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पुल बन गया एप्रोच रोड है नहीं

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देहरादून। लगभग 50 करोड़ रुपए की लागत से बना पुल विभागीय एवं अन्य जनप्रतिनिधियों की अपरिपक्वता, नासमझी, कमीशन खोरी की वजह से शोपीस बनकर रह गया है।
यह बात आज आज जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी द्वारा कही गयी। उन्होने उत्तराखंड एवं हिमाचल प्रदेश को जोड़ने वाला सेतु सिंहपुरा (हिप्र)— नावघाट( उत्तराखंड) पुल की कनेक्टिविटी मामले में फिर से मुख्य सचिव आनंद बर्धन को ज्ञापन सौंपकर कार्यवाही का आग्रह किया, जिस पर मुख्य सचिव ने सचिव, लो.नि.वि. को कार्यवाही करने एवं हिमाचल प्रदेश सरकार को पत्र प्रेषित करने के निर्देश दिए। नेगी ने कहा कि मोर्चा द्वारा पूर्व में भी मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी से कार्यवाही का आग्रह किया था, जिस पर सचिव, लोक निर्माण ने हिमाचल प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव, लो.नि.वि. को पत्र प्रेषित कर कार्रवाई का आग्रह किया था। नेगी ने कहा कि लगभग 50 करोड़ रुपए की लागत से बना उक्त पुल विभागीय एवं अन्य जनप्रतिनिधियों की अपरिपक्वता, नासमझी, कमीशन खोरी की वजह से शोपीस बनकर रह गया है, जिसकी वजह से सरकार का करोड़ों रुपया बेकार हो रहा है एवं उक्त पुल का वर्तमान में जनता को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। हिमाचल प्रदेश से कनेक्टिविटी न होने के चलते सरकार का पैसा बर्बाद हो रहा है। सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि उक्त कनेक्टिविटी मामले में कोई कानूनी अड़चन फंसी है, जोकि हिमाचल प्रदेश के अधिकारियों द्वारा सुलझाए जाने की दिशा में कार्य कर रही है। नेगी ने कहा कि भ्रष्ट अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों की जुगलबंदी के चलते सरकार का करोड़ों रुपया बर्बाद हो रहा है। कहा कि अप्रैल 2015 में स्वीकृत पुल बगैर हिमाचल प्रदेश सरकार से पुख्ता एमओयू साइन किये जाने से लगभग एक—दो साल से बनकर तैयार हो गया है, लेकिन सिंहपुरा तक की कनेक्टिविटी भूमि अधिग्रहित/ अर्जन किये बगैर ही कर दी गई। हैरानी की बात है कि पुल निर्माण से पहले हिमाचल प्रदेश सरकार से कोई लिखित दस्तावेज नहीं लिए गए है।

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