लिए ही पहचान और प्रतिरोध का प्रतीक बन जाए। दिमागी नक्सल भी अब इसी बहस का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री के तंज के बाद इस शब्द को राजनीतिक पहचान के रूप में इस्तेमाल किए जाने और बड़ी संख्या में लोगों के इससे जुड़ने के दावे ने एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा किया है क्या राजनीतिक विरोधियों को दिए गए विशेषण अब उनके खिलाफ नहीं, बल्कि उनके पक्ष में काम करने लगे हैं? यह केवल किसी नए राजनीतिक समूह के गठन का मामला नहीं है। इसके पीछे भारतीय राजनीति की बदलती भाषा और सोशल मीडिया के दौर में बन रहे नए राजनीतिक व्यवहार को समझने की जरूरत है। सत्ता जब किसी विरोधी विचार को खारिज करने के लिए एक कठोर विशेषण इस्तेमाल करती है तो वह शायद तत्काल राजनीतिक हमला समझती है। लेकिन सोशल मीडिया की दुनिया में शब्दों की यात्रा सत्ता के नियंत्रण में नहीं रहती। वही शब्द मीम बनता है, अभियान बनता है और कभी-कभी राजनीतिक पहचान का हिस्सा भी बन जाता है। यही इस पूरे घटनाक्रम की सबसे दिलचस्प बात है। लोकतंत्र का मूल स्वभाव ही असहमति है। सरकार की नीतियों पर सवाल करना, बेरोजगारी पर आवाज उठाना, महंगाई पर बहस करना, शिक्षा और स्वास्थ्य की बदहाली पर सवाल पूछना या किसी कानून का विरोध करना नागरिक जीवन का हिस्सा है। इन सवालों के जवाब तर्क और तथ्यों से दिए जाने चाहिए। यदि हर आलोचक को किसी खतरनाक राजनीतिक खांचे में डाल दिया जाएगा तो लोकतांत्रिक संवाद की जगह आरोपों की राजनीति ले लेगी। फिर मुद्दा यह नहीं रहेगा कि सवाल सही है या गलत। मुद्दा यह बन जाएगा कि सवाल पूछने वाला किस खेमे में है। यही स्थिति लोकतंत्र के लिए सबसे अधिक चिंताजनक है। दिमागी नक्सल नाम से सामने आए राजनीतिक प्रयोग को केवल मजाक या सोशल मीडिया की सनसनी मानकर खारिज करना भी जल्दबाजी होगी। क्योंकि जनता किसी राजनीतिक पहचान से क्यों जुड़ती है, यह सवाल ज्यादा महत्वपूर्ण है। अगर बड़ी संख्या में लोग सचमुच इससे जुड़ रहे हैं तो मुख्यधारा की पार्टियों को यह समझना होगा कि जनता के भीतर किसी तरह की राजनीतिक बेचौनी मौजूद है। लेकिन यहां एक दूसरी कसौटी भी है। किसी तंज को अपना नाम बना लेना आसान है, राजनीति करना कठिन। सोशल मीडिया पर समर्थन और चुनावी मैदान में समर्थन एक चीज नहीं है। चुनाव संगठन, उम्मीदवार, बूथ और स्थानीय मुद्दों के दम पर जीता जाता है। इसलिए इस नए प्रयोग की असली परीक्षा तभी होगी जब यह नाम से आगे बढ़कर नीति और कार्यक्रम की बात करेगा। आज भारतीय राजनीति को सबसे ज्यादा जरूरत भाषा में संयम और बहस में गंभीरता की है। राजनीतिक विरोधी दुश्मन नहीं होते। सत्ता बदलना लोकतंत्र की सामान्य प्रक्रिया है। आज जो सत्ता में है, कल विपक्ष में हो सकता है। इसलिए ऐसे विशेषणों की राजनीति अंततः किसी एक दल को नहीं, पूरी राजनीतिक संस्कृति को नुकसान पहुंचाती है। लोकतंत्र में किसी व्यक्ति को यह साबित करने की जरूरत नहीं होनी चाहिए कि वह सवाल पूछने के कारण राष्ट्रविरोधी नहीं है। सवाल पूछना नागरिक अधिकार है और सत्ता से जवाब मांगना लोकतंत्र की आत्मा। दिमागी नक्सल जैसा शब्द अगर अब राजनीतिक पहचान बन रहा है तो इसे केवल विरोधियों की चाल कहकर खारिज करने के बजाय सत्ता और विपक्ष दोनों को इससे पैदा हुए संदेश को पढ़ना चाहिए। क्योंकि लोकतंत्र में सबसे खतरनाक चीज असहमति नहीं, असहमति से डर है। तंज से राजनीति चमक सकती है, लेकिन लोकतंत्र मजबूत नहीं होता। लोकतंत्र तब मजबूत होता है जब सत्ता अपने आलोचक की आवाज सुनती है और आलोचक सत्ता के सामने तथ्य के साथ खड़ा होता है। इसलिए जरूरत किसी नए विशेषण की नहीं, एक ऐसी राजनीतिक भाषा की है जिसमें सवाल का जवाब सवाल से नहीं, तर्क से दिया जाए। यही लोकतंत्र की असली परीक्षा है।