- देवभूमि पर ‘अपनों’ का ‘दाग’
- देवभूमि में संगठन-सत्ता के बीच पिस रही है कानून-व्यवस्था
- उत्तराखंड में महिला अपराधों ने बढ़ाया प्रदेश में सियासी पारा
- सूबे में बेटियों की सुरक्षा पर बड़ा विपक्षी पूछ रहे हैं सवाल
- भाजपा नेताओं के नाम आने से गरमाया राजनीतिक माहौल
देहरादून। उत्तराखंड में सत्ता, संगठन और कानून व्यवस्था कटघरे में है। चंपावत से लेकर हरिद्वार तक ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जिन्होंने सरकार की बेटी बचाओ के नारों पर सवाल खड़े किए हैं। प्रदेश में महिलाओं के विरु( अपराध और उनमें सत्ताधारी दल से जुड़े चेहरों की संलिप्तता ने प्रदेश के राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। अंकिता भंडारी हत्याकांड के बाद जनता के भीतर जो आक्रोश पैदा हुआ था, वह अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ कि नए मामलों ने फिर बहस छेड़ दी है।
सबसे ताजा और चौंकाने वाला मामला मुख्यमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र चंपावत से सामने आया है। यहाँ एक 10वीं की छात्रा के साथ गैंगरेप के मामले में भाजपा के एक मंडल उपाध्यक्ष, एक पूर्व प्रधान और एक छात्र पर गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़ित एक दोस्त की मेहंदी की रस्म में गई थी, जहाँ से उसे बंधक बनाकर इस घृणित कार्य को अंजाम दिया गया। इससे पूर्व हरिद्वार में एक पूर्व भाजपा महिला मोर्चा नेत्री ने अपने ही प्रेमी और उसके साथियों को अपनी नाबालिग बेटी का यौन शोषण करने की अनुमति दी। वही अल्मोड़ा के भाजपा ब्लाक प्रमुख भगवत बोरा पर एक 14 वर्षीय किशोरी के साथ दुष्कर्म का आरोप लगा था। मामला तब बढ़ा जब आरोपी ने पीड़िता के परिवार को धमकाने की कोशिश की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले महिला सुरक्षा एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है। खासतौर पर पहाड़ की महिलाओं और युवाओं के बीच यह भावना मजबूत हो रही है कि राजनीति में चरित्र और जवाबदेही पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। सवाल केवल किसी एक पार्टी या नेता का नहीं, बल्कि उस भरोसे का है जो जनता लोकतंत्र और शासन व्यवस्था पर करती है। सत्ता में बैठे लोग महिलाओं की सुरक्षा और न्याय के मुद्दे पर कितने गंभीर हैं।
उत्तराखंड में पिछले कुछ समय में सत्तारूढ़ भाजपा के कुछ नेताओं और उनके करीबियों पर गंभीर आरोप लगने का क्रम जारी हैं, जिससे प्रदेश की राजनीति में उबाल है। विपक्ष इन मुद्दों को कानून-व्यवस्था की विफलता बताकर सरकार को घेर रहा है। राजनैतिक विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में इन मुद्दों की आंच से भाजपा को नुकसान भी हो सकता है।
इंसाफ की सबसे लंबी लड़ाई
उत्तराखंड के इतिहास में सबसे ज्यादा चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में मई 2025 में कोटद्वार कोर्ट ने मुख्य आरोपी पुलकित आर्य ;पूर्व भाजपा नेता का बेटाद्ध और उसके साथियों को दोषी करार दिया। हालांकि यह मामला हत्या का था, लेकिन इसमें स्पेशल सर्विस के नाम पर यौन उत्पीड़न के दबाव की बात सामने आई थी, जिसने पूरे राज्य को हिला कर रख दिया था।




