अब तक का सबसे युवा चेहराः पुष्कर सिंह धामी होंगे मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड

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देहरादून। बीते चार दिनों से जारी राजनीतिक उठा पटक और गहमा—गहमी का पटाक्षेप आज भाजपा विधानमंडल दल की बैठक में पुष्कर सिंह धामी का नाम नेता विधानमडंल दल के रूप में घोषित किये जाने के साथ हो चुका है। तीरथ रावत की विदाई के बाद अब पुष्कर सिंह धामी सूबे के नये मुख्यमंत्री होगें। पुष्कर धामी खटीमा से दो बार विधायक रहे हैं तथा भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं।
भाजपा मुख्यालय में आज दोपहर बाद केन्द्रीय पर्यवेक्षक नरेन्द्र सिंह तोमर, प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम और डी.पुरंदेश्वरी तथा रेखा वर्मा की मौजूदगी में हुई विधान मंडल दल की बैठक में नये नेता के नाम का प्रस्ताव कार्यवाहक सीएम तीरथ सिंह रावत द्वारा रखा गया। जिसका समर्थन सभी विधायकों द्वारा एक स्वर से किया गया। संभावना जताई जा रही है कि नये मुख्यमंत्री आज ही पद और गोपनीयता की शपथ ग्रहण करने जा रहे है। उनके साथ आज कितने मंत्री शपथ ग्रहण करेंगे समाचार लिखे जाने तक स्थिति साफ नहीं हो सकी है।
निर्वतमान मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के बीते बुधवार को दिल्ली जाने से शुरू हुई यह उठापटक कल उस समय तेज हो गयी थी जब तीरथ सिंह पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा से मिलकर उनके घर से निकले थे। कल शाम दिल्ली से लौट कर सीएम तीरथ सीधे सचिवालय पहुंचे और मीडिया को वार्ता केे लिए बुलाया गया। तभी साफ हो गया था कि उनकी विदाई तय हो चुकी है। पत्रकार वार्ता में उन्होने सिर्फ अपने कार्यकाल की उपलब्धियंा गिनाई गयी। उनकी बाडी लैंग्वेज व भाषा श्ौली से साफ हो गया था कि वह कभी भी इस्तीफा दे सकते है। सचिवालय से वह घर पहुंचे और सवा ग्यारह बजे राजभवन जाकर राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया।
उल्लेखनीय है कि तीरथ सिंह रावत ने इसी साल 10 मार्च को मुख्यमंत्री पद संभाला था अभी उनके कार्यकाल के चार महीने भी पूरे नहंी हुए है कि भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व ने राज्य में एक बार फिर संवैधानिक संकट का हवाला देकर मुख्यमंत्री बदल दिया और कांग्रेस को बैठे बिठाये एक बड़ा चुनावी मुद्दा दे दिया है। यह सर्वविदित है कि नेता विधानमंडल दल की बैठक और नेता का चयन महज एक औपचारिकता भर है। जे पी नड्डा और अमित शाह से मुलाकात के समय तीरथ को हटाने का समय ही यह तय कर लिया गया था कि अगला सीएम कौन बनाया जायेगा।
विधान मंडल दल की बैठक से पूर्व आज बीजापुर गेस्ट हाउस में दिल्ली से आये नेताओं ने सभी विधायकों, सांसदो और नेताओं के साथ बैठक की और उनका रूख जानने की कोशिशें की गयी। इस बीच पूर्व सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत, काबीना मंत्री सतपाल महाराज, धन सिंह रावत, विशन सिंह चुफाल व ऋतु खण्डूरी सहित कई नाम चर्चाओं में रहे।

तीरथ तो बहाना, ममता है निशाना
देहरादून। इस उठापटक का कारण तलाशने में लगे तमाम नेताओं की जुबान पर यही चर्चा रही कि तीरथ को भाजपा ने बलि का बकरा इसलिए बनाया है कि इसकी आड़ में महामारी की आपदा को आधार बनाकर चुनाव न कराने का संवैधानिक संकट खड़ा कर ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने पर विवश किया जा सके।
कुछ लोगों का कहना यह भी है कि भाजपा को यह पता चल चुका था कि तीरथ रावत अगर मुख्यमंत्री बने रहते है और उनके नेतृत्व में चुनाव होता है तो भाजपा चुनाव नहीं जीत सकेगी।

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