ठग साधू कैसे पहुंचा सीएम तक?

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पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों की कार्यशैली पर सवाल
देहरादून। ऋषिकेश के एक प्रतिष्ठित ज्वेलर्स की पत्नी से लाखों की ठगी करने वाले बाबा को भले ही पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल पहुंचा दिया हो लेकिन सवाल यह है की ठग और अपराधी किस्म का यह तथाकथित साधु आखिर मुख्यमंत्री तक कैसे पहुंच गया? अगर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने अपना काम ठीक से किया होता तो शायद यह ठग साधु सीएम तक नहीं पहुंच सकता था।
अभी—अभी मुख्यमंत्री बने पुष्कर सिंह धामी इन दिनों अपने राज काम में अत्यधिक व्यस्त है, लेकिन इस व्यस्तता के बीच भी मुख्यमंत्री से अपनी पुस्तक का विमोचन कराने का समय इस ठग साधु को कैसे मिल गया? यह एक बड़ा सवाल है। खास बात यह है कि पीड़ित परिवार इस ठगी के बारे में इस साधू के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए बीते 3 जुलाई को पहुंचा था किंतु आरोपी साधु प्रियवत अनिवेस के विरुद्ध ऋषिकेश पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। अगर पुलिस ने समय रहते ठग साधु के खिलाफ कार्रवाई की होती तो वह सीएम तक नहीं पहुंच पाता। सूबे के आला पुलिस अधिकारियों और मुख्यमंत्री के साथ संबंधों का हवाला देकर वह पीड़ित पंवार ज्वेलर्स परिवार को धमकाता रहा। शायद इसी प्रभाव के दबाव में पुलिस भी कार्रवाई करने से बचती रही।
पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की लचर कार्यप्रणाली के कारण ही सीएम की भी किरकिरी हुई। पुलिस को यह जानने की जरूरत है कि यह ठग साधू किस व्यत्तिQ के माध्यम से मुख्यमंत्री तक पहुंच सका। अब जब इस ठग साधू का पूरा कच्चा चिठ्ठा सामने आ चुका है तो इसकी पूर्व सूचना सुरक्षा एजेंसियों व पुलिस को क्यों नहीं मिल सकी। यह पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों पर भी सवाल खड़ा करता है। ऐसे तो कोई भी सीएम तक पहुंच सकता है।

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