चुनौतियों का पहाड़

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उत्तराखंड की तीरथ सरकार इन दिनों कई समस्याओं से घिरी हुई है। अगर समय रहते उसके द्वारा इनका उचित समाधान नहीं किया जा सका तो चुनाव के दौरान उसे इसका भारी नुकसान हो सकता है। राज्य में हुई प्री मानसूनी बारिश से पूरे प्रदेश का जनजीवन अस्त—व्यस्त हो गया है। राज्य में भारी भूस्खलन और बारिश के कारण तमाम मुख्य मार्गाे सहित सैकड़ों संपर्क मार्गों पर आवागमन ठप हो गया हैै। बात चाहे पिथौरागढ़ की करें या फिर चमोली की या उत्तरकाशी तथा रुद्रप्रयाग की, जगह जगह हुई भूस्खलन की घटनाओं के कारण लोग फंसे हुए हैं। पिथौरागढ़ में हुई भारी बारिश के कारण चारधाम परियोजना के तहत बनी ग्यारह सौ करोड़ की सड़क पानी में बह गई व जौलजीबी पुल भी संकट की जद में आ गया है। सरकार एक तरफ चारधाम यात्रा को शुरू करने की तैयारियों में जुटी है वहीं दूसरी तरफ राज्य की तमाम सड़कें आपदा की जद में आ गई हैं। सरकार के सामने अब मानसूनी आपदा से लोगों के जानमाल की सुरक्षा किए जाने की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। राज्य में हुए महाकुंभ के दौरान कोरोना जांच घोटाले ने भी सरकार को परेशानी में डाल दिया है। मामला भले ही हाईकोर्ट में सही तथा सरकार ने इस घोटाले की जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी हो लेकिन भाजपा के कार्यकाल में कुंभ दर कुंभ होने वाले घोटालों ने विपक्ष को एक मजबूत मुद्दा थमा दिया है। इस अति संवेदनशील मामले की अगर जांच ठीक से आगे बढ़ी तो इसकी आंच कुछ बड़े सफेदपोशों को क्षति पहुंच सकती है। आपदा काल में लोगों की जान से खिलवाड़ के इस मामले ने भाजपा की इन दिनों नींद उड़ा रखी है। कोविड की दूसरी लहर भले ही अब थम चुकी हो और आपदा प्रबंधन की नाकामियों के मुद्दे पर विपक्ष हमलावर हो लेकिन तीसरी लहर से निपटने की राज्य में कोई तैयारी नहीं हो पा रही है। चुनाव से पूर्व आने वाली इस संभावी लहर भी भाजपा के लिए बड़ा संकट बनी हुई है। तमाम समस्याओं से जूझ रही उत्तराखंड सरकार को यह सोचने तक का समय नहीं मिल पा रहा है कि तीरथ सिंह रावत को चुनाव भी लड़ना है विपक्ष ने अब विधानसभा चुनाव के लिए 1 साल से कम का समय बचा होने के कारण संवैधानिक व्यवस्थाओं का सवाल उठा रखा है। भले ही चुनाव आयोग तीरथ सिंह को चुनाव लड़ने की अनुमति दे दे लेकिन विपक्ष का दावा भी हवा में नहीं है। बाद सिर्फ सीएम के चुनाव लड़ने व जीतने की चुनौती तक सीमित नहीं है 2022 के विधानसभा चुनाव की भी है। भाजपा इन मुद्दों को लेकर चुनाव मैदान में जाएगी और कैसे चुनाव जीत पाएगी? सबसे बड़ी चुनौती है।

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