देहरादून। उत्तराखण्ड सचिवालय परिसर में भरी दोपहर उपनल कर्मचारी द्वारा अनु सचिव पर बंदूक ताने जाने की घटना से सचिवालय की सुरक्षा पर ही सवाल खड़े हो गये है। हालांकि मामले में पुलिस द्वारा यह कहा जाना की बंदूक नकली थी यह अपने आप में हास्यापद बात है। क्योंकि सचिवालय जैसी अति सुरक्षा घेरे वाली जगह पर नकली हो या असली आखिर बंदूक अन्दर तक कैसे पहुंची यह अपने आप में बड़ा सवाल है।
विदित हो कि बीती दोपहर सचिवालय मेें अनु सचिव के पद पर तैनात बलवंत सिंह भाकुनी की उपनलकर्मी हरीश चन्द्र ध्यानी निवासी बंजारावाला से किसी बात को लेकर बहस हो गयी। बात इतनी बढ़ी कि उपनलकर्मी हरीश चन्द्र ध्यानी ने अनु सचिव बलवंत सिंह भाकुनी पर बन्दूक तान दी। मामले में पुलिस ने अनु सचिव की तहरीर पर उपनलकर्मी के खिलाफ मुकदमा तो दर्ज कर लिया। साथ ही यह भी दावा किया कि बन्दूक नकली थी।
सवाल यह है कि सचिवालय जैसी अति सुरक्षा घेरे वाली जगह जहंा 24 घंटे सुरक्षा कर्मी तैनात रहते है साथ ही बिना चैकिंग कराये कोई अन्दर नहीं घुस सकता ऐसी जगह पर बन्दूक का पहुंच जाना सचिवालय की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े करता है। क्योंकि वहंा आलाधिकारियों की फौज व मंुख्यमंत्री, मंत्री, विधायको सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों का आना जाना लगा रहता है। ऐसी जगह में सचिवालय परिसर तक बन्दूक का पहुंच जाना सचिवालय की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े करता है। बात असली—नकली बन्दूक की नहीं है बात यह है कि क्या इस मामले में सुरक्षा ऐजेंसियों से कोई बड़ी चूक हुई है जो यह बदंूक सचिवालय के अन्दर तक पहुंच गयी।




