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हृदय विदारक हादसा

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गुजरात के अहमदाबाद में कल दोपहर हुए जिस हृदय विदारक हवाई हादसे में 265 लोगों की जान चली गई वह अपने आप में सिर्फ एक बड़ी दुर्घटना नहीं है बल्कि अपनी तरह की ऐसी अनोखी घटना है जो इससे पूर्व कभी न हुई है न देखी सुनी गई है। एयर इंडिया का यह विमान ए आई 171 बोईंग 787—8 वर्तमान दौर का सबसे अधिक विश्वसनीय, सुरक्षित तथा अत्याधुनिक तकनीकी विमान है जिसकी कभी किसी दुर्घटना का इतिहास नहीं है। हवाई हादसों के इतिहास में भी इस तरह किसी विमान के हादसे का शिकार होने की अन्य कोई दुर्घटना नहीं है। दुनिया के सबसे महंगे और सुरक्षित समझे जाने वाले इस विमान का उड़ान भरने के मात्र 2 मिनट में हादसे का शिकार होना और एक व्यक्ति को छोड़कर अन्य सभी की मौत होना अत्यंत ही हृदय विदारक और चिंतनीय है इस दुर्घटना में विमान में सवार 247 लोगों सहित कुल 265 लोगों के मरने की बात सामने आई है। हादसे के समय यह विमान महज तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित मेडिकल कॉलेज के छात्रावास की बिल्डिंग से टकराया और आग लग गई। विमान में सवार यात्रियों की मौत जलकर मरने से ही हुई है वहीं छात्रावास में कुल कितने छात्र—छात्राओं की मौत का कारण यह हादसा बना इसकी पूरी जानकारी नहीं मिल सकी है। मृतकों की पहचान संभव नहीं है इसलिए अब उनके डीएनए का सहारा लिया जा रहा है। बात अगर विमान हादसों और उनके इतिहास की करें तो तकनीकी खराबी आने से विमान के समुद्र में गिरने से लेकर गलत सिग्नल मिलने से हवा में दो विमानों के टकराने की घटनाओं से लेकर बारिश में रनवे पर फिसलने के कारण सहित तमाम अन्य कारण हमारे सामने हैं। लेकिन वर्तमान समय में अहमदाबाद में हुआ यह हादसा बिल्कुल अलग तरह का हादसा है। इस विमान में दो इंजन होते हैं तब क्या दुर्घटना से पूर्व विमान के दोनों इंजन फेल होने का दुर्लभ संयोग हादसे का कारण बना या अन्य कोई ऐसी तकनीकी खराबी जिसे उड़ान भरने से पूर्व जांच में नहीं पकड़ा जा सका। इस विमान की उड़ान क्षमता 14000 किलोमीटर तक है। जबकि इसका यह सफर जो अहमदाबाद से ब्रिटेन के गेट विग एयरवेज तक का था जो 7000 किलोमीटर के आसपास ही था माना जा रहा है कि विमान में हादसे के समय आधा टैंक से अधिक यानी की 1000 लीटर के आसपास फ्यूल हो सकता है। दुर्घटना के तुरंत बाद यह विमान आग का गोला बन गया और सब कुछ उस आग में जलकर स्वाहा हो गया। हादसे का कारण जांच के बाद ही पता चल सकेगा लेकिन दिल दहला देने वाले इस हादसे ने अपनी पीछे अनेक ऐसे सवाल छोड़ दिए हैं जिनका उत्तर ढूंढा जाना जरूरी है। एयर इंडिया का नाम और जिस कंपनी द्वारा इस ए आई 171 का निर्माण किया जाता है उसकी साख पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है कि एनिमेशन के क्षेत्र में सुरक्षा एक सबसे अहम मुद्दा है। कोई यात्री अपनी जान संकट में डालने वाली किसी यात्रा पर नहीं निकल सकता है। भले ही हर एक छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी उड़ान से पहले जांच की एक लंबी प्रक्रिया होती है। टेक्नीशियन विशेषज्ञो द्वारा हर एक पार्ट की गहनता से जांच की जाती है क्योंकि सभी को यह पता होता है कि एक छोटी सी चूक भी हादसे का कारण बन सकती है और हवा में होने वाले इन हादसों में 100 फीसदी तक नुकसान तय माना जाता है। भले ही कोई व्यक्ति संयोग से बच जाए लेकिन बचाओ व राहत कार्य भी इसमें कोई बड़ी मदद नहीं पहुंचा पाते। हवाई सफर को और अधिक सुरक्षित बनाने की कोशिशे हमेशा जारी रहती हैं लेकिन इसे और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है। जो हो चुका है उसके सच को स्वीकार करना ही पड़ेगा। टाटा ग्रुप द्वारा पीड़ित प्रभावित परिवारों की मदद के लिए बढ़ाया गया हाथ मानवीयता वह सद्भाव से भरा है जिसमें एक—एक करोड़ की मदद दी गई है। इसके लिए टाटा ग्रुप को साधुवाद। ईश्वर इस हादसे से मृतकों को शांति प्रदान करें तथा परिजनों को इस दुख को सहने का हौसला दे।

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