हमने संकल्प पूरा कियाः धामी

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  • जनजातियों को पहले से ही विशेषाधिकार प्राप्त
  • राज्यों को कानून लाने का अधिकार देता है अनुच्छेद 44
  • महिलाओे, बच्चों सभी को सुरक्षा देगा यूसीसी

देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा से यूसीसी बिल पास होने को लेकर भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है। जश्न के इस माहौल के बीच तमाम सामाजिक और धार्मिक संगठनों के साथ—साथ राजनीतिक लोग इसकी समीक्षा और बारीकियाें को तलाशने तथा चुनावी नफा नुकसान का गणित लगाने में जुटे हुए हैं। जिन मुद्दों पर संशय या सवाल उठाये जा रहे हैं उन पर मुख्यमंत्री धामी द्वारा बेबाकी के साथ सफाई देते हुए कहा जा रहा है कि इसका सभी को लाभ मिलेगा। हमारे द्वारा पूरी ईमानदारी और साफ नियत तथा मंशा से इस बिल को लाया गया है और अगर इसमें कहीं कोई दिक्कत पेश आती है तो कानून में संशोधन होते रहते हैं इसमें भी संशोधन हो सकता है।
उनका कहना है हमने 12 फरवरी 2022 को जो संकल्प लिया था उसे हमने पूरा कर दिया है। 7 फरवरी 2024 को यह बिल विधानसभा से पारित हुआ है राजभवन की मंजूरी के बाद इसे राष्ट्रपति भवन की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और जैसे ही राष्ट्रपति भवन से मंजूरी मिलेगी सरकार इसका नोटिफिकेशन जारी कर देगी और उत्तराखंड में यूसीसी लागू हो जाएगा। उनका कहना है इसका ड्राफ्ट तैयार करने में बहुत मेहनत की गई है हर धर्म, संप्रदाय, जाति व वर्ग का पूरा ध्यान रखा गया है। उनसे जब इस बिल को महिला हितों पर आधारित बिल होने की बात कही गई तो उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है इसमें महिलाओं, बच्चों और सभी वर्गों का ख्याल रखा गया है।
लिव इन रिलेशन पर रजिस्टार को सभी अधिकार देने के सवाल पर उन्होंने कहा इसका उद्देश्य बेटियों की सुरक्षा है हमने देखा कैसे उन्हें टुकड़े—टुकड़े कर सूटकेसों में रखने के कृत्य होते रहे हैं। चर्चा के लिए पर्याप्त समय न दिए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि हमने तो ड्राफ्ट कमेटी के गठन पर उनकी राय मांगी थी, सदन में इस पर दो दिन चर्चा हुई है। इस बिल को केंद्र सरकार द्वारा लाये जाने के अधिकार पर उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 44 राज्य सरकारों को जनहित में कानून लाने का अधिकार देता है वहीं उन्होंने जनजातियों को इसकी परिधि से बाहर रखे जाने के सवाल पर कहा कि संविधान अनुसूची 322 में उन्हें पहले से ही कुछ विशेषाधिकार प्राप्त है। जनजातियों का कहना है कि उन्हें सोचने का थोड़ा समय दिया जाए वह खुद यूसीसी के दायरे में आने को तैयार हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा प्रदेश शांत प्रदेश है दल अलग है, नेता अलग है विचारधारा अलग हो सकती है लेकिन बिल अच्छा है इसका सभी को लाभ मिलेगा इसकी शुरुआत उत्तराखंड से हुई यह हमारे लिए गर्व की बात है।

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