बर्खास्त कर्मचारियों ने किया सरकार के खिलाफ धरना—प्रदर्शन

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2001 से लेकर अब तक के सभी कर्मचारियों को बर्खास्त करें या हमें भी नौकरी पर रखें

देहरादून। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से न्यायिक लड़ाई हार चुके 228 वह बर्खास्त कर्मचारी जिन्होंने बैक डोर से नौकरी पाई थी अब धरने प्रदर्शन कर सरकार पर अपनी बहाली का दबाव बना रहे हैं। विधानसभा भवन पर आज इन कर्मचारियों ने सांकेतिक धरना देकर स्पीकर ऋतु खंडूरी के न्याय और फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे आधा अधूरा न्याय बताया।
प्रदर्शनकारी बर्खास्त कर्मचारियों का कहना है कि जब स्पीकर द्वारा इस मामले के लिए गठित डीके कोठिया समिति द्वारा 2002 से लेकर अब तक की सभी भर्तियों को गैरकानूनी और अवैध ठहराया गया है तो फिर 2016 के बाद मिली नियुक्तियों पर ही बर्खास्तगी की कार्रवाई क्यों? इससे पूर्व की गई सभी नियुक्तियों को रद्द क्यों नहीं किया गया।
इनका तर्क है कि 2014 में नियुक्त हुए कर्मचारी 2 साल की नौकरी के बाद 2016 में स्थाई नियुक्ति पा जाते हैं और हमने छह—सात साल नौकरी की तथा 6—7 साल काम करने के बाद भी उन्हें बर्खास्त कर दिया जाता है यह कहां का न्याय है? इन कर्मचारियों द्वारा न सिर्फ स्पीकर के फैसले पर सवाल उठाते हुए यह कहा गया है कि या स्पीकर हमारी नियुक्तियों को भी बहाल करें या फिर 2001 से लेकर अब तक हुई सभी नियुक्तियों को रद्द करें। इनमें से कई कर्मचारी यह कहते हुए भी देखे गए कि अब उनके सामने जीवन मरण का संकट खड़ा हो गया है तथा अपने भरण—पोषण का कोई साधन नहीं बचा है। उन्हें कहीं दूसरी नौकरी भी नहीं मिल सकती है इसलिए अब आत्महत्या करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। अगर उन्हें नौकरी पर नहीं रखा गया तो वह अपनी जान दे देंगे। विधानसभा भवन पर प्रदर्शन करने वालों में तमाम महिला कर्मचारी भी शामिल थी। जिनके हाथों में स्पीकर का तलवार लिए हुए कार्टून बनाया गया था और सर धड़ से अलग होकर पड़े कर्मचारी दर्शाए गए थे।
उल्लेखनीय है बैक डोर भर्तियों का मामला प्रकाश में आने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने 3 सितंबर को डीके कोठिया की अध्यक्षता में 3 सदस्यीय जांच समिति बनाई थी। जिसने 22 सितंबर को अपनी रिपोर्ट स्पीकर को सौंपी थी तथा 23 सितंबर को स्पीकर द्वारा 2016 के बाद नियुक्त किए गए 228 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया था। जिन्हें हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट से भी कोई राहत नहीं मिल सकी है।

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