मणिपुर में सुरक्षा बलों ने 790 हथियार, 10,648 गोला-बारूद बरामद किए

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इम्फाल। मणिपुर में सुरक्षा बलों ने 790 परिष्कृत और स्वचालित हथियार तथा 10,648 गोला-बारूद बरामद किए हैं, जो 3 मई को हुए जातीय दंगों के दौरान पुलिस और विभिन्न अन्य प्रतिष्ठानों से लूटे गए थे। एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। इम्फाल में राज्य सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि मणिपुर पुलिस कमांडो तथा अन्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के साथ, जिनमें सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस शामिल हैं, सेना और असम राइफल्स ने लूटे गए हथियारों की बरामदगी और उग्रवादियों को पकड़ने के लिए अपना तलाशी अभियान जारी रखा है।
रक्षा सूत्रों ने कहा कि शांति बहाली के लिए छीने गए हथियारों की बरामदगी महत्वपूर्ण है। एक संयुक्त रणनीति के तहत इसके लिए अभियान चल रहा है जो क्रमिक तरीके से जारी रहेगा। रक्षा प्रवक्ता ने कहा, तलाशी अभियान ड्रोन और क्वाड-कॉप्टर की निगरानी में चलाए जा रहे हैं। अब तक के अभियानों में बड़ी संख्या में हथियार (ज्यादातर स्वचालित), मोर्टार, गोला-बारूद और अन्य जंगी सामान बरामद किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन अभियानों का संचालन करते समय यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि स्थानीय लोगों को परेशान न किया जाए और साथ सुरक्षा कर्मियों की सुरक्षा भी बनी रहे।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश के बाद सुरक्षा बलों ने एक बार फिर उन सभी लोगों से अपील की है जिनके पास लूटे गए हथियार हैं, कि वे राज्य में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए जल्द से जल्द आत्मसमर्पण करें। सुरक्षा बलों ने यह भी चेतावनी दी कि इन हथियारों को सरेंडर करने में विफल रहने पर ऐसे सभी लोग कड़ी कानूनी कार्रवाई के लिए स्वयं उत्तरदायी होंगे। शाह ने 1 जून को हिंसा प्रभावित राज्य के अपने चार दिवसीय दौरे के अंतिम दिन सभी संबंधितों से अनुरोध किया था कि वे अपने हथियार सुरक्षा बलों और प्रशासन को सौंप दें, अन्यथा हथियार और गोला-बारूद रखने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों ने कहा कि वर्तमान में 13 जिलों में सामुदायिक हॉल सहित 272 राहत शिविरों में विभिन्न समुदायों के लगभग 37,450 लोगों को आश्रय दिया जा रहा है। अधिकारियों ने कहा कि इम्फाल पश्चिम और इम्फाल पूर्वी जिलों सहित अधिकांश जिलों में कर्फ्यू में 7-12 घंटे की ढील दी गई है। तामेंगलोंग, नोनी, सेनापति, उखरुल और कामजोंग जिले वर्तमान में कर्फ्यू के दायरे में नहीं हैं।

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