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विश्व रक्षा के लिए विषपान करने वाले शिव भक्तों की पीड़ा स्वयं पर ले लेते हैंः आचार्य ममगांई

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देहरादून। त्रिदेवों में भगवान शिव को सबसे जल्दी प्रसन्न होने वाला माना गया है। भगवान शिव को ट्टभोलेनाथ’ और ट्टऔघड़’ माना गया है जिसका तात्पर्य यह है कि वो किसी को बहुत अधिक परेशान नहीं देख सकते और भत्तQ की थोड़ी सी भी परेशानी उनकी करुणा को जगा देती है। विश्व कल्याण के लिए स्वयं विष दुसरों को अमृत पिलायें वाले ही शिव यह बात अनारवाला भद्रकाली मन्दिर में चल रही शिवपुराण की कथा में आचार्य शिवप्रसाद ममगांई शंकर के विष अमृत की विस्तृत व्याख्या में कहा कि हम कैसे ध्यान करें भगवान कल्याण करते हैं। नीलकंठ रूपेण करुणामय भगवान शिव अपने भक्तों की पीड़ा स्वयं पर ले लेते हैं। इसलिए शास्त्रानुसार जो कोई भी भगवान शिव की दिल से पूजा करता है, वह सदैव ही सभी परेशानियों से मुत्तQ रहता है।
ऐसे तो भगवान शिव की पूजा की कई विधियां हैं लेकिन सामान्य रूप से बिल्वपत्र चढ़ाकर शिवलिंग पर केवल जल अर्पण करना भी भोलेनाथ की कृपा दिलाता है। अगर यह क्रिया कुछ मंत्रों के उच्चारण के साथ की जाय, तो भोलेशंकर व्यत्तिQ की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं।
आचार्य ममगांई कहते हैं, हर प्रकार की पूजा और मंत्र उच्चारण में 108 का बहुत महत्व है। ऊँ नमः शिवाय मंत्रों के साथ आप भगवान शिव की पूजा या शिवलिंग पर जलापर्ण करें तो आपकी हर मनोकामना पूर्ण होगी। सोमवार या श्रावण सोमवार के दिन ऐसा करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है भगवान शंकर को अनजान में भी पूजा जाय विल्वपत्र अर्पण कर दिया जाय तो सब मनोरथ सिद्ध होजाते हैं सोमनी नाम की एक अन्धी शिव भत्तQ के पीछे लग गयी थी कुछ खानें को दो उसनें पूजा थाली से वाल्वपत्र फेंके अलक्ष्य समझकर उसने फेंके वह शिव जी के उपर गिरे वहीं रात्री बुखार आनें पर उसकी मृत्यु हुई शिव दुखों ने आकर उसे शिव लेकर वहां का सुख दिया अनेक प्रसङ्गो में भावविभोर कर दिया।
कथा के माध्यम से लोगों को वहीं समिति के अध्यक्ष नलिन प्रधान विजय प्रधान और मुख्य पुजारी पुष्कर कैन्थोला ने कहा 24 तारीख को भण्डारा होगा और कथा का विराम होगा। क्षेत्रीय लोग बढ़चढ़कर भाग लेते हैं क्योंकि भद्रकाली मया के प्रति अपार श्रद्धा है। आचार्य ममगांई को सुनने लोग दूर दूर से आते हैं।
आज विशेष रूप से कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री गोदावरी थापली अध्यक्ष नलिन प्रधान विजय थापा पुष्कर कैंथोला आचार्य संदीप बहुगुणा आचार्य प्रदीप नौटियाल आचार्य दिवाकर भटृ आचार्य अंकित भटृ तरूण सती विशेश्वरी कैंथोला सरस्वती प्रधान पूर्णिमा प्रधान अनिता शाही प्रधान रमा थापा पूर्णिमा गुरूंग अनुप राणा सन्तोष राण श्रीमति विजया निर्मला अनिता ममता सिकन्दर अरूणा गुरूंग सुहेल गुरूंग जितेन्द्र सुमित्रा गुरूंग विजय लामा अरूण गुरूंग राजा भण्डारी खुशियां कुकरेती वर्षा गुरूंग मीरा गुरूंग रजिया राणा बबली थापा जुगनू थापा कलावती रीना सावित्री पारुल प्रधान आदि सम्मलित थे।

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