देहरादून। राजधानी की सड़कें जाम से कराह रही हैं, पर्यटक घंटों गाड़ियों में फंसे पसीना बहा रहे हैं, लेकिन ट्रैफिक संभालने वाली सीपीयू मानो “गली दर्शन अभियान” में जुटी हुई है। शहर की मुख्य सड़कों पर हालात ऐसे हैं कि वीकेंड आते ही देहरादून रेंगने लगता है, मगर जिम्मेदार अमला गलियों की खाक छानता नजर आ रहा है।
तस्वीरें खुद कहानी बयां कर रही हैं। जहां राजपुर रोड से लेकर सचिवालय मार्ग तक वाहन रेंगते दिखते हैं, वहीं सीपीयू की मौजूदगी उन गलियों में ज्यादा दिख रही है जहां मुश्किल से दो स्कूटर आमने—सामने आते हों। सवाल उठ रहा है कि आखिर ट्रैफिक पुलिस का असली मिशन क्या है जाम हटाना या सिर्फ गश्त का आंकड़ा बढ़ाना?

सबसे दिलचस्प हाल तो पुलिस मुख्यालय से सचिवालय तक का है। यहां रसूखदारों की गाड़ियां सड़क किनारे ऐसे खड़ी रहती हैं मानो सड़क उनके बाप की जागीर हो। आम आदमी का चालान मिनटों में कट जाता है, लेकिन वीआईपी नंबर प्लेट देखते ही सिस्टम की सीटी गुल हो जाती है। नतीजा हर रोज लंबा जाम और जनता बेहाल।
लोगों का कहना है कि अगर सच में देहरादून को जाम से राहत दिलानी है तो गलियों में घूमने से नहीं, बल्कि सड़कों पर कब्जा जमाए रसूखदार वाहनों पर डंडा चलाना होगा। वरना “सीपीयू की गली गश्त” और “देहरादून का जाम” दोनों ऐसे ही चलते रहेंगे।




